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मेडिकल और स्वास्थ्य कानूनों पर राष्ट्रीय सेमिनार, एमिटी यूनिवर्सिटी, लखनऊ में आयोजित

लखनऊ-भारत में चिकित्सा और स्वास्थ्य कानून के विभिन्न पहलुओं पर विचार और अंतर्दृष्टि साझा करने के लिए एक जीवंत मंच की नींव रखी गयी । यह "चिकित्सा और स्वास्थ्य कानूनों पर राष्ट्रीय संगोष्ठी" शीर्षक के साथ तीन दिवसीय संगोष्ठी है। इस संगोष्ठी में एक बहु अनुशासनिक दृष्टिकोण रखा गया यह संबंधित अधिकारों के संबंध में सार्वजनिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर केंद्रित है - भोजन का अधिकार, स्वस्थ पर्यावरण के अधिकार, पानी के अधिकार आदि।
संगोष्ठी को  चार तकनीकी सत्रों और एक सामान्य सत्र इन केंद्रीय विषयों के साथ बांटा गया था:
- स्वास्थ्य और चिकित्सा पर वैश्वीकरण के प्रभाव
-स्वास्थ्य और चिकित्सा देखभाल के अधिकार: कानूनी परिप्रेक्ष्य
 -प्रजनन के अधिकार: सरोगेट, गर्भपात, गर्भधारण के मेडिकल टर्मिनेशन, कृत्रिम गर्भनाल आदि।
-ड्रग मार्केटिंग से संबंधित मुद्दे
आज जब की सभी तकनीकी सत्र  
सफलतापूर्वक समपन हो चुके है,  संगोष्ठी के वैलिडिटॄरी सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें
 सुश्री अनुमेहा सहाय और श्री कौशलेश पांडे  संवाददाता (समापन सत्र) ने सत्र की शुरुआत कि। इसके बाद प्रत्येक गणमान्य व्यक्तियों को गुलदस्ता की प्रस्तुति एमिटी के प्रोसेसर श्री अभिषेक भारद्वाज, श्रीमती प्रियंका श्रीवास्तव और सुश्री ज्योत्सना सिंह ने दी।
इसके बाद, हमारे प्रिय प्रोफेसर बलराज चौहान, एमिटी लॉ स्कूल के निदेशक ने स्वागत किया | उन्होंने पिछले दो दिनों के संगोष्ठी का निष्कर्ष निकाला और कहा कि संगोष्ठी का पूरा उद्देश्य विद्यार्थियों, संकायों और अन्य लोगों के मन को शिक्षित करना था। उन्होंने तीनों गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया और सभी की सराहना की। उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति डी.पी. सिंह (निवृत्त), जो उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे, सशस्त्र सेना के आपराधिक कृत्य और अन्य कई चीजों के अध्यक्ष थे, लेकिन अब भी इतने विनम्र हैं। श्री आशुतोष शुक्ला, संपादक, दैनिक जागरण का 30 साल तक कैरियर रहा है और उन्होंने 3 पुस्तकें प्रकाशित की हैं। निदेशक बलराज चौहान ने उन्हें बहुत सराहना करते हुए कहा कि "वास्तव में शिक्षा क्या है यह जानने के लिए उनसे बेहतर कोई नहीं है।" डॉ. विनीत शर्मा, (प्रोफेसर के.जी.एम.यू.), एक बहुत ही प्रसिद्ध आर्थोपेडिक हैं और उन्हें अपना महत्वपूर्ण  समय निकालने के लिए धन्यवाद दिया बलराज सर ने इतने व्यस्त होने के बाद भी इस सेमिनार मे आने का उल्लेख किया कि और कहा की वह वास्तव में उदार और बहुत सम्माननीय मित्र हैं।
