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हमारा पेशा : सत्ता पाने का मानक

डॉ0 भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी
 हमारा पेशा है लाशें ढोने का। उन लाशों को जिन्हें हमीं ने कत्ल किया है। पेशा.पेशा होता हैए चाहे लाश ढोएँ या कत्ल करें। किसी की हत्या करना भी एक पेशा है। इसी धन्धे के तहत हम कत्ल करते हैं रोज और इन्हीं लाशों को ढोकर ले जाते हैं।
     हमारा पेशा है लोगों के भाग्य बदलने का इसीलिए हम भाग्य बदलते हैं उनके जो हमें अपना भाग्य विधाता मानते हैं। हमारा पेशा है लोगों का विकास करनाए हम विकास करते हैं एक नेता के रूप में। नेता बनकर हम वायदे करते हैंए सब्जबाग दिखाते हैंए लोगों को दिग्भ्रमित करते हैं।
    लाशें ढोने से लेकर कत्ल करने तक और भाग्य विधाता से नेता बनने तक हम हमारे तरकस के हर तीर आजमाते हैं। परम्परा के तहत हम सब कुछ करते हैं। सबकी अपेक्षाओं के अनुरूप अपने को ढालने का प्रयास करते हैं। संविधान की आड़ लेकर हम सभी कार्य करते हैं।

     विशुद्ध नेता गिरी के अन्दाज में समाज के विकास व सुधार का दावा करते हैं। धर्म के नाम पर भी हम अपने पेशे को नया रूप देते हैंए फिर इसके बलबूते पर अपने पेशे का विस्तार करने की योजना बनाते हैं। धर्म को हाई लाइट करके हमें आशातीत सफलता मिलती है।
हमें आजमाने की गरज से लोग अवसर देते हैं और फिर हम इस मौके का भरपूर लाभ लेकर विस्तार करते हैं अपने पारम्परिक पेशे का।
     क्या वास्तव में लोग अज्ञानी हैंघ् लोगों को सत्य की जानकारी नहींघ् वह लोग हमें अपना नेता मान बैठते हैंए हमें मानते हैं अपना भाग्य.विधाता। यद्यपि सत्य यह है कि न कोई किसी का नेता है और न ही भाग्य विधाता। धर्म के नाम पर हम पाखण्ड करते हैं।
     धर्म पाखण्ड का अन्तकर्ता भी है ;यही सच्चाई भी हैद्ध। धर्म ही सृजन करता है लेकिन हम धर्म के नाम पर सृजन की जगह विनाश करते हैं। हमारी परिभाषा में धर्म जड़ सत्ता है। मानवता की समग्रशक्ति है जड़सत्ता जिसमें आनन्द की अनुभूति होती है। हमने मुर्दघट्टों को प्रतीक बनाया है धर्म का। पुराने खण्डहरों को धर्म का अभीष्ट कहकर लोगों में उन्माद भी भरा है।
     हमने लोगों में वर्गए जाति का बीजारोपण भी किया हैए जहर के बीज अंकुरित किए हैं। सर्वोच्च सत्ता के शासक को हमने अपने अन्दर स्थान नहीं दिया है। हमारे अन्दर है तो मात्र स्वार्थ के लिए जगह। धर्म के नाम परए जाति के नाम परए सम्प्रदाय के नाम परए वर्ग के नाम पर हम करते हैं व्यवसाय। यही हमारा पेशा है। स्वार्थ के सांचे में सजाकर हमने धर्मए जातिए सम्प्रदायए वर्ग को धन कमाने का साधन बनाया हैए सत्ता पाने का मानक माना है इन सबको।

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