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ठाकुर उमानाथ सिंह के बिना जौनपुर परिभाषित नहीं होता- प्रो टी एन सिंह कुलपति*


जौनपुर। उमानाथ सिंह स्मृति सेवा संस्थान के तत्वावधान में आज पूर्व मंत्री ठाकुर उमानाथ सिंह की 26 पूण्य तिथि टीडी पीजी कालेज के बलरामपुर हाल में मनाया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि काशी विद्यापीठ के कुलपति प्रो टी एन सिंह ने अपने सम्बोधन में कहा कि ठाकुर उमानाथ सिंह जी विराट व्यक्तित्व के व्यक्ति रहे हैं समाज में उनकी अलग पहचान रही है उनके पुण्य तिथि पर कार्यक्रम में उपस्थिति ऐसा संकेत करती है। 

प्रो सिंह ने कहा कि स्व ठाकुर उमानाथ सिंह का नाम लिये बगैर जौनपुर परिभाषित नहीं होता है। उन्होंने अपने जीवन काल में अच्छे काम किये इसीलिए यहाँ पर इतनी बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। इसी क्रम में कुलपति ने कहा कि सिर्फ कक्षा में पढ़ाने वाला ही गुरु नहीं होता है बल्कि असली गुरु वह है जो समाज को अन्धकार से प्रकाश की ओर ले जाने का काम करे। उन्होंने ने कहा आज समाज एकाकी होता जा रहा है इस पर गहन मंथन की आवश्यकता है। उन्होंने पूर्वांचल विश्वविद्यालय को कार्यक्रम के माध्यम से सलाह दिया कि अच्छे महापुरुषों के बारे में विश्वविद्यालय में पढ़ाया जाना चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ी को अपने महापुरुषों का ज्ञान हो सके। प्रो सिंह ने ठाकुर उमानाथ सिंह के पुत्र के पी सिंह एवं अनुज अशोक कुमार सिंह को सलाह दिया कि उनके पुण्य तिथि पर कुछ नया काम करना चाहिए ताकि उनकी यशगाथा चर्चा में बनी रहे। 


कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि प्रदेश सरकार के आवास विकास राज्य मंत्री गिरीश चन्द यादव ने कहा कि ठाकुर उमानाथ सिंह के समय की सियासत और आज की राजनीति में जमीन आसमान का अन्तर हो गया है। उनके समय की राजनीति में खासी पारदर्शिता रहती थी लेकिन आज उसमें बड़ा अन्तर देखा जा रहा है। प्रदेश के सभी जिलों में आज ठाकुर उमानाथ सिंह के अनुयायियों की एक लम्बी फेहरिस्त है जो उनकी लोकप्रियता को दर्शाती है। 


उमानाथ सिंह स्मृति सेवा संस्थान के सचिव एवं टीडी पीजी कालेज के प्रबन्धक ठाकुर उमानाथ सिंह के अनुज अशोक कुमार सिंह ने कहा भाई साहब अपने जीवन काल में हमेशा कमजोर लाचार सहित दूसरों की सेवा में लगे रहते थे। राष्ट्रहित एवं सार्वजनिक कार्यों में हमेशा एक कदम आगे ही रहते थे। उनका सभी राजनैतिक दलों के लोगों से अच्छा ताल मेल रहता था।  जनपद के विकास के लिए सभी दल के लोगों से मंथन करते रहते थे। राम जन्मभूमि आन्दोलन में उन्हें जेल यात्रा भी करना पड़ा था ।


इस अवसर पर कालेज की प्राचार्य डा सरोज सिंह, पूर्व अध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह, ईश्वर देव सिंह, जगत नरायन दूबे, वशिष्ठ नरायन सिंह, सभा जीत द्विवेदी प्रखर,आदि ने अपने विचारों को व्यक्त किया। श्रद्धांजलि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व कुलपति डा कीर्ति सिंह ने किया। इस अवसर पर शिक्षक संघ के अध्यक्ष विजय सिंह, अरविन्द सिंह, दिनेश कुमार  सिंह बब्बू, डा राधेश्याम सिंह, अजय कुमार सिंह, पंडित चन्द्रेश मिश्रा, संजीव सिंह, राजीव प्रकाश सिंह आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में आये अतिथियों का स्वागत पूर्व सांसद के पी सिंह एवं अनुज अशोक कुमार सिंह ने किया। 

इसके पहले पुण्य तिथि पर स्व उमानाथ सिंह के परिजनों सहित उमानाथ सिंह स्मृति सेवा संस्थान के तत्वावधान में जिला अस्पताल पहुंच कर मरीजों को फल वितरित किया गया। 

उमानाथ सिंह हायर सेकेंड्री की सौम्या ने पाया 97.2% अंक, विद्यालय के प्रबंधक शिवेंद्र प्रताप सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए छात्रा को दी बधाई

