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शिक्षा में आज भी अग्रणी है जौनपुर-महज एक गांव से दो दर्जन अधिकारी बने

कपिलदेव मौर्य    
    जौनपुर। शिराज ए हिन्द के नाम से बिख्यात सुफी-संतो की सरजमी जनपद जौनपुर शिक्षा के क्षेत्र में कल भी प्रथम पंक्ति में दृष्टिगोचर था और आज भी पहली ही कतार में है। इसके एक नही कई उदाहरण है जो इस जनपद के शिक्षा की एतिहासिकता को बड़े ही करीने से बयां कर रहे है। इस जिले मे शिक्षा ग्रहण करने वालो में शासक से लेकर देश के राजदूत एवं आईएएस आईपीएस पीसीएस पीपीएस तक का नाम शामिल है। तभी तो जिले एक ऐसा ग्राम जहां अब तक डेढ दर्जन से अधिक आईएएस आईपीएस व पीसीएस पीपीएस बन चुके है। जिसे माधोपट्टी ग्राम के नाम से जाना जाता है। हां इतना जरूर हें कि इतने अधिकारियों वाले इस गांव का विकास आज तक अपेक्षा के अनुरूप नही हो सका है। जो यहां के अधिकारियों के प्रति सवालिया निशाऩ  लगा रहा है।
    इस जनपद के बाबत इतिहास पर नजर डाले तो स्पष्ट रूप से पता चलता है कि मुगल शासक काल के समय में शेरशाह शूरी यहां पर सुफी संतो से शिक्षा ग्रहण करने आये थे और अटाला मस्जिद में वर्षो शिक्षा प्राप्त किये जिसके चलते जौनपुर का नाम पूरी दुनियां में चर्चए खास हो गया। बाद में जब वे इस देश के शासक भी बने तब उन्होने यहां के शिक्षा का विस्तारी करण कराया था। शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी स्थान रखने वाले इस जनपद को शिराजएहिन्द की उपाधि से मुगल शासक ने नवाजा था। तब आज तक यह जनपद शिक्षा के क्षेत्र में अपना एक महत्व पूर्ण स्थान बनाये हुए है।
    जहां तक माधोपट्टी गांव का प्रश्न है। जिला मुख्यालय से लगभग 05 किमी दूर स्थित इस गांव सभा की कुल आवादी 3000के आस-पास होगी इसमें कुल 400 परिवार है।गांव मौर्य,क्षत्रिय, ब्राम्हण यादव प्रजापति, आदि जतियो के लोग बड़ी संख्या में है। इस ग्राम में ब्रिटिश शासन आईएएस पीसीएस बनने का जो शिलशिला शुरू हुआ वह अज भी मुसल्सल जारी है।इस गांव के राम मूर्ति सिह सबसे पहले पीसीएस अधिकारी  ब्रिटिश शासन काल में बने और वही प्रेरणा श्रोत बन गये। इनको देखकर इस ग्राम के बच्चो में शिक्षा ग्रहण करने की एक ऐसी लगन जागी की लोग तरक्की की नित नयी इबारत लिखने लगे और जिले का नाम बुलन्दी पर पहुंचा दिये है। इस ग्राम के आईपी सिंह सन् 1956 आईएएस बने  फिर आईएफएस हुए और बिदेश में राजदूत बन कर जिला एवं देश दोनो का नाम रोशन किया।
        इसके बाद वीके सिंह 1962 में आईएएस बनकर देश के गृह सचिव तक बने, छत्रसाल सिह 1967 में आईएएस बनकर मद्रास कैडर की सेवा किये।इसी क्रम में अजयकुमार सिंह, मानस्वी सिंह,चन्द्रमौलीसिंह, जनमेय सिह,अमिताभ सिह शैलेस सिह मनीष कुमार सिह कु0 उषा सिह पीसी सिह  श्री प्रकाश सिह डा0दीनानाथ सिह  आईएएस बने  तो शशी कुमार सिह जूडिशियरी मे डीजे तक रहे है। पीसीएस सर्विस में वैशाली सिह प्रवीन सिह अलका सिह जय सिह नीरज सिह शशिकेश सिह पुष्पा सिह विशाल सिह एवं अशोक प्रजापति व अशोक यादव 2011 में पीसीएस बने 2015 में माधोपट्टी गांव की शिवानी सिह ने महिला कैडर में प्रथम स्थान प्राप्त कर जिला एवं गांव दोनो को एक बार फिर चर्चा मे ला दिया है।
     जहां तक गांव के विकास सवाल है।जिस गांव में इतने अधिकारी हो उस गांव का विकास अपेक्षा के अनुरूप न हो सके एक बड़ा एवं गम्भीर सवाल है। इसके पीछे की जो कहानी सामने आयी है। वह है कि इस गांव जो भी ब्यक्ति अधिकारी बना वह गांव को छोड़ दिया फिर मुड़कर इस गांव की ओर देखना भूल गया जिस माटी में खेला खयाउससे अलग होकर जहां पर नौकरी किया वही पर अपना आशियाना बना लिया। जिसका परिणाम है कि इस गांव में आज तक कोई कल कारखाना नही लग सका है। आज भी यहां के लोगो के जीविका एक मात्र साधन कृषि ही है। हां इस गांव में कोई मुकदमा नहीं है। नही आपस में किसी तरह का बिवाद ही है। शिक्षापर जोर ज्यादा है  यहां बतान जरूरी है कि इस ग्राम से पहली बार अधिकारी बने राममूर्ति सिह की प्रेरणा से एक इन्टर कालेज की स्थापना की गया जो शिक्षा के विस्तार में खासा सहायक है।
   गांव में स्टेशन तो है लेकिन नाली खड़नजा पानी अदि का गम्भीर संकट विधमान है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालो की एक बड़ी फेहरिस्त है। आज भी इस गांव मे लोग मड़ई अदि में जीवन जीने को मजबूर है। मात्र ग्राम प्रधान के भरोसे इस गांव का विकास होता है गांव के जा लोग अधिकारी बने उनके द्वारा इसे विकसित करने कोई प्रयास आज तक तो नही किया गया है।
      

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