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जनपद में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में बड़ा घोटाला।

कपिलदेव मौर्या
विभाग के अधिकारी, बाबू,दलाल एवं अपात्र हुए मालामाल,पात्र आज भी है बेहाल। 
    जौनपुर। सरकारी योजनाओ का लाभ सामान्य पात्र जनेा तक कैसे पहुंच सकेगा जब सरकारिया तंत्र ही भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबा हो  ? जब अधिकारी अपने कर्मचारियों के साथ दलालों के चंगुल में हो जाये तो फिर सरकारी योजनाओं के विषय में बात करना ही गलत होगा। जी हां हम बात कर रहे है इस जनपद के समाज कल्याण विभाग की जो भ्रष्टाचार के आकंठ में गोते लगाने के लिए जाना जाता है और आये दिन भ्रष्टाचार के हैरतअंगेज कारनामे करना उसका आदत बन चुका है।अबकी बार राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में करोणो रू0 के लूट पाट का मामला प्रकाश में आया है। अधिकारी कर्मचारी एवं दलाल तीनो मिलकर वित्तीय वर्ष 2014-15 में फर्जीवाड़े का बड़ा खेल किया है लाभार्थियों की सूची में अपात्रों का नाम डालकर लगभग एक करोण के आसपास का चूना लगा दिये है। अब कागजी बाजीगरी का खेल करके स्वयं को सुरक्षित करने की फिराक में है। जांच के नाम पर किसी दूसरे विभाग के लोगो को जिम्मेदार ठहराने का षड़यन्त्र कर रहे है तभी इनके कुकृत्य की पोल मीडिया के हाथ लग गयी।
      राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना एक ऐसी योजना है जिसके तहत सरकार ने घर के मुखिया के निधन पर सम्बन्धित बिधवा को 20 हजार रू0देने की ब्यवस्था दी है।सरकार के निर्णयानुसार शुरू  की गयी इस योजना के संचालन का दायित्व समाजकल्याण बिभाग को दिया जो इस समय भ्रष्टाचार के आकंठ में डूब हुआ है अपात्रों को योजना का लाभ पहुंचाने के लिए शासनादेश  की अनदेखी कर दी गयी हैा है। शासनादेश के मुताबिक मुखिया की मौत उसी वर्ष हुई हो जिस वित्तीय वर्ष  की धनराशि का बितरण किया जा रहा हो सम्बन्धित वित्तीय वर्ष  से पूर्व मरने वालों को इस योजना का लाभ नही दिया जा सकता है।जैसा कि शासनादेष  में स्पष्ट  उल्लेख यह भी है कि मृतको का प्रमाण पत्र तहसील अथवा नगरपरिषद  आदि जिम्मेंदार बिभागो से जारी हो और इन्टरनेट पर उसका नम्बर भी मौजूद हो तभी सही माना जयेगा।
    दलालों के माध्यम से फर्जी प्रमाण के आधार पर अपात्रों का नाम सूची में डालकर सभी ने सरकारी धन की बंदरबाट कर लिया है इसके बाद अपने को सुरक्षित रखने के लिए जांच कराने का एक खेल शुरू कर दिया तभी सच सामने आ गया । जांच हेतु समाजकल्याण अधिकारी द्वारा उपजिलाधिकारी सदर को जारी किये गये अपने पत्र पत्रांक संख्या 3038/स0क0रा0प0ला0यो0/2014-15 से दिनांक 21.11.14 में स्पष्ट रूप् से लिखित कहा है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर लाभ लिए जाने की जांच कराकर अपात्र लाभार्थियो को लाभान्वित कराकर शासकीय धनराशि  का दुरुपयोग कराने में संलिप्त कर्मचारियों के बिरुद्ध बिभागीय कार्यवाही की जाये। समाज कल्याण अधिकारी के द्वारा जारी पत्र के साथ जो सूची दी गयी है उसमें 27 अपात्रों का नाम है इसके पूर्व में भी एक पत्र सदर तहसील मे भेजा गया है जिसमें 14 अपात्रों का नाम है इस प्रकार सदर तहसील के मात्र एक सर्किल में 41 अपात्रों को योजना का लाभ पहुँचाने की बात स्वयं समाजकल्याण बिभाग के अधिकारी कर रहे है मात्र एक सर्किल के अपात्रों को दिये गये धनराषि को जोड़ा जाये तो 5लाख 40 हजार रु0 हो जाता है। इसी तरह पुरे जनपद की छानबीन करायी जाये तो करोणो रू0 के लूटपाट का खुलासा संभव है। हालाकि बिभागीय सूत्र दबी जुबान से स्वीकार करते है कि इस योजना में लगभग एक करोण के आस पास की धनराशि की हेराफेरी का खेल हुआ है।