बलराज सर के बाद, सुश्री मालोबिका बोस, सहायक प्रोफेसर ने डॉ अशोक चौहान, एमिटी यूनिवर्सिटी के संस्थापक द्वारा अग्रेषित किए गए संदेश को संगोष्ठी के समक्ष पढा। डॉ अशोक कुमार  चौहान ने प्रत्येक व्यक्तियो को उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए धन्यवाद और सफल आयोजन के लिये बहुत बहुत बधाई दी।अपने संदेश में, उन्होंने प्रोफेसर डायरेक्टर बलराज चौहान और मेजर जनरल के.के. ओहरी, एवीएसएम (सेवानिवृत्त), प्रो व्हाइस चॅंसलर, एयूयूपी, लखनऊ कैंपस को उनके बहुमूल्य मार्गदर्शन और नेतृत्व के लिए धन्यवाद दिया है जिसके बिना इस संगोष्ठी की सफलता संभव नहीं था । अंत मे उन्होंने डॉ।असीम चौहान, अध्यक्ष, एयूयूपी, लखनऊ परिसर का धन्यवाद किया।
इसके अलावा, डॉ. अरविंद कुमार सिंह (समारोह के संयोजक) ने ठीक से ब्योरे में संगोष्ठी का सार किया।
इसके बाद, बलराज सर आए और दर्शकों के लिए एक अद्भुत और प्रेरणादायक कहानी सुनाई और प्रतिभागियों ने संगोष्ठी के बारे में अपने विचार साझा किए और संगोष्ठी के विषय की पसंद की सराहना की।
इसके बाद पुरस्कार वितरण समारोह में प्रत्येक सत्र के लिए विजेताओं को सर्वश्रेष्ठ पत्र और सर्वश्रेष्ठ प्रस्तोता को पुरस्कार दिया गया था।
सत्र 1: राज दीपक चौधरी (सर्वश्रेष्ठ पेपर) और सी प्रशांति (सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतकर्ता)
सत्र 2: स्वरलाता पांडे और शिवम (सर्वश्रेष्ठ पेपर) और मेघा विनोद (सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतकर्ता)
सत्र 3: दीपक अरोड़ा (सर्वश्रेष्ठ पेपर) और आमना नाबेवा नकवी (सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतकर्ता)
सत्र 4: क्षितिज प्रकाशन (सर्वश्रेष्ठ पेपर) और धीरेंद्र कुमार (सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतकर्ता)
सामान्य सत्र: डॉ जे के श्रीवास्तव (सर्वश्रेष्ठ पत्र) और सेतु गुप्ता (सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतकर्ता)
दैनिक जागरण के संपादक श्री आशुतोष शुक्ल ने भाषण दिया । उन्होंने सभी गणमान्य व्यक्तियों का धन्यवाद किया और कहा कि वह वास्तव में उन सभी का बहुत ही आदर करते है। उन्होंने भारत के नैतिक मूल्यों पर एक दिया दिल को छू लेने वाला भाषण दिया और कहा कि कुछ भी बनने से पहले "मनुष्य को पहले एक अच्छा इंसान बनना चाहिए।"
डॉ. विनीत शर्मा (प्रोफेसर के.जी.एम.यू.), व्यावहारिक उदाहरण साझा करके, व्यक्तिगत चिकित्सा अनुभवों को साझा करते हैं और कानून और चिकित्सा के बीच संबंध को प्रबुद्ध करने पर जोर दिया।
न्यायमूर्ति डी. पी. सिंह (सेवानिवृत्त) उच्च न्यायालय के न्यायाधीश, सशस्त्र सेना के आपराधिक कृत्य के अध्यक्ष और कई अन्य चीजों ने इस तरह की एक बड़े  समारोह के लिए एमिटी की सराहना की और हमें उच्च लक्ष्यों और उद्देश्यों को स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया।
और कहा की “सिर्फ कानून मनुष्य को  अनुशासन  बना सकता है और केवल अनुशासित व्यक्ति सभ्य समाज बना सकता है।“
मेमेटो को मेहमान को पेश किया गया था और प्रोफेसर एस के  गौर ने सभी लोग जिन्होंने अथक श्रम से इस कार्यक्रम को सफल बनाया
को धन्यवाद दिया जिसमें डॉ अरविंद कुमार सिंह (कार्यक्रम संयोजक) अमन श्रीवास्तव और याशवंत कुमार याश (छात्र संयोजक) साथ ही यशवर्धन नगेश, सिद्धार्थ, सुरभि आनंद, क्षितिज और टीम सम्मिलित हैं।

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