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मुआवजे की आस में टूटती 20 गांवो के लोगों की साँस, केराकत तहसील N.H. 233 का मामला

जौनपुर। केराकत तहसील स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग के तहत अधिग्रहण किए गए करीब 20 गांवो के लोग पिछले 6 वर्षों से नजरें गड़ाए बैठे हैं, लेकिन आज तक न तो उन्हें कोई नोटिस मिली और ना ही मुआवजे की कोई रकम । इंतजार करते-करते कितने लोगों ने अपनी सांसे छोड़ दी, परन्तु मुआवजा उनके खाते तक नहीं पहुंचा । 
बता दें कि आए दिन जौनपुर जिले के इन गांवो में राष्ट्रीय राजमार्ग के तहत लिए गए जमीनों के लिए चर्चाएं होती रहती हैं । लेकिन उन चर्चाओं का क्या फायदा जो अपने ही बीच में हो पर ऊपर तक ना पहुंच सके। बता दें कि राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 233 जो वाराणसी से  इंडो नेपाल बॉर्डर सोनौली तक का अधिग्रहण का गजट हुआ , यह गजट 19 मई 2012 में किया गया था । लेकिन आज तक सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों द्वारा ना तो मुआवजा दिया गया और ना ही उनकी बातों पर अमल किया गया । इसके अलावा इस राजमार्ग के बाद अधिकृत किए गए राष्ट्रीय राजमार्ग वाराणसी - गाजीपुर,  राष्ट्रीय राजमार्ग वाराणसी- जौनपुर के अलावा इसके बाद अन्य कई राष्ट्रीय राज्य मार्गों का अधिग्रहण हुआ और वहां पर मुआवजा इत्यादि बट गया और काम भी शुरू कर दिया गया।  इसके अलावा बता दें कि शुरू हुए इन राष्ट्रीय राजमार्गों पर करीब- करीब 1 लेन का कार्य पूर्ण कर लिया गया है । यह विडंबना ही कहेंगे कि सबसे पहले हुए राष्ट्रीय राजमार्ग 233 के अधिग्रहण में इतनी खामियां हुई कि आज तक उसका मुआवजा तो दूर किसी प्रकार की नोटिस भी नहीं भेजी गई। इसके अलावा रामगढ़ , बीरभानपुर, बलुआ , आराजी बलुआ व बरइछ इत्यादि गांवो के निवासियों और किसानों का कहना है कि हम लोग दर्जनों की संख्या में कई बार जौनपुर जिलाधिकारी एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारी इसके अलावा वाराणसी में बैठे राष्ट्रीय राजमार्ग के कई अधिकारियों से दर्जनों बार मिले लेकिन उन्होंने कोई भी संतुष्टि भरी बात नहीं कही सिर्फ इतना कहा कि कार्यवाही हो रही है जल्द ही पूर्ण कर ली जाएगी । यह बात पिछले 6 वर्षों से अनवरत सुनने को मिल रही है लेकिन इसका कोई भी आज तक हल नहीं निकला । इसके अतिरिक्त किसानों का कहना है कि लग रहा है कि मुआवजे की आस में सांस भी टूट जाएगी, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार लोगों का कहना है कि इससे जुड़े कुछ असामाजिक तत्व ऐसे भी हैं जो नहीं चाहते की क्षेत्र का विकास हो , अपने भले में समाज का नुकसान करने पर उतारू हैं । अब प्रशासन को जनता के हित में कड़े से कड़े निर्णय लेने की जरूरत है, ताकि ख्वाबों में फंसे यह लोग सुकून पा सके ।बताते चलें कि गांव के लोगों का यह भी कहना है कि पिछले 6 वर्षों में हम लोग अपने खेतों का या फिर आवास का समुचित उपयोग नहीं कर सके हैं दिल में हमेशा डर बना रहता है कि कब सरकार की नोटिस आ जाए और तोड़फोड़ की कार्यवाही शुरु हो जाए । अगर हम लोग कोई रोजगार करने की भी सोच रहे हैं, तो वह भी करने से डरते हैं। अब देखना यह है कि सरकार और राष्ट्रीय राजमार्ग कब तक इन 20 गांव का दुख दर्द समझती है और आपन निर्णय सुनाती है।

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