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सरकार ने मांगी शिक्षक संघ की बात,सशर्त मानी सरकार ने शिक्षकों की शर्तें,मूल्यांकन कार्य बहिष्कार वापस-रमेश सिंह

लखनऊ। उ.प्र. माध्यमिक शिक्षक संघ के आह्वाहन पर 'मूल्यांकन बन्द" आन्दोलन दूसरे दिन भी सफलता पूर्वक चलता रहा। विभिन्न मूल्यांकन केन्द्रों पर शिक्षकों की उपस्थिति तो जोर-दार रही, लेकिन शिक्षक सिर्फ नारे-बाजी करते रहें और कापियों का मूल्यांकन करने से इंकार कर दिये। दोपहर बाद इस संघर्ष की जीत हो गयी और सरकार ने शिक्षक संघ की मांग को मान लिया।
प्रांतीय उपाध्यक्ष रमेश सिंह ने बताया कि संघ द्वारा जारी संघर्षों की जीत हुई।  उपमुख्यमंत्री से संघ की वार्ता हुई जिसमें यह निर्णय हुआ कि वित्तविहीन शिक्षकों की सेवानियमावली तैयार हो गयी है जिसे जल्द ही जारी किया जाएगा। साथ ही उपमुख्यमंत्री ने कहा है कि वित्तविहीन शिक्षकों को 15 हजार रुपये मानदेय मिलेगा, पुरानी पेंशन योजना की बहाली के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन होगा। साथ ही चिकित्सा सेवा के लिए भी सरकार ने आश्वासन दिया। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया है कि तदर्थ शिक्षकों के विनयमितीकरण बिना बाधा के किया जाएगा, मूल्यांकन पारिश्रमिक से वृद्धि की जाएगी, कोई भी तदर्थ शिक्षक किसी भी दशा में हटाया नहीं जाएगा। ऐसे में शिक्षक संघ मूल्यांकन बहिष्कार वापस लेता है।
इस मौके पर प्रांतीय मंत्री डा. राकेश सिंह, जिलाध्यक्ष सरोज सिंह, जिलामंत्री तेरस यादव, पूर्व मण्डलीय मंत्री डा. प्रमोद श्रीवास्तव, दिनेश चक्रवर्ती, धनन्जय सिंह, विनय कुमार सिंह, हितेन्द्र श्रीवास्तव, अतुल सिंह मुन्ना, अरविन्द सिंह सिरसी, विजय बहादुर यादव, बिन्द्रा प्रसाद यादव, सत्य प्रकाश मिश्रा, जय प्रकाश सिंह, नारा गुरु , अशोक कुमार, दिलीप सिंह, सुनील कुमार सिंह, हसन सईद, पूर्व अध्यक्ष नरसिंह बहादुर सिंह, अजय प्रकाश सिंह, समर बहादुर सिंह, पूर्व मंत्री सुधाकर सिंह, प्रमोद सिंह, दयाशंकर यादव आदि सैकड़ों शिक्षकों ने मूल्यांकन बंद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।

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