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जौनपुर में भीड़ की तालिबानी सजा देखिये लाइव पिटाई का वीडियो 24UPNEWS.COM पर

ऑटो लॉकिंग तकनीकी राहगीरों के लिए बड़ा संकट, दिन में कई बार घंटो तक बंद रहता है रेलवे फाटक।

जौनपुर- यहां दिन भर में दो सौ से अधिक ट्रेनें गुजरती हैं।ऑटो लॉकिंग तकनीक व्यवस्था के अंतर्गत रेलवे गेटमैन के पास फाटक खोलने की अथारिटी नहीं होती, स्टेशन मास्टर के पास होती है। स्टेशन मास्टर जब अपने पैनल कक्ष से गेटमैन को ऑनलाइन चाभी उपलब्ध कराता है, उसके बाद ही गेटमैन फाटक को खोल पाता है। पूर्व स्टेशन से ट्रेन आने की सूचना पर गेटमैन फाटक बंद कर देता है, उसके बाद यह व्यवस्था प्लेटफॉर्म पर स्थित स्टेशन मास्टर के पैनल कक्ष के हाथों में हो जाती है। ट्रेन रेलवे फाटक से गुजरने के बाद जब तक आउटर का सिग्नल क्रास नहीं कर जाता तब तक यह ऑटो लॉकिंग तकनीकी व्यवस्था फाटक को नहीं खुलने देता। एक के बाद एक करके एक साथ पांच-छह ट्रेनें गुजरती हैं। फाटक घंटों बंद रह जाता है। अन्य रेलवे फाटकों पर ट्रेनें एक के बाद एक गुजरती तो है, लेकिन गेटमैन ट्रेन का आखिरी डब्बा गुजरते ही फाटक को खोल देता है। यदि जफराबाद रेलवे फाटक पर भी ऐसी व्यवस्था हो जाए तो राहगीरों को रोज का घंटों इंतजार करने का संकट खत्म हो जाए

.....और फिर बंद मिला जानलेवा फाटक जफराबाद , दो नौजवानों की मौत से परिवार पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा।

