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जौनपुर की इत्र,इमरती व् ईमानदारी की दी जाती है मिसाल-सीएम योगी 24UPNEWS.COM पर

दिव्यंगता का अगर समय से इलाज हो तो समय से हो सकता है ठीक-डॉ0जितेंद्र जैन

  1. जौनपुर सामाजिक  संस्था एवं त्रिशला फाउंडेशन इलाहाबाद के संयुक्त तत्वावधान में दिव्यांग बच्चो के लिये  निःशुल्क परामर्श एवं परीक्षण शिविर रचना विशेष विद्यालय जौनपुर डॉ जितेंद्र कुमार जैन द्वारा परीक्षण किया गया।इस अवसर पर काफी संख्या दिव्यांग बच्चो के माता पिता के साथ पहुचकर शिविर में इलाज कराया।

डाॅ. जितेन्द्र कुमार जैन बाल अस्थि रोग एवं सेरेब्रल पालसी विशेषज्ञ ने बताया कि ठीक समय पर इलाज हो तो दिव्यांगता खत्म हो सकती है ।अगर आपका बच्चा चलना, बैठना व खडे़ रहना या तो देर से शुरू कर रहा है, या फिर चलने-फिरने व बैठने में पूरी तरह से असहाय है तो उसे जल्द से जल्द जांच के लिए चिकित्सक के पास ले जाएं।अगर समय से इलाज शुरू किया जाए तो 80 प्रतिशत से ज्यादा बच्चे सामान्य हो सकते हैं।आधुनिकतम इलाज के बारे में जानकारी देते हुए डाॅ. जैन ने बताया कि जन्म के दौरान या बाद में मस्तिश्क के कुछ भाग के क्षतिग्रस्त हो जाने की वजह से बच्चों में चलने-फिरने, बोलने व सुनने की समस्या आती है। इसके अलावा कुछ अन्य कारण भी हैं। इसके अलावा बहुत सी अन्य बाल अस्थि समस्याओं जैसे हाथ व पैरों की हड्डियों का न बनना, हाथ व पैरों में तिरछापन व छोटापन आदि का भी इलाज संभव है। आज इलाज की आधुनिकतम तकनीक जैसे एन0डी0टी0, एस0आई, टी0आर0पी0, एम0आर0पी और सर्जरी की आधुनिकतम तकनीको से ऐसे बच्चे सामाज की मुख्य धारा में जुड रहें है। केंद्र सरकार द्वारा तमाम तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं जिसके माध्यम से रजिस्ट्रेशन करा कर इसमें लगभग ₹100000 तक का खर्च भी सरकार बन कर के इन को मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास कर रही है
शिविर में आये डॉ क्षितज कुमार शर्मा ने बताया कि आजकल बच्चों में दिव्यंगता होना एक कारण यह भी है की परिवार के द्वारा प्रॉपर तरीके प्रसव नहीं कराया जा रहा है। कुछ लोग यूट्यूब देखकर खुद ही तो करने लगे हैं। अभी कुछ दिनों पहले एक दंपत्ति द्वारा यूट्यूब देखकर खुद से प्रसव कराया जा रहा था जिसमें बच्चे और मां दोनों की मौत हो गई ।दिव्यांगता बच्चों में आने का एक कारण यह भी है गूगल पर चेक कर लोग खुद ही डॉक्टर बनकर अपना इलाज कर रहे हैं। इसके लिये अनक्वालिफाइड डॉक्टरों द्वारा प्रसव कराया जाना भी जिम्मेदार है। यदि प्रसव के दौरान 2 मिनट भी ऑक्सीजन  बच्चे को ना मिले तो दिमाग पर इसका प्रभाव पड़ेगा ।कई बार मां के पेट में नाल फसाने के कारण भी ऑक्सीजन न मिलने के कारण ऐसी स्थिति होती है।यह  भी जरूरी है कि जब बच्चे पैदा हो तो वहां पर एक बच्चे का डॉक्टर आवश्यक है।
शिविर में अभिभावक जागरूकता संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया। संगोष्ठी में सेरेब्रल पालसी के बारे में बच्चो के अभिभावकों को विस्तार से जानकारी दिया ।

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