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वन मैन आर्मी:डॉ अरुण सिंह गौतम -कोरोना काल की दूसरी लहर में मरीजों और महामारी के बीच छह फुट ऊंची दीवार बन खड़े रहे 24 घण्टे।

 


वन मैन आर्मी:डॉ अरुण सिंह गौतम

-कोरोना काल की दूसरी लहर में मरीजों और महामारी के बीच छह फुट ऊंची दीवार बन खड़े रहे 24 घण्टे।

-ऑक्सीजन लेबल 45से 90 के बीच वाले मरीजों को भी अस्पताल में नहीं भर्ती होने दिया, घरों पर ही आइसोलेट कराकर दवा से बचा ली जान।

- इस तरह देश के विभिन्न प्रान्तों में रहने वाले मरीजों और तीमारदारों के लिए बन गए हीरो ऑफ द शो।

वाराणसी। बीते मार्च के अंतिम हफ्ते में आई कोरोना की दूसरी लहर तेज़ मारक क्षमता वाली साबित हुई। युवा, अधेड़ और उम्रदराज लोगों की जान जाने लगी। रेमडीसीवीर इंजेक्शन, ऑक्सीजन की कालाबाज़ारी चरम पर थी। अप्रैल के महीने में मानो यमराज़ धरती पर उतर आए हों। अवसर तलाशने वाले सरकारी, गैर सरकार अस्पतालों से लेकर श्मशान तक कफ़न नोच रहे थे। आम हो या ख़ास हर कोई अपनी दाढ़ी में लगी आग बुझाने में लीन और बेबस था। सोशल मीडिया पर भी लोग मदद की गुहार लगा रहे थे। तब यही लग रहा था जैसे प्रलय आन पड़ी है। इस दौरान बहुतों ने अपनों को खो दिया। जेवर, ज़मीन तक बेचने के बाद भी उनके हाथों में निराशा ही लगी। प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ लोगों की जान बचाने को खुद दिनरात लगे रहे फिर भी मई मध्य में महामारी की मौत रूपी सर्द हवा की रफ्तार धीमी हुई। इस दौरान तमाम चिकित्सक, राजनीतिज्ञ समेत हर प्रोफेशन या यूं कहें कि हर आम ख़ास को जान गंवानी पड़ी।

ऐसे में तमाम वह चिकित्सक भी रहे जो 24 घण्टे बिना फ़ीस या किसी फायदे के बगैर लोगों की जान बचाने का बीड़ा उठाए रखा। इन्हीं में से एक हैं डॉ अरुण सिंह गौतम। ये रहने वाले तो मूलरूप से आज़मगढ़ के हैं लेकिन दो दशक की सरकारी सर्विस में यह कानपुर नगर, देहात और बरेली मंडल में बदायूं समेत विभिन्न क्षेत्रों में रहे। पिछले दो साल से प्रदेश की राजधानी लखनऊ के राजकीय क्षयरोग अस्पताल में तैनात हैं। यह ख्यातिलब्ध फिजिशियन और चेस्ट रोग के एमडी हैं। इनकी डाइग्नोसिस का एक दशक से मैं खुद कायल हूँ। अप्रैल में कोरोना रूपी मौत की सर्द हवा से मेरा कुनबा भी घिर गया। डॉ सिंह ने दवा की लिस्ट भेजी, कहा शुरू कर दीजिए, जांच बाद में कराने और अस्पतालों में भर्ती की सख्त मनाही की। एक,एक कर परिवार के तीन मेम्बर चपेट में आए। बेटी अब भी आइसोलेट है। पांच जून को काफी राहत में आई। यह बानगी है। मेरे जैसे दो हजार से अधिक लोगों की । इन्होंने ऑनलाइन इलाज कर मौत के मुंह से बाहर निकाल लिया और जेवर , जमीन बेचने की नौबत नहीं आने दी। इनके मरीजों में राजनेता, ज्यूडिशियरी, पुलिस, पत्रकार, और तमाम गरीब भी शामिल रहे जो आज दुआएं दे रहे हैं। मरीजों को अस्पतालों में इसलिए नहीं जाने दिया क्योंकि इनका मानना है कि मरीज एक इंफेक्शन लेकर जाता है और वहां उसे छह और गले पड़ जाते हैं। कोरोना के वैरिएंट तमाम होते हैं। किसी मरीज को रेमडीसीवीर, फैबिफलू और ऑक्सीजन सिलेंडर की नौबत नहीं आने दी। समय से दवा और प्रोटीनयुक्त भोजन नियमित रखने की हिदायत देते रहे। इन्हें किसी तमगे की अपेक्षा नहीं है। लेबल तीन ऑफिसर हैं। 2016 में प्रमोशन होता तो लेबल 4 पर होते लेकिन बदायूं में एनएचआरएम के तहत जननी सुरक्षा योजना का बड़ा घोटाला 2011-12 में पर्दाफ़ाश किया तो क्षेत्रीय दल की सरकार के कथित नेता मंत्री इनके ही पीछे पड़ गए। क्योंकि उस घोटाले में प्रदेशभर के तमाम कथित वीआईपी शामिल रहे। वहां अमर उजाला ने भरपूर साथ दिया और आज वही डॉ अरुण सिंह गौतम वन मैन आर्मी बनकर कोरोना काल में खड़े हैं। इनको सीधे वेलकम भी कर सकते हैं - मो. 7905101672 पर।


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