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जौनपुर में भीड़ की तालिबानी सजा देखिये लाइव पिटाई का वीडियो 24UPNEWS.COM पर

नगर के एक प्रतिष्ठित प्राइवेट अस्पताल में 9 साल की मासूम की मौत के बाद परिजन ने किया घण्टो हंगामा,हजारो का बिल बनाने के बाद भी उपचार में लापरवाही का परिजन लगा रहे है आरोप


जौनपुर। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के उमरपुर सिटी स्टेशन रोड पर स्थित एक अस्पताल में तीन दिन से भर्ती बच्ची की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने अच्छा-खासा हंगामा खड़ा कर दिया। परिजन पेट्रोल डालकर आग लगाने जा रहे थे जिसे पुलिस ने विफल कर दिया। परिजन चिकित्सक पर लंबी रकम लेकर इलाज में लापरवाही करने का आरोप लगा रहे हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि मडिय़ाहूं कोतवाली क्षेत्र के रामनगर विधमवा गांव निवासी संजय उर्फ विमलेश कुमार तिवारी की 9 वर्षीया पुत्री कु. गोल्डी तिवारी गाय के पट्ïटे में फंसकर सिर में गंभीर चोट लग गयी थी,15 नवंबर दोपहर में घायल को उपचार के लिये इस निजी चिकित्सालय में लाया गया था। तब से इसका उपचार चल रहा था। परिजन का कथन है कि बुधवार रात्रि लगभग 11 बजे उक्त घायल की मृत्यु हो गई थी


न चिकित्सक उसे मृत घोषित न कर उसे वेंटीलेटर पर ले गये और गुरूवार सुबह 9 बजे उसके मौत होने की बात बतायी। गोल्डी की मौत की खबर सुनकर परिजन आक्रोशित हो उठे और अस्पताल के सामने धरने पर बैठ गये। परिजन चिकित्सक और ईशा हास्पिटल के विरूद्घ नारेबाजी भी करने लगे। परिजन का यह मानना है कि यदि उसकी हालत गंभीर थी तो चिकित्सक द्वारा उसे जवाब दे देना चाहिये ताकि वह कहीं और ले जाकर उसका इलाज करवाते। इलाज के दौरान चिकित्सक ने 50 हजार रूपये से अधिक रूपया ले लिया ऐसा परिजन का कथन है। लगभग 4 घंटे तक धरने पर जमे रहे परिजन चिकित्सक के खिलाफ एफआईआर और कार्यवाही की मांग कर रहे थे। सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचे इंस्पेक्टर लाइन बाजार ने चिकित्सक के खिलाफ तहरीर लिया और लाश को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया। इस संबंध में अस्पताल के न्यूरो सर्जन डा. राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि बच्ची का इलाज बड़े ही मेहनत से किया जा रहा था और होने वाले खतरे के बारे में परिजन को पहले ही बताया जा चुका था, जिसके कारण उचार किया जा रहा था। एक सवाल पर दुर्घटना या मारपीट के मामले में मेडिकल नहीं कराया गया और न ही इस संबंध में संबंधित थाने को अस्पताल द्वारा  पुलिस सूचना दिया गया था। ऐसा न करके चिकित्सालय द्वारा नियम का उल्लंघन किया गया है। जवाब में न्यूरो सर्जन ने बताया कि मै मानवता के तहत इलाज कर रहा था। एक और आश्चर्यजनक बात प्रकाश में आयी कि मृतका के परिजन द्वारा आयुष्मान कार्ड से इलाज करवाना चाहते थे लेकिन चिकित्सक द्वारा आयुष्मान कार्ड को स्वीकार नहीं किया गया यह परिवार का आरोप है।

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