●यहां दर्द से तड़प कर मर जाते हैं मरीज। 
● बन्द फाटक पर खड़ी रह जाती है घंटो एंबुलेंस सेवा, छटपटाते रहते हैं रोगी, कई की जा चुकी है जान।
● आग बुझाने के लिए जा रही फायर ब्रिगेड भी हो जाती है लाचार
रिपोर्ट-अखिलेश सिंह।
जौनपुर- "जानलेवा फाटक" जिला मुख्यालय से जफराबाद मार्ग पर स्थित जफराबाद जंक्शन का रेलवे फाटक जानलेवा बन चुका है। यहां पर राहगीर क्रॉसिंग पार करने में तिल मिला जाते हैं। मरीजो की क्या हालत होती है, पूछिये मत। घंटो तक रेलवे फाटक बंद रहता है। एंबुलेंस सेवा से अस्पताल ले जा रहे मरीज को आपातकालीन स्थिति में इस रेलवे फाटक पर घंटों तक दर्द से तड़पते रहते है। कई मरीज तड़प कर मर चुके है। ऐसा ही हुआ शनिवार को शाम,अहमदपुर गांव निवासी नौजवान अभय सिंह तथा सुनगुलपुर गांव निवासी रजनीश उर्फ शुभम सिंह के साथ हुआ। दोनों एक साथ घर जा रहे थे। शाम करीब 8:00 बजे सड़क दुर्घटना के बाद उपचार के लिए आनन-फानन में परिजन तथा गांव के लोग एंबुलेंस से लेकर जिला अस्पताल के जारहे थे। गंभीर स्थिति में एंबुलेंस जफराबाद रेल फाटक बंद होने की वजह से खड़ी हो गई। काफी देर इंतजार के बाद रेल फाटक नही खुला। दूसरे छोर पर खड़े प्राइवेट वाहन की मदद से जिला अस्पताल लेकर पहुंचे जहां डाक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। दोनों नौजवान के ऊपर परिवार की पूरी जिम्मेदारी है थी, चर्चा है कि यदि रेलवे फाटक जानलेवा बन चुका है, आपातकालीन स्थिति में यहां से गुजरना जान से हाथ धोना पड़ता है। इसी प्रकार जून 2017 रात को करीब 11:00 बज रहे थे। जफराबाद कस्बा के मोहल्ला नासही निवासी मनोज कुमार गुप्ता की पत्नी राधा गुप्ता(30) गर्भवती थी। उनको डिलीवरी पेन हुआ। जिलाअस्पताल में भर्ती कराने के लिए एंबुलेंस बुलाया गया। एंबुलेंस के आते-आते उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। रेलवे फाटक पर आते वक्त एंबुलेंस को फाटक खुलने का इंतजार में रुकना पड़ा। राधा को दर्द बढ़ता ही चला गया। एंबुलेंस आई राधा को लेकर अस्पताल जाने लगी। वापसी में पुनः जफराबाद रेलवे फाटक बन्द मिला। दर्द से राधा एंबुलेंस में चिल्ला रही थी। लेकिन इस रेलवे फाटक पर एक के बाद एक करके ट्रेनें गुजरती रही और क्रॉसिंग पर लगभग एक घण्टे तक फाटक नहीं खुला।  एंबुलेंस में ही जच्चा और बच्चा की तड़पकर मौत हो गई। इसी प्रकार जफराबाद कस्बे के जमाल अहमद तथा जवाहरलाल सेठ को हार्ट अटैक का दौरा पड़ा था। रात का समय था और इन लोगों को भी काफी देर तक जफराबाद रेलवे फाटक बंद होने की वजह से रुकना पड़ा था। फाटक खुलने के बाद हॉस्पिटल पहुंचे तो डॉक्टरों ने देर हो जाने की बात कहकर मृत घोषित कर दिया। अन्य कई लोगों की, इस रेलवे फाटक के बंद होने की वजह से आपातकालीन स्थिति में मौत हो चुकी है। इस रेलवे फाटक से सरकारी एंबुलेंस सेवा के चालक भी घबराते हैं। आपातकालीन स्थिति में जब उनको जफराबाद नगर पंचायत की तरफ बुलाया जाता है तो फोन पर ही फाटक बंद हो सकता है की चेतावनी, व धैर्य बनाकर इंतजार करने की सलाह देते हैं। कई बार तो ऐसा हुआ की एंबुलेंस के आने में काफी देर होने की स्थिति में एक्सीडेंट आदि मामले में लोग प्राइवेट वाहन से लेकर निजी चिकित्सालय में चले जाते हैं। एंबुलेंस आने के बाद खाली हाथ वापस लौट जाती है।
जफराबाद-बेलावघाट बहुत चलता मार्ग नहीं है। इस रेलवे फाटक पर घंटों फाटक बंद होने के बावजूद भी कभी जाम की समस्या नहीं होती। बहुत ही कम और निश्चित अनुपात में वाहनों की कतार लगती है। ऐसे शांत और सन्नाटे दार रेलवे फाटक पर इतनी जटिल तकनीकी व्यवस्था क्यों ?

ट्रैक्टर चढाई के दौरान पलटने से हुआ बड़ा हादसा दो लोगो की मौत से परिवार में मातम,पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा

जौनपुर-खेत की जुताई करते समय ट्रैक्टर सीखते समय ट्रैक्टर चढाई चढाते समय हुआ बड़ा हादसा,दो मित्रो की हुई दर्दनाक मौत, परिजनों ने आनन फानन में घायलो को इलाज के लिए ले गए जिला अस्पताल जहां डॉक्टरों ने दोनों को किया मृत घोषित, जफराबाद थाना क्षेत्र के सुंगुलपुर गांव का मामला*
     बता दें आज शाम जिले के जफराबाद थाना क्षेत्र के सुंगुलपुर गांव में जहां दो मित्र जिनका अविनाश कुमार सिंह पुत्र अनिल कुमार सिंह सुंगुलपुर थाना जफराबाद व अभय सिंह पुत्र अनिल कुमार सिंह,अहमदपुर जफराबाद ,दोनों खेत की जुताई के बाद खेत से निकल रहे थे एक मित्र ने ट्रैक्टर चलाने की बात कही जो पूरी तरफ ट्रेन्ड ड्राइवर नही था जो चढाई चढ़ा रहा था कि ट्रैक्टर अनियंत्रित हो गया जिसमें दोनों घायल हो गया,ग्रामीणों ने दोनों घायलों को जिला अस्पताल जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।

