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भूख और गरीबी से तड़पकर हुई युवक की मौत

आखिर कब तक मरते भूखों मरते रहेंगे लोग ?
प्रतापगढ़। कहने को हमारा देश कृषि प्रधान देश है, जहाँ की धरती सोना उगलती है ,ऐसे देश के हर कोने में रोजाना भूख से बीस हजार से अधिक बच्चों की मौत होती है। यहाँ पर बहुत लोग ऐसे हैं जो  भगवान के नाम पर लाखों ,करोड़ों रुपए खर्च कर देते हैं, लेकिन अगर उसी भगवान के मंदिर के बाहर कोई दिव्यांग या गरीब भूखा बच्चा बैठा है और उसने उनसे खाने के लिए पैसे मांगे तो ,इन धनवान लोगों के मुंह से यही निकलता है 'चलो जाओ नही हैं पैसे भीख मांगते हो जाके कोई काम करो '' फिर आगे बढ़ जाते हैं। मंदिर में हजारों लीटर दूध भगवान के ऊपर चढ़ाएंगे ,लेकिन किसी अनाथ भूखे को दूध नहीं पिला सकते है? आखिर कैसे हमारा देश आगे बढ़ेगा ,कैसे दूर होगी भारत में गरीबी ?
 गौरतलब हो कि गरीबी भुखमरी का सबसे बड़ा कारण है जनसँख्या में वृद्धि,''हम दो हमारे दो'' के नारे को न मानने वाले निर्धन परिवार में किसी तरह से लोग दो जून की रोटी कमा लेते हैं और बच्चों का पेट पलते हैं। यही कारण है कि बच्चों में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और वे कुपोषण और अन्य रोगों के शिकार हो जाते है ,अन्यथा भूख के कारण उनकी मौत हो जाती है। ऐसी ही एक घटना प्रतापगढ़ जनपद में घटित हुई है।
प्रतापगढ़ जनपद के रानीगंज थाना क्षेत्र  के नाजियापुर में आज एक दिव्यांग भूख और गरीबी से तड़प तड़प कर मर गया।
सूत्रों के मुताबिक राम श्रींगार गौड़ चल फिर नही पाता है,एक झोपड़े में अपनी सांसो को समेट कर किसी  तरह अपना जीवन यापन कर रहा था। उसका एकलौता बेटा शहर में मजदूरी करता था।
मृतक के बेटे ने कहा कि इनकी मौत की वजह भूख है दो महीने पहले दुर्घटना में उसका हाथ टूट गया उसके बाद तो पूरा परिवार दाने दाने को मोहताज हो गया। ग्राम प्रधान ने भी इनकी तरफ कोई ध्यान नही दिया। आख़िरकार उसने अपने प्राण त्याग दिए।
बेटे ने यह भी कहा कहाँ हैं ओ चुनाव से पहले बड़ी -बड़ी बातें करने वाले नेता, कहाँ है ओ सरकार जो हमेशा वोट लेने से पहले गरीबों से वादा करती है उन्हें ''रोटी कपड़ा और मकान देने की '' ,क्यों  चुनाव जितने के बाद सारी बातें उन्हें याद दिलानी पडती है।
फ़िलहाल अभी तक कोई भी सरकार या अधिकारी ने मौके पर पहुंचना जरूरी नहीं समझा।

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