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योग से संभव है मनुष्यत्व की पूर्णता



जौनपुर। रासमण्डल में आयोजित  तीन दिवसीय योग शिविर का  समापन हो गया। इस मौके पर योग प्रशिक्षक डा. हेमंत, डा. कमलेश ने ताणआसन, वृक्षासन, मण्डूक आसन और प्राणायाम में भस्तिका, कपालभांति, अनुलोम विलोम का योगाभ्यास कराया एवं इससे होने वाले लाभ के बारे में बताया। साथ ही बच्चों को स्वास्थ्य सम्बंधित जानकारी देते हुए बताया कि जैसे पानी कब पीना है, भोजन कब करना है। बच्चों को यह भी बताया गया कि राजयोग में योग के आठ अंग बताये हैं जिसमें यम, नियम, आसन, प्राणायाम, प्रात्याहार, धारणा, ध्यान, समाधि शामिल है। इन आठों में प्रारम्भिक दो अंगों का सबसे अधिक महत्व है। इसीलिए उन्हें सबसे प्रथम स्थान दिया गया है। यम और नियम का पालन करने का अर्थ मनुष्यत्व का सर्वतोमुखी विकास है। योग का आरम्भ मनुष्यत्व की पूर्णता के साथ होता है। बिना इसके साधना का कोई प्रयोजन नहीं। राजयोग मनुष्य मात्र के लिए, स्त्री-पुरुष, गृहस्थ-विरक्त, बाल-वृद्ध, शिक्षित-अशिक्षित सबके लिए समान रूप से उपयोगी और सरल है। जिस साधना द्वारा आत्मा का पररमात्मा से मिलना हो सकता है, उसे योग कहा जाता है। आकृति गुप्ता ने सहज योग से बच्चों को एकाग्रता को नाए रखने के कई आसन सिखाया। उन्होंने बताया कि ध्यान करने से बीमारियों, चिंताओं तथा दुर्गुणों से मुक्ति मिलती है जिससे आनंदमय, शांतिपूर्ण, संतुलित जीवन की प्राप्ति होती है। अतिथि के रूप में डा. वीरेंद्र प्रताप सिंह प्रधानाचार्य तिलकधारी इण्टर कालेज, अवनीश मणि त्रिपाठी, दुर्गा प्रसाद सिंह ने कोचिंग के बच्चों को योग के प्रति प्रेरित किया। आयोजक कहा कि गांधी जी और स्वामी विवेकानंद की कही बातें हमें नहीं भूलना चाहिए, जो परिवर्तन हम लोगों में चाहते है वह परिवर्तन सर्वप्रथम हमें स्वयं में लाना होगा। योग करने से हमारी कार्यक्षमताएं बढ़ती ही है। साथ ही हम दीर्घायु तक स्वस्थ्य रह सकते है। अंत में योग प्रशिक्षकों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। शिविर में गुरूपाल सिंह, विश्वप्रताप चैहान, नरेंद्र, संदीप सागर सिंह सहित कोचिंग के विद्यार्थी मौजूद रहे।


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