जनपद के प्रथम कुशल नेतृत्व वाले व्यक्ति थे ,ठाकुर हरगोविंद सिंह'- ज्ञान प्रकाश सिंह

जफराबाद (जौनपुर) क्षेत्र के हरगोविंद सिंह इंटर कॉलेज में विद्यालय कक्ष  लोकार्पण के दौरान मुख्य अतिथि पूर्व सदस्य कयर बोर्ड भारत सरकार, ज्ञान प्रकाश सिंह ने कहा कि जनपद के प्रथम कुशल नेतृत्व व व्यक्तित्व वाले नेता थे "ठाकुर हरगोविंद सिंह" सरल और इमानदार व व्यक्तित्व के धनी थे। कुशल राजनीति तथा अपने व्यक्तित्व से पूरे देश मे जनपद का नाम रोशन किये हुए थे। विशिष्ट अतिथि पूर्व विधायक सुरेंद्र प्रताप सिंह तथा चेत नारायण सिंह सदस्य विधानसभा परिषद, तिलकधारी महाविद्यालय अंग्रेजी के पूर्व विभागाध्यक्ष डी आर सिंह ने कहा कि ठाकुर हरगोविंद सिंह बुराइयों पर कठोर प्रहार किया करते थे। उनके समय में उनके कार्यकाल में शिक्षा तथा कृषि को बढ़ावा मिला था। दुर्गा पूजा महासमिति के अध्यक्ष विजय सिंह बागी ने मिशाल के तौर पर कहा कि, एक बार कुछ लोगों ने एक मकान में आग लगा दिया, उसमें जान बचाने के लिए लोग गुहार लगा रहे थे, आग लगाने वाले हंस रहे थे। कोई बचाने वाला नहीं था। एक चिड़िया की नजर पड़ी।  आग को बुझाने के प्रयास में लग गई। चोंच में पानी लेकर आग पर डालने लगी। आग लगाने वालों ने व्यंग कहा कि चोंच से पानी डालने का क्या फायदा। चिड़िया ने कहा अपना कर्म और धर्म निभा रही हूं। कोई फायदा हो या न हो,  लेकिन इतिहास में आग लगाने वालों के साथ-साथ आग बुझाने वाले का भी नाम लिया जाएगा। ऐसे ही व्यक्तित्व के ठाकुर हरगोविंद सिंह। इसके पूर्व अमर शहीद ठाकुर हरगोविंद सिंह की प्रतिमा पर, तिलकधारी महाविद्यालय के प्रबंधक अशोक कुमार सिंह, महेंद्र सिंह बब्बा, संतोष सिंह सोलंकी, श्री प्रकाश सिंह, मनोज सिंह , रवि सिंह, राजेश सिंह, प्रवीण सिंह, रंजय सिंह, धर्मराज सिंह,प्रबंधक अभिषेक सिंह गोल्डी तथा प्रिंसिपल संजीव कुमार सिंह ने पुष्प अर्पित किया मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि ने दीप दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जितेंद्र प्रताप सिंह तथा संचालन निखिलेश सिंह ने किया। इस दौरान स्कूली बच्चो के साथ-साथ क्षेत्र के पंकज सिंह, केदार सिंह, राघवेंद्र सिंह डब्बू, मुन्ना सिंह सहित तमाम लोग उपस्थित रहे।

महात्मा गांधी के जन्म दिन पर विजय प्रताप इंटरनेशनल के स्कूल के छात्रों ने हरे पेड़ लगाकर व स्वच्छता अभियान पर किये रंगारंग कार्यक्रम,अव्वल छात्रों को किया गया पुरस्कृत

