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जौनपुर की इत्र,इमरती व् ईमानदारी की दी जाती है मिसाल-सीएम योगी 24UPNEWS.COM पर

ग्राम पंचायत विकास अधिकारी और लेखपाल के निलम्बन का दिया आदेश-D.M.

औचक रूप से लोहिया गांव पहुॅचे जिलाधिकारी को मिली खामियाॅ
प्रतापगढ़ । वर्ष 2013-14 के विकास खण्ड लक्ष्मणपुर के लोहिया गांव रेड़ी में हुये विकास कार्यो का स्थलीय निरीक्षण करने औचक रूप से गांव पहुॅचे जिलाधिकारी डाॅ0 आदर्श सिंह टूटी एवं अधूरी सी0सी0 रोड, जल निकासी की दुर्वव्यवस्था, लोहिया आवास एवं इन्दिरा आवासों के अपात्र व्यक्तियों में वितरण, गांव के लेखपाल के बस्ते में आवश्यक अभिलेखों के न पाये जाने की स्थिति को देख दंग रहे गये। मौके पर ग्राम पंचायत विकास अधिकारी धु्रव अग्रवाल से अधूरे कार्यो के बारे में जिलाधिकारी ने पूछा तो ग्राम पंचायत विकास अधिकारी हड़बड़ाता रहा और ऐसा कुछ नही बता पाया जिससे यह लगे कि वह गांव मंें आता है और कराये गये कार्यो के बारे में उसे कुछ भी जानकारी है। वह जिलाधिकारी के पूछने पर यह भी नही बता सका कि गांव में कितने सोलर लाईट लगे है, कितने जल रहे है या बुझे है। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी के अपने दायित्वों के प्रति इस उदासीन और लापरवाह आचरण के लिये जिलाधिकारी ने उसे निलम्बित करने का आदेश दिया। 
जिलाधिकारी ने गांव में घूम कर लोहिया आवासांें की स्थिति देखी। शैलेश कुमार मिश्र को आवंटित आवास जब जिलाधिकारी ने खुलवाकर देखा तो पता चला कि जिलाधिकारी के आगमन की सम्भवतः कहीं भनक लग गयी होगी, इसलिये एक महिला अन्दर से आयी। कमरांें के निरीक्षण में ऐसा लगा ही नही कि इसमें कोई आवासित है। एक भी चारपाई या बिस्तर कमरों में कही नही दिखायी दिया और न ही यह ही संकेत मिला कि इस घर में खाना आदि भी बनता है। कुल मिलाकर यही लगा कि इस आवास का आवंटन अपात्र को कर दिया गया है जो इसमें रह ही नही रहा है। यही स्थिति हरिकेश पुत्र शीतला प्रसाद शुक्ल को आवंटित इन्दिरा आवास की रही। इन्दिरा आवासा मंें कमरों में कण्डी, उपले रखे मिले। इस आवास में भी कोई आवासित नही मिला। इन स्थितियों से खिन्न जिलाधिकारी ने इन आवासों के अपात्र आवंटियों के आवंटन को निरस्त करने और इसकी रिकवरी सम्बन्धित से कराने का निर्देश दिया है। गांव की लगभग पौने दो सौ मीटर अधूरी सड़क जिसे सी0सी0 रोड हो जाना चाहिये था किन्तु वह जगह-जगह टूटी और गन्दे पानी से जाम की स्थिति में पायी गयी। हैरत की बात यह है कि वर्ष 2013-14 के इस लोहिया गांव को सभी कार्यो से संतृप्त दिखाया गया था लेकिन जिलाधिकारी के औचक निरीक्षण में सच्चाई कुछ और ही मिली। ग्राम के लेखपाल राजेश कनौजिया से जिलाधिकारी ने जब उसका बस्ता मांगा तो वह हड़बड़ाया फिर बताया कि मोटर साईकिल में रखा है। बहरहाल जब वह बस्ता लेकर जिलाधिकारी के समक्ष जूनियर हाईस्कूल रेड़ी के प्रांगण में पहुॅचा तो जिलाधिकारी ने उससे पूछा कि लेखपाल के बस्ते में कितने अभिलेख होते है। इस पर वह खसरा, खतौनी, गुनिया, नक्शा का नाम ले सका जबकि लेखपाल के बस्ते में अभिलेख सहित कुल 7 सामग्री रहती है। जब जिलाधिकारी ने कहा कि जूनियर हाईस्कूल को गांव के नक्शे में दिखाओ तो उसने बताया कि उसे नक्शा चार्ज मंें मिला ही नही है। एक कागज पर अधूरा नक्शा जब उसने जिलाधिकारी को दिखाया तो जिलाधिकारी उस पर भड़क उठे। गांव वालांे ने बताया कि रामराज मिश्रा का 23 नवम्बर को देहासन हो गया है। इस पर पक-11 पंजिका में जब वरासत चेक की गयी तो रामराज मिश्रा की वरासत चढ़ी नही थी। लेखपाल खतौनी भी नही दिखा सका। नाराज जिलाधिकारी ने लेखपाल राजेश कनौजिया को भी निलम्बित करने का आदेश दिया है। जिलाधिकारी ने इस लोहिया गांव में कराये गये सभी कार्यो का विवरण और उस पर कितनी धनराशि खर्च हुई है इसका विस्तृत विवरण खण्ड विकास अधिकारी लक्ष्मणपुर से मांगा है। गांव वालों ने जिलाधिकारी को दिखाया कि जेठवारा रजबहा से जो रजबहा इस गांव को जोड़ता है उसकी सिल्ट सफाई सिंचाई विभाग की ओर से जे0सी0बी0 मशीन से करायी गयी और मिट्टी उठा के माइनर के ऊपर रखी गयी और इस प्रकार नहर की ठीक ढंग से सफाई नही हुई जबकि मनरेगा मजदूरों से इसकी सफाई करायी जानी चाहिये थी। जिलाधिकारी ने इस पर भी सिंचाई विभाग के अभियान्ता से स्पष्टीकरण मांगा है। रोजगार सेवक दिलशाद ने जिलाधिकारी को बताया कि मनरेगा से अभी हाल में कार्य कराया गया है जबकि गांव वालों ने बताया कि ऐसा कोई कार्य मनरेगा मजदूरों से अभी हाल में नही कराया गया है। मस्टर रोल मांगने पर रोजगार सेवक दिखा भी नही पाया। 

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