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गंगा व यमुना नदी में मूर्ति विसर्जन प्रतिबन्ध पर जागरूकता के निर्देश

 प्रतापगढ़। गंगा व यमुना नदी में मूर्ति विसर्जन पर लगाए गए प्रतिबंध के संबंध मंे जनजागरूकता के निर्देश दिये गये है।  उप जिलाधिकारी सदर जेपी मिश्र ने मा0 उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा जो निर्देश दिये गये है। उसके संबंध में बताया है कि मूर्ति का विसर्जन केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जारी गाइड लाइन के अनुसार वैकल्पिक स्थान में करने हेतु जन सामान्य को प्रिंट मीडिया एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से अवगत कराया जाए। समय-समय पर मूर्ति विसर्जन के संबंध में आवश्यक जानकारी नुक्कड़ नाटको एवं रैली के माध्यम से दी जाए। जन जागरूकता कार्यक्रम के व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु पप्पलेट, होर्डिग साइन बोर्ड एवं मोबाइल बैन से आवश्यक संदेश प्रसारित कराया जाय। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रो के स्कूलो व कालेजो में वाद विवाद प्रतियोगिता रंगोली प्रतियोगिता, प्रभातफेरी आदि का आयोजन कराया जाए। प्रबुद्धजनो एवं संभ्रांत नागरिको को आमंत्रित कर जन जागरूकता एवं स्वैच्छिक अनुपालन को बढावा देने हेतु  सेमिनार का आयोजन किया जाए। विभिन्न स्वैच्छिक संगठनो, जनजागरूकता समूहो एवं जन कल्याण समितियो के माध्यम से जन जागरूकता एवं स्वैच्छिक अनुपालन को बढाने की कार्यवाही की जाए। जिले के  विभिन्न अधिकारियो द्वारा नियमित रूप से विभिन्न धार्मिक संगठनो  के साथ बैठक आयोजित कर जागरूकता एवं स्वैच्छिक अनुपालन को बढाने हेतु प्रयास किये जाए। जिले के संबंधित अधिकारियो, पुलिस विभाग एवं सूचना विभाग द्वारा नवरात्रि उत्सव, गण्ेाश चतुर्थी, मोहर्रम आदि महत्वपूर्ण पर्वो के आयोजन से एक माह पहले से व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु प्रयास किये जाए। नदियो के प्रदूषण के पुष्परिणामो से मानव व जीव जन्तुओ पर पडने वाले कुप्रभावो पर चित्रकला, प्रदर्शन, निबंध प्रतियोगिता, सांस्कृतिक कार्यक्रम आदि आयोेजित किया जाए। उपजिलाधिकारी सदर ने इस संबंध में तहसीलदार सदर, प्रभारी निरीक्षक, थानाध्यक्ष कोतवाली नगर, अंतू, जेठवारा, मांधाता तथा अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका परिषद बेला प्रतापगढ, प्रतापगढ सिटी, कटरा मेंदनीगंज, अंन्तू एवं खंड विकास अधिकारी सदर, सण्डवाचण्डिका, मांधाता को अवगत कराया है कि मा0 न्यायालय, न्यायाधिकरण के उक्त आदेशो के अनुपालन में वैकल्पिक व्यवस्था किए जाते समय यह भी सुनिश्चित कर लिया जाए कि इस कार्यवाही से धार्मिक अनुष्ठान, सामाजिक सद्भाव एवं कानून व्यवस्था किसी भी दशा मे प्रतिकूल रूप से प्रभावित न होने पाए।

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