जौनपुर- आज जफराबाद थाने के समीप  विजय प्रताप इंटरनेशनल स्कूल में आज 2 अक्टूबर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व लाल बहादुर के जन्म दिन पूरे विद्यालय परिवार ने धूमधाम से मनाया,इस अवसर पर विद्यालय परिवार  द्वारा विशेष आमंत्रण पर अथिति के रूप में जेपी सिंह पत्रकार व कुँवर दीपक सिंह  पत्रकार ने बच्चों का उत्साह वर्धन किया और अंत मे कार्यक्रम में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों विद्यालय के डायरेक्टर अजय प्रताप पाल व आये हुए अतिथियों ने बच्चों का पुरस्कार वितरित किया,पुरस्कार पाकर बच्चों के चेहरे चहक उठे।
बता दें कि आज जिले के जफराबाद थाने क्षेत्र में स्थित विजय प्रताप स्कूल प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी 2 अक्टूबर पर रंगारंग कार्यक्रम प्रस्तुत किया,लेकिन इस बार का थीम विद्यालय की प्रिंसिपल स्वेता राय ने कुछ अलग अंदाज में बच्चों से कराया, सुबह जैसे ही बच्चे विद्यालय में वैसे ही सभी बच्चों ने पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए विजय प्रताप इंटरनेशनल स्कूल के डायरेक्टर सहित समस्त स्टाप व सभी छात्रों ने विद्यालय परिसर में पेड़ लगाकर समाज मे अच्छा सन्देश देने का प्रयास किया गया, वही इन नन्हे मुन्ने बच्चों के
इस कदम को हम सबको मिलकर इनके इस मुहिम का हिस्सा बनना चाहिए,और एक प्रण ले कि हम सब एक पेड़ लगाए ,उसके बाद नन्हे मुन्ने छात्रो ने रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम किया,एक।तरफ पेड़ लगाने का संदेश दिया तो दूसरी तरफ हरे पेड़ को न काटने का संदेश छोटे बच्चों ने दिया, यही नही  सभी छात्रों ने नाटक के माध्यम से मन मोह लिया,कई बच्चों ने कई प्रकार के प्रोजेक्ट तैयार किया जिसमें चन्द्रयान 2,ब्रह्मोस मिसाइल,सेव द वाटर,मार्डन सिटी,ऑटोमेटिक रेलवे फाटक भी बच्चों ने मनाया है, कार्यक्रम में सभी छात्रों को सीखने कार्यक्रम को सफल बनाने में अंतिमा मिश्रा नीतू दुबे,स्वेता पाल,अमृता श्रीवास्तव, दिव्या मिश्रा व विद्यालय के प्रिंसिपल स्वेता राय ने अपना पूरा योगदान दिया और अंत मे सभी का आभार विद्यालय परिवार के डायरेक्टर अजय प्रताप पाल ने दिया।

कोर्ट के आदेश पर प्रधान पुत्र समेत दो के खिलाफ मुकदमा दर्ज,जब पुलिस ने नहीं की सुनवाई तो कोर्ट ने लिया मामले का संज्ञान

जौनपुर- जिले के जफराबाद थाना क्षेत्र के मुस्तफाबाद गॉव में जमीन पर कब्जा करने को लेकर अनुसूचित जाति की वृद्ध महिला को मारपीट कर हाथ तोड़ने तथा घर की महिलाओं से छेड़खानी,लूटपाट एवं जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए गांव छोड़ने की धमकी देने वाले प्रधानपुत्र समेत दो के खिलाफ अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट के आदेश पर थाना जफराबाद में प्राथमिकी दर्ज हुई।
70 वर्षीय केवला देवी निवासी मुस्तफाबाद ने कोर्ट में धारा 156(3) के तहत दरखास्त दिया की ग्राम प्रधानपुत्र पंकज मिश्र दबंग है।6 जून 2017 को पंकज मिश्रा के सह पर दुर्वासा  वादिनी का पेड़ काट कर उठा ले गए। पंकज,दुर्वासा ने वादिनी को जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया।मना करने पर पंकज व अन्य आरोपित उसके घर का दरवाजा तोड़कर अंदर घुस गए।लाठी से मार कर उसका हाथ तोड़ दिया।उसे बचाने सितारा व नगीना आई तो उनके गहने लूट लिए।साथ ही उनसे छेड़खानी किए।धमकी दिया कि चुपचाप गांव छोड़कर चली जाओ नहीं तो हत्या कर लाश गायब कर देंगे और जमीन भी कब्जा कर लेंगे।वादिनी की आधी आराजी ग्राम प्रधान कब्जा कर लिए हैं।पूरी आराजी कब्जा करने के प्रयास में हैं।कोर्ट ने प्रथम दृष्टया संगीन मामला पाते हुए प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया।थाना प्रभारी मधुप कुमार सिंह ने बताया कि कोर्ट के आदेश पर मुकदमा दर्ज हुआ है।विवेचना के उपरांत कारवाही की जाएगी।

