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चक्रानुक्रम का फॉर्मूला पंचायत चुनाव में होगा लागू


मायावती सरकार की तर्ज पर ही होगी व्यवस्‍था, शासनादेश जारी
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए मंगलवार को आरक्षण नीति जारी कर दी। बसपा शासनकाल में वर्ष 2010 में हुए पंचायत चुनाव में लागू की गई चक्रानुक्रम की व्यवस्था इस चुनाव में भी पूरी तरह से लागू रहेगी। इससे ज्यादातर ग्राम पंचायतों का मौजूदा आरक्षण बदल जाएगा।
उच्चस्तर पर सहमति बनने के बाद प्रमुख सचिव पंचायतीराज चंचल कुमार तिवारी ने मंगलवार रात में आरक्षण नीति का आदेश जारी कर दिया। इसकी प्रति सभी डीएम को भेज दी गई है। आरक्षण क्रिया 12 अगस्त से 12 सितंबर के बीच 32 दिनों में पूरी की जाएगी। 8000 से ज्यादा नई ग्राम पंचायतें आबादी के आधार पर जहां आएंगी, वहीं शामिल हो जाएंगी। प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे त्रिस्तरीय पंचायतों में पदों व स्थानों के आरक्षण व आवंटन के संबंध में 9 जुलाई 2010 को जारी शासनादेश में लागू व्यवस्था के आधार पर कार्यवाही करें। आरक्षण के लिए कुल जनसंख्या, व एससी-एसटी की जनसंख्या के आंकड़े 2011 की जनगणना से लिए जाएंगे जबकि ओबीसी के लिए रैपिड सर्वे 2015 के आंकड़े लिए जाएंगे।
13 के बाद कभी भी चुनाव कार्यक्रम का ऐलान
पंचायतीराज विभाग ने आरक्षण की कार्यवाही को 13 सितंबर के पहले पूरा करने के लिए प्रस्तावित 35 दिनों की कार्यवाही में तीन दिनों की और कटौती की। विभाग की योजना है कि वह हर हाल में 13 सितंबर तक राज्य निर्वाचन आयोग को आरक्षण की कार्यवाही पूरी होने की सूचना उपलब्ध करा दे। समझा जाता है कि यदि विभाग तय कार्यक्रम के हिसाब से यह काम पूरा कर सका तो 13 सितंबर या इसके बाद आयोग कभी भी चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है।
ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों व जिला पंचायतों में स्थानों और प्रधानों के पदों के आरक्षण का प्रस्ताव डीएम तैयार कराएंगे। इसके लिए वे शासनादेश में दी गई प्रक्रिया का पालन करेंगे। प्रस्ताव तैयार कर ग्राम पंचायत कार्यालय, क्षेत्र पंचायत कार्यालय और जिला पंचायत कार्यालय के साथ डीपीआरओ कार्यालय पर चस्पा कराएंगे। इसे लगातार तीन दिन तक प्रदर्शित किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर यदि किसी को आपत्ति है तो वह प्रकाशन की तिथि से सात दिन के भीतर खंड विकास कार्यालय, जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय अथवा डीएम कार्यालय में आपत्ति दर्ज करा सकेगा। इसके बाद डीएम की अध्यक्षता वाली समिति आपत्तियों का निस्तारण करेगी। इस समिति में सीडीओ, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत व जिला पंचायत राज अधिकारी शामिल हैं।
•प्रदेश में ग्राम पंचायतों की कुल संख्या-59163, क्षेत्र पंचायतों की-821 व जिला पंचायतों की 75 है।
•वर्ष 2011 की जनसंख्या के अनुसार प्रदेश की कुल जनसंख्या में एसटी तथा एससी की जनसंख्या का कुल प्रतिशत क्रमश : 0.57 व 20.6982 है।
•रैपिड सर्वे में ग्रामीण जनसंख्या में ओबीसी की जनसंख्या 53.33 प्रतिशत है।
•सामान्य निर्वाचन-2010 के बाद पहली बार गठित ग्राम पंचायतों में आरक्षित पदों के आवंटन में पूर्ववर्ती निर्वाचनों के स्टेटस को नहीं देखा जाएगा। इसकी जगह पदों के आवंटन के लिए बनाए गए आनुपातिक जनसंख्या के अवरोही क्रम में उनकी (प्रथम बार गठित ग्राम पंचायतों की) स्टेटस के आधार पर नए सिरे से आरक्षण व आवंटन किया जाएगा।
•निदेशालय से विकास खंडवार प्रधान के पदों का आरक्षण चार्ट तैयार कर जिलों को उपलब्ध कराना - 12 अगस्त से 19 अगस्त
•निदेशालय स्तर पर डीपीआरओ व अपर मुख्य अधिकारियों का प्रशिक्षण - 20 व 21 अगस्त
•जिला स्तर पर विकास खंड अधिकारियों का प्रशिक्षण- 22 व 23 अगस्त
•जिला स्तर पर आरक्षित ग्राम पंचायत के प्रधानों, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत के आरक्षित प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के आवंटन का डीएम प्रस्ताव तैयार करेंगे - 24 से 30 अगस्त
•शासनादेश में तय स्थानों पर ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत के आरक्षित वार्डों के अवांटन की प्रस्तावित सूची का डीएम द्वारा प्रकाशन - 31 अगस्त से दो सितंबर
•प्रस्तावों पर आपत्तियां प्राप्त करने का समय - 31 अगस्त से 6 सितंबर
•आपत्तियों का परीक्षण व निस्तारण - 8 व 9 सितंबर
•डीएम द्वारा आरक्षित ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों व जिला पंचायतों के वार्डों की अंतिम सूची का प्रकाशन- 10 व 11 सितंबर
•डीएम द्वारा शासनादेश में बताए गए फ ॉर्मेट पर आरक्षित ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत के वार्डों की सूचना निदेशक पंचायतीराज को उपलब्ध कराना -12 सितंबर