  समाज कल्याण बिभाग द्वारा पत्र जारी करने के पीछे जो मंशा  है यह कि अपने सहित बिभाग के लोगो व दलालों को सुरक्षित कर लिया जाये। सम्पूर्ण आरोप राजस्व और नगर परिषद के उपर थोप दिया जाये। समाज कल्याण अधिकारी के द्वारा जारी पत्र उपरोक्त यह भी संकेत दे रहा है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के ही आधार पर प्रति लाभार्थी 20 हजार रू0 की धनराशि  दे दी गयी है। इसमे जो खेल हुआ है उसके अनुसार लाभार्थी को एक हजार रू0 के आसपास की धनराशि  देकर शेष  बचे पैसे में अधिकारी कर्मचारी व दलाल का हिस्सा लगा है। योजना की धनराशि के लूटपाट में बड़ी चतुराई के साथ पूरा खेल किया गया है। जिन अपात्रों के नाम से धनोपर्जन किया गया है उनके नाम है गीतादेबी मु0 भण्डारी इन्द्रावती देबी रसूलाबाद राधादेबी भण्डारी किसुनादेबी धन्नेपुर मुन्नी खासनपुर कौषिल्या खालिसपुऱ, कलपा जोगियापुर बंषराजी जोगियापुर, सुमन सेखूपुर, प्रभावती हुसेनाबाद, धनपत्ती उर्दूबाजार, प्यारी सहाबुद्दीनपुर, लालतीदेबी बलुआघाट, समरत्थी देबी कन्हईपुर जहाना बेगम भन्डारी आदि तमाम नाम है।  जिन अपात्रो के नाम से सरकारी धन की लूट की गयी है उनके पतियों की मौत पांच से बीस वर्षो  पूर्व हुयी है और बिभाग उन सभी की मौत वित्तीय वर्ष  2014-15 मान कर प्रार्थना पत्र लिया और सरकारी खजाने से धन निकाल कर आपस में बाँट भी लिया कहीं शोर न मचे इस लिए लाभार्थी को कुछ धन देकर  प्राप्त  रसीद भी ले लिया ताकि बिभाग के लोग सेफ रहें फंसे तो लाभार्थी योंकि शोर मचाने की दशा  में एफ आई आर तो लाभार्थी के ही उपर ही होगी। बिभाग के  बाबू  भ्रष्टाचार में किस हद तक घिर गए है इसका खुलासा तो बीत दिनो जनपद के तहसील मडि़याहूं का एक मामला प्रकाश में आया था जिसमें एक मृतक की विधवा को इस योजना के तहत  8 बार पैसा दिया गया जिसकी पोल सम्बन्धित बैंक के प्रबन्धक ने किया था इसके बाद उस मामले की जांच शुरू कर दी गयी। जांच का दायित्व जिलाविकास अधिकारी को दिया गया जो अभी लम्बित है और दूसरा मामला चर्चा में आ गया है।बिभाग में तैनात सन्तोश नामक एक लिपिक जो जनपद आजमगढ़ में तैनाती के दैारान किये एक मामले मे निलम्बित है इस जनपद में सदर तहसील का काम देख रहा था।
      शासनादेश  है कि कोई भी प्रमाण पत्र जिस पटल से जारी हो सत्यापन उसी पटल से कराया जाये परन्तु यहां तो नगर परिषद द्वारा जारी प्रमाण पत्र का सत्यापन राजस्व बिभाग से कराया जा रहा है। लाभार्थी को योजना का लाभ दिये जाने के बाद जांच का क्या औचित्य है इस बारे में बिभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे है।    एक सवाल जरूर उठता है कि बगैर जांच कराये पैसा क्यों और कैसे दे दिया गया। समाज कल्याण बिभाग में तो हर कदम पर भ्रष्टाचार है जहां से भी पर्दा हटाया जाये लाखों करोणो का घोटाले का मामला खुल ही जायेगा यहां पर पनपे भ्रष्टाचार  के पीछे दलालो की एक लम्बी फौज है जो प्रतिदिन सुबह10 बजे आफिस हाजिर हो जाते है और सायं 5 बजे ही आफिस छोड़ते है। स्वहित के लिए सरकार की योजनाओं को धड़ल्ले से पलीता लगा रहे है। उच्चस्तरीय जांच कराये जाने की दशा  में इस बिभाग में हर स्तर पर घोटाला मिलेगा। अब देखना है कि इस बड़े लूटपाट कांण्ड की उच्चस्तरीय जांच  होती है या जिम्मेदार लोग इसे ठन्डे  बस्ते में डालकर स्वयं भी इसमें हिस्सेदार बन जायेगे।                           

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