योगी तेरे राज में मुर्दे भी नहीं "सुरक्षित" जमीनी विवाद: मूर्दो पर चला जेसीबी, 35 कब्रिस्तान को कंकाल सहित निकालकर फेंका। पीड़ितों ने नगर मजिस्ट्रेट से लगाई गुहार

जफराबाद के नासही मोहल्ले में जमाने से चले रहे माली बिरादरी के कब्रिस्तान का अस्तित्व हुआ समाप्त।
अधिकारियों ने झाड़ा पल्ला, सभी ने कहा संज्ञान में नहीं है मामला। न जाने किसके आदेश पर हो गया इतना बड़ा फैसला
रिपोर्ट-अखिलेश सिंह।
जफराबाद (जौनपुर) जमीनी विवाद का एक ऐसा मामला प्रकाश में आया की "मुर्दे भी खतरे में पड़ गए" जमीनी विवाद के चक्कर मे मरने वालों को दो गज जमीन भी नसीब में नहीं हो पाई। उनका अस्तित्व ही समाप्त कर दिया गया। जमाने से कब्रिस्तान के नाम पर मुर्दे दफनाए जा रहे थे, कुछ जिम्मेदारों की हेराफेरी से वर्षों से चले आ रहे मालियों के कब्रिस्तान का अस्तित्व ही समाप्त हो गया। वर्षों से दफनाए गए लगभग 35 मुर्दों को मिट्टी सहित जेसीबी से निकाल कर फेंक दिया गया। इतना बड़ा फैसला किसके आदेश पर, किस की मौजूदगी में, किन परिस्थितियों में लिया गया, कोई बताने को तैयार नहीं है। सभी मामले में अनभिज्ञता जताते हुए पल्ला झाड़ रहे हैं। मामले में शनिवार को पीड़ितों ने नगर मजिस्ट्रेट को प्रार्थना पत्र देकर न्याय के लिए गुहार लगाया है।
उक्त मोहल्ले में कई घर माली बिरादरी के है। जमाने से फूल की खेती व कारोबार करते चले आ रहे हैं। इनके यहां मरने वाले लोगों को, मोहल्ले के ही स्थित जमीन में दफनाया जाता था। माली अनीश कुमार ने बताया, उनकी उम्र लगभग 60 साल है। जब से होश संभाला तब से विरादरी के लोगों को यहीं दफनाया जाता था। जानकारी में अब तक लगभग 35 लोगों को उक्त जमीन में दफनाया जा चुका है। अनीश का एक जवान पुत्र मोहम्मद जर्रार उर्फ गुड्डू जो भारतीय जनता पार्टी के दीवाने कार्यकर्ता के नाम से जाना जाता था तथा पुत्री, बीते कुछ वर्षों में मौत के बाद यहीं दफनाये गए थे। एक माह पूर्व कागजी तौर पर मामले में ऐसी गणित हुई कि मुर्दे खतरे में पड़ गए। एक वर्ष पूर्व उक्त मुर्दों वाली जमीन व बगल की कुछ जमीन को बनारस के एक व्यक्ति ने बैनामा लिया। बैनामेदार ने हड़ावर पर कब्जा लेने का प्रयास किया। कब्जा का विरोध होने पर उसने पुलिस तथा राजस्व विभाग का शरण लिया। जमीन की पैमाइश के बाद चिन्हांकन किया गया। पीड़ितों ने बताया कि पिछले महीने जफराबाद में समाधान दिवस पर दोनों पक्षों को बुलाया गया था। अनीश कुमार तथा अन्य पीड़ितों ने बताया कि एक सादे कागज पर जबरदस्ती हस्ताक्षर करा कर जफराबाद पुलिस ने मालियों को, कब्जा में दखल अंदाजी न करने की हिदायत दी। इसके बाद मौके पर बिना किसी प्रशासनिक अधिकारी तथा पुलिस बल की मौजूदगी में कब्जा लेने वालों ने जेसीबी लगाकर मनमाने ढंग से कब्रिस्तान का अस्तित्व ही समाप्त कर दिया। 35 मुर्दों के कंकाल को मिट्टी सहित उठाकर दूसरे जगहों पर फेंक दिया गया। कब्रिस्तान की पैरवी कर रहे अनीश कुमार ने बताया कि मामले में न्याय पाने के लिए पहले से ही दीवानी न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। अनीश कुमार ने कहा कि पुलिस विभाग के कुछ लोगों की मिलीभगत से अन्याय किया है।

