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वकीलो का आरोप- सपा विधायक ने करायी अधिवक्ता की हत्या

विधायक पर मुकदमा दर्ज कराने की मांग
जौनपुर। जनपद के थाना शाहगंज क्षेत्र स्थित ग्राम समधीपुर में मारपीट के दौरान दीवानी न्यायालय के अधिवक्ता जितेन्द्र यादव की हत्या को लेकर अधिवक्ता समाज काफी गुस्से में है।घटना के दूसरे दिन अधिवक्तागण न्यायिक कार्य से बिरत रहे और बैठक कर हत्या कांड की निन्दा करते हुए क्षेत्रिय सपा विधायक पर हत्या कराने का आरोप लगाया है उसे इस हत्या कांड में अभियुक्त बनाने की मांग भी किया है। साथ में चेतावनी दिया है कि प्रशासन ने यदि इसे हल्के में लेने की भूल किया तो अधिवक्ता सड़क पर उतने को मजबूर हो जायेगे। 
    घटना दिनांक 27 सित0 15 की है दिन मे 11 बजे पुरानी रंजिश को लेकर रास्ते पर पानी आने को लेकर शुरू हुआ झगड़ा इतना बड़ा स्वरूप लेलिया अभियुक्त ओमप्रकाश यादव आदि  अधिवक्ता के खून के प्यासे हो गये और उसे इतना मारा कि उसकी मौत ही हो गयी।अधिवक्ता जितेन्द्र को बचाने गयी उसकी पत्नी मंजू और बहन ललिता को बुरी तरह से मार पीटकर जख्मी कर दिया। हत्या में शमिल लोगो के बिरूद्ध पलिस ने तहरीर लेकर मुकदमा दर्ज कर लिया है।
    मृतक जितेन्द्र यादव अधिवक्ता जिले के बरिष्ठ सपा नेता एवं सरकार में कैबिनेट मंत्री का दूर के रिस्ते में है और हत्यारे क्षेत्रिय विधायक शैलेन्द्र यादव ललई के करीबी है चर्चा हे कि विधायक अधिवक्ता से अन्दर खाने में रंजिस रखते थ।इसी लिए हत्यारो को हमेशा मारपीट के जिए उकसाते रहते थे।ऐसा आरोप मृतक पक्ष के लोगो का है। इसी को आधार मान कर दीवानी अधिवक्ता संघ ने अपनी बैठक में प्रस्ताव पास किया है कि शाहगंज के सपा विधायक को भी हत्या कांड में आरोपी करार दिया जाये और उन्हे भी मुजरिम बनाया जाये। 
   अधिवक्ता संघ ने अपने प्रस्ताव में इसके साथ ही यह भी मांग किया है कि मृतक अधिवक्ता के परिजनो को 50 लाख रू0 का मुआवजा दिया जाये और उसके वारिसान को सरकारी नौकरी दिया जाये तथा जल्द से जल्द अभियुक्तो को जेल की सलाखो के पीछे किया जाये। अधिवक्ताओ ने चेतावनी भी दी है कि यदि मांग दो दिन के अन्दर नही पूरी की गयी तो संघ न्यायिक कार्यो से बिरत रह कर सड़क पर उतरने के लिए मजबूर हो जायेगे।
  इस घटना को लेकर शाहगंज अधिवक्ता संघ ने भी आन्दोलन की राह पकड़ ली है।घटना के दूसरे दिन आज वकीलो न्यायिक कार्य से बिरत रहते हुए हत्या कांड की निन्दा किया और घटना के बाद लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारी सीओ शाहगंज एवं कोतवाल को हटाने की मांग किया है। इनका आरोप है कि  बिवादित मामला वर्षो से पुलिस के संज्ञान में है पुलिस यदि समय रहते मामले को निस्तारित करा दी होती तो सायद हत्या जैसी घटना नही हुई होती। इस तरह इस हत्या कांड को अधिवक्ता समाज खासे गुस्से में है जो संकेत मिल रहे है उससे अनुमान है कि अधिवक्ता इस मुद्दे पर लम्बी लड़ाई के मूड मे नजर आ रहे है।

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