जौनपुर- आज सीबीएसई की हाईस्कूल का परीक्षा परिणाम पूरे प्रदेश का आया है जिसमे जनपद के प्रथम श्रेणि स्कूलों में अव्वल  उमानाथ सिंह हायर सेकेण्डरी स्कूल शंकरगंज फरीदपुर महरूपुर जौनपुर का हाईस्कूल का परीक्षाफल शत-प्रतिशत रहा। विद्यालय की छात्रा सौम्या सोनकर ने 97.2 प्रतिशत अंक अर्जित कर टॉप किया। उनकी इस उपलब्धि पर प्रबंधक शिवेंद्र प्रताप सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए छात्रा को बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
उन्होंने कहा कि कड़ी मेहनत और सकारात्मक सोच के साथ किसी भी परीक्षा को पास किया जा सकता है। विद्यालय के शिक्षकों और छात्रों के अभिभावकों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि उमानाथ सिंह हायर सेकेण्डरी स्कूल शंकरगंज फरीदपुर महरूपुर जौनपुर में बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जाती है जिसका परिणाम हर वर्ष अच्छा ही रहता है। यहां पढ़ने वाले 99 प्रतिशत विद्यार्थी अच्छे नम्बर से उत्तीर्ण होते हैं।

सरलता व सज्जनता के अवतार और गरीबो के मसीहा थे स्व0 उमानाथ सिंह

जौनपुर-नगर से करीब 4 किमी दूरी पर स्थित है महरुपुर में जन्मे उमानाथ सिंह पर यह कहावत सटीक बैठती है भावों की आरती और आंसू का चंदन है मां के सगुण सपूत, तुम्हारी स्मृति का वंदन है।तुम आये तो तुमको पाकर पिता पुनीत हुए थे।माता के वत्सल अंचल के तुम नव गीत हुए थे।ऐसा लगा रामसूरत सिंह का गृह नंदन है।मां के सगुण सपूत, तुम्हारी स्मृति का वंदन है।।अमर शहीद पूर्व मंत्री स्व. उमानाथ सिंह पर लिखी गयी साहित्य वाचस्पति डॉ. श्रीपाल सिंह की क्षेम की यह कविता आज भी प्रासंगिक है। देवदुर्लभ सुंदर देहयष्टि, गौरवर्ण, धनी काली मूँछों के भीतर सदैव मुस्काराता चेहरा, सहज श्वेत कुर्ता-धोती का परिधान, अपने ओलंदगंज के निवास के बरामदें में चौकी पर बैठे उमानाथ, सहयोगियों-समर्थकों की भीड़ से घिरे रहते थे। मकान में कभी ठा. रामलगन सिंह रहते थे और उनके ही यहां प्रदेश के प्रतिष्ठित कांग्रेस नेता ठा. हरगोविंद सिंह भी रहते थे। उमानाथ सिंह की चौखट आम आदमी के लिए सहज चौखट बन गयी थी जहां गरीब, दुखी आसानी से अपनी फरियाद सुनाने पहुंच जाता था और बाहरी बरामदें में चौकी पर बैठे ठा. उमानाथ सबका हालचाल पूछते और उनकी सहायता करते रहे। घर के अच्छे भले समृद्ध व्यक्ति और शहर में भी कई निजी मकानों के मालिक पर इसका घमंड उन्हें छूकर भी नहीं था। यह गोमती तट वाला मकान उनका निजी मकान है जबकि ठा. रामलगन सिंह इसमें उनके किराएदार थे। पर ठा. रामलगन सिंह की ठसक कभी उमानाथ में नहीं देखी गई। वे सज्जनता की मूर्ति, सरलता के अवतार और सबके लिए सहज और सुलभ थे।संकल्प सवेरा जौनपुर
बताते चलें कि स्व. सिंह के गुजरे हुए 25 वर्ष हो चुके हैं लेकिन आज भी उनकी प्रेरणा परिवार वालों व अन्य लोगों को मिलती रहती है। त्याग, परोपकार, समर्पण, शालीनता, सादगी, विनम्रता, धैर्य सब कुछ उनके व्यक्तित्व में समाहित था। उनका मानना था कि सत्य की डगर कठिन होती है लेकिन अंतिम में परिणाम सत्य के पक्ष में ही जाता है। वह एक महान समाज सेवी थे। राजनीतिक क्षेत्र में उनकी एक अलग पहचान थी। वह गरीबों व असहायों के हितों के लिए आजीवन संघर्ष करते रहे। यहीं कारण है कि उनके गुजरे 25 वर्ष हो हो चुके हैं लेकिन उनकी यादें आज भी लोगों के जेहन में है। उनके व्यक्तित्व व कृतित्व से सीख लेने की जरूरत है। उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व से प्रभावित होकर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ बीते वर्ष 24वीं पुण्यतिथि के मौके पर भाषण के दौरान उन्होंने जिले की एकमात्र मेडिकल कालेज का नाम उमानाथ सिंह के नाम करने की घोषणा की थी। हालांकि निर्माणाधीन मेडिकल कालेज को तेज गति से बनाने की दिशा में सरकार अभी ठोस पहल नहीं कर रही है। उनके अनुज भ्राता व टीडीपीजी कालेज के प्रबंधक अशोक सिंह भी अपने बड़े भाई उमानाथ सिंह के नाम से शिक्षण संस्थानों को स्थापित किया वह भी अपने आप में एक मिसाल है। ठाकुर अशोक सिंह के भातृत्व प्रेम से समाज के अन्य लोगों को सीख लेने की जरुरत है। स्व. उमानाथ सिंह ने अपने परिवार में जो संस्कार का बीज बोया वह आज भी विद्यमान है। उनका संस्कार ही उनके परिवार का धरोहर है। उसी संस्कार के रास्ते पर चल कर  पुत्र व भतीजे समाज सेवा में लगे हुए हैं। ज्ञातव्य हो कि उमानाथ सिंह स्मृति सेवा संस्थान द्वारा हर साल की तरह इस साल भी 25वीं पुण्य तिथि मनायी जाएगी