बोले लेखपाल।
पूछे जाने पर कार्रवाई में सम्मिलित पूर्व लेखपाल इन्द्रराज ने बताया कि कब्रिस्तान की लड़ाई लड़ रहे लोगों के पुराने कागजात के अनुसार हड़ावर की जमीन मौके स्थल से पश्चिम तरफ "नवीन परती" के नाम से दर्ज है। जिस जगह माली लोग वर्षों से लाश दफनाते चले आ रहे थे वह वर्तमान रिकार्ड में हड़ावर नहीं है। लेखपाल ने कहा कि जिस जमीन पर कब्जा दिया गया है, वहां थोड़ी गलतियां हुई है। उन्होंने बताया कि पूर्व में मेरी तैनाती के समय मैंने जो नाप कर चिन्हाकन किया था उससे अधिक कब्जा किया गया है। इस प्रकार बिना प्रशासन की मौजूदगी में कब्जा करने वालों ने जेसीबी लगाकर मनमाने ढंग से कब्जा किया है।

बोले थानाध्यक्ष।
थानाध्यक्ष मधुप कुमार सिंह ने कहा कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। यदि पीड़ित प्रार्थना पत्र  दे तो छानबीन कर कार्रवाई की जाएगी। समाधान दिवस पर मामले में क्या कार्रवाई के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि राजस्व का मामला है,  क्या निर्णय लिया गया था राजस्व के अधिकारी ही बता सकते हैं।

बोले क्षेत्राधिकारी।
कब्जा के समय कब्रिस्तान की जमीन पर जेसीबी चलाते समय कोई प्रशासनिक अधिकारी या पुलिस बल मौके पर मौजूद था कि नहीं इस सवाल के जवाब में क्षेत्राधिकारी सुशील कुमार सिंह ने कहा कि कोई ना कोई जरूर रहा होगा। मामले की जांच कर करवाई की जाएगी।

बोले नायब तहसीलदार।
समाधान दिवस में मौजूद नायब तहसीलदार मांधाता प्रताप से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मेरे संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया था। उन्होंने अपने लेखपाल से तफ्तीश कर बताया कि उक्त मामले में अस्थाई रूप से नाप की गई थी। कब्रिस्तान को हटाने का कोई आदेश नहीं दिया गया था।

बोले तहसीलदार।
मामले में तहसीलदार ज्ञानेंद्र सिंह से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि इस तरह का कोई मामला उनके संज्ञान में नहीं है। मामले में लेखपाल से रिपोर्ट मांग कर जांच किया जाएगा कि कैसे कब्र हटाई गई।

बोले सिटी मजिस्ट्रेट।
समाधान दिवस पर मौजूद सिटी मजिस्ट्रेट सुरेंद्र नाथ से पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मेरे संज्ञान में इस तरह का कोई मामला नहीं है। अगर ऐसा है तो पुलिस जिम्मेदार होगी। उन्होंने कहा कि राजस्व अधिकारी के नाम पर पुलिस की लाटरी खुल जाती है। पुलिस पर आरोप थोप कर पल्ला झाड़ लिये। शनिवार को प्रार्थना पत्र मिलने के बाद सिटी मजिस्ट्रेट ने जांच के लिए क्षेत्र के राजस्व अधिकारियों के सुपुर्द कर दिया

फिर कौन है जिम्मेदार।

इतना गंभीर व संवेदनशील मामला, कब्जा के नाम पर जमाने से चले आए कब्रिस्तान का नामोनिशान मिटा दिया गया। 35 कब्र से कंकाल सहित मुर्दों को निकाल कर फेंक दिया गया और इस मामले की जानकारी किसी भी अधिकारी को नहीं है,कितनी अजीब बात है। सवाल यह उठता है कि मुर्दों का अस्तित्व कैसे वापस आएगा ? कौन-कौन जिम्मेदार हैं ? किसके इशारे पर इतना बड़ा निर्णय लिया गया ? माली बिरादरी के लोग अब लाशों को कहां दफन करेंगे ? इतनी बड़ी घटना हो गई, मामला प्रशासन के संज्ञान में ही नहीं।


मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध।
जफराबाद पुलिस चौकी पर तैनात सिपाही बद्री मौर्य ने बताया कि मामले में  पिछले कई महीनों से विवाद चल रहा था। पिछले अगस्त महीने में समाधान दिवस पर दोनों पक्षों को जफराबाद थाने पर बुलाया गया था। थाना अध्यक्ष व क्षेत्राधिकारी की मौजूदगी में दोनों पक्षों से सुलह समझौता कराया गया था। बद्री ने बताया कि मामले में पक्की नाप की गई थी। नाप के बाद पत्थर गड्डी भी कराई गई थी। उधर राजस्व अधिकारी कह रहे हैं कि कोई पक्की नाप नहीं हुई थी। मालियों की पैरवी में जफराबाद नगर पंचायत अध्यक्ष भी थाने पर मौजूद थे। माली अनीश कुमार ने कहा कि पुलिस ने सबकुछ जोर-जबर्दस्ती के साथ कराया है। मामले में तमाम लोगों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। यदि मामले की जांच कराई जाए तो सब कुछ स्पष्ट हो जाएगा।

क्या यहां "रिश्वतखोर अधिकारियों" के नाम पर आवास पात्रों से की जा रही धन उगाही ?

......आवास के नाम पर रिश्वत लेने वाले हो रहे लाल कॉल
रिपोर्ट- अखिलेश सिंह, जफराबाद
जफराबाद (जौनपुर) हमारे यहां करप्शन एक ऐसा अपराध है, जिसको जानते सभी हैं, लेकिन कोई कुछ कर नहीं पा रहा। सरकार के द्वारा चलाई जा रही तमाम लाजवाब योजनाओं में रिश्वतखोर लाजवाब तरीके से चोरी कर ले रहे हैं, कमाकर लाल काल हो जा रहे हैं। चर्चा है कि कुछ अधिकारी एक तरफ वेतन, दूसरी तरफ कमीशन, दोनों हाथ में लड्डू लिए घूम रहे हैं। इन पर कोई भी नकेल नहीं लग पा रहा है। क्या सरकार भी जानती है कि हमारे सिस्टम में बहुत से चोर बैठे हैं। तो क्या इन चोरों से बचने के लिए डायरेक्ट पात्रों के खाते में पैसा देने का विधान चला रही है ? लेकिन यहां "तू डाल-डाल, मैं पात-पात के तर्ज पर चोरियां चल रही है। यदि चोर, चोरी करने पर अमादा हो, तो आप लाख सुरक्षा की व्यवस्था कर लें, वह चोरी के तरीके को बदलकर चोरी कर लेता है। ऐसा ही कुछ हमारे यहां नगर पंचायत में चल रहा है। आवास योजना के तहत तमाम पात्रों को आवास का पैसा मिला है, जिसमें अधिकतर पात्र आवास बनवा चुके हैं, बहुत से पात्र अब बनवा रहे हैं। मोहल्ला नासही के हरिजन बस्ती में कई पात्रो को आवास का पैसा पहले किस्त में मिल चुका है। चर्चा है कि उक्त पात्रों से नगर पंचायत के कुछ दलाल, ऊपर विभाग को रिश्वत देने के नाम पर वसूली कर रहे हैं। इसमें विभाग के एक जिम्मेदार अधिकारी के नाम की चर्चा भी खूब हो रही है। पात्रों ने बताया कि पैसा लेने वालों नेे कहां है कि यदि वह रिश्वत देने की चर्चा किसी से किए तो उनका आवास कैंसिल हो सकता है तथा मिले हुए पैसे की रिकवरी भी की जाएगी। इसलिए किसी भी हाल में कोई, कितना भी पूछे, रिश्वत देने की चर्चा बाहर नहीं निकलनी चाहिए। यह बात  इन नासमझ गरीबों के मन में बैठ गई है। इन्हे लगता है कि यदि वह रिश्वत देने की चर्चा किसी से करते हैं तो उनके साथ बड़ा धोखा हो जाएगा। इसलिए जानकारी तथा जागरूकता के अभाव में गरीब पात्र खुशी से इन दलालों को मांगे गए रिश्वत के अनुसार पांच से दस हजार रुपये दे चुके हैं। और कोई भी अनजान आदमी इनसे पूछ रहा है तो यह डर के मारे रिश्वत देने से इंकार कर दे रहे हैं। जहां इस तरीके से रिश्वतखोरी को अंजाम दिया जाए वहां सरकार भी क्या कर सकती है ?


क्या ग्राम पंचायतों में भी आवास के नाम पर चल रही रिश्वतखोरी ?

क्या ग्राम पंचायतों में पात्रों से आवास के नाम पर प्रति आवास पीछे 20 हजार रुपये लेने की चर्चा सही है ?  इन चर्चाओं में कितना दम है, कितना सही है, कितना गलत है, ग्राम पंचायत का प्रत्येक नागरिक अच्छे तरीके से जानता हैं। लेकिन खिलाफत करने की कूवत किसी में नहीं दिखाई देता। हालांकि यहां चोरी से सब काम हो जा रहे हैं तो कुबत दिखाने का सवाल ही नहीं उठता।  रिश्वत लेने वाले से बड़ा गुनहगार, रिश्वत देने वाला है। जब तक ल रिश्वत देने वाले जागरूक नहीं होंगे तब तक व्यवस्थाएं इसी तरह भ्रष्टाचार के आगोश में राम भरोसे चलती रहेंगी। क्या मैं गलत कह रहा हूँ ?

 ....और मेरे रिश्तेदार भी ग्राम प्रधान बनकर अमीर हो गए।

गरीबी का दंश झेलते- झेलते अचानक हमारे दो रिश्तेदारों को ग्राम प्रधानी रूपी चिराग हाथ लग गया, और एक पंचवर्षीय में ही यह रिश्तेदार अमीर हो गए। एक रिश्तेदार जो सड़कों पर सवारी गाड़ी चलवा कर जीविकोपार्जन करने में परेशान थे, वह इस समय एक पंचवर्षीय में ही स्वयं लग्जरी गाड़ी खरीद कर चल रहे हैं। वहीं दूसरा रिश्तेदार शुद्ध रूप से किसान था, किसानी के माध्यम से जीविकोपार्जन चलाता था। इस एक पंचवर्षीय में लखनऊ तथा बनारस जैसे महानगरों में उसने बेशकीमती जमीन रजिस्ट्री करा ली है। इन रिश्तेदारों से चर्चा में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा चलाई जा रही शौचालय, आवास तथा आदि लाभकारी योजनाओं में हम प्रधानों का सबसे ज्यादा लाभ हो रहा है।

और एक बार फिर गरमाया नगर पंचायत जफराबाद, अहमदपुर के युवक पर जानलेवा हमला,ग्रामीणों में आक्रोश

जौनपुर- जफराबाद थाना क्षेत्र के कस्बे में बीते आठ अगस्त को जफराबाद नगर पंचायत के टेंपो स्टैंड के पास अहमदपुर तथा दरीबा गांव के लड़कों के बीच मारपीट हुई थी। घटना को लेकर दरीबा गांव के लोगों ने सड़क पर चक्काजाम किया था। मामले में नौ अगस्त को अहमदपुर गांव के 20 लोगों के खिलाफ जफराबाद पुलिस ने बलवा का मुकदमा पंजीकृत किया था। उक्त मामले में शिकायत पर जफराबाद पुलिस चौकी पर तैनात दो सिपाही विनोद कुमार सिंह तथा राणा सिंह को लाइन हाजिर कर दिया गया था। रविवार को सुबह 10 बजे अहमदपुर गांव का युवक शुभांशु सिंह हौज गांव के लिए बाइक से जा रहा था। दरिबा गांव के कुछ दबंग युवकों ने बीते हुए घटना को लेकर शुभांशु को रोक लिया। उसके ऊपर धारदार हथियार तथा लाठी-डंडे से जानलेवा हमला बोल दिया। शुभांशु को मारपीट कर बुरी तरीके से घायल कर मौके से फरार हो गए। सड़क किनारे बेहोश अवस्था में घायल शुभांशु को लोगों ने जिला अस्पताल भर्ती कराया। उक्त मामले की जानकारी होते ही अहमदपुर गांव से भारी संख्या में लोग जफराबाद थाने पर शिकायत लेकर इकट्ठा हो गए। पिता राजेश सिंह की तहरीर पर जफराबाद पुलिस ने दरीबा गांव के पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया है। उक्त घटना को लेकर अहमदपुर के गांव के लोगों में आक्रोश व्याप्त है। सुरक्षा को देखते हुए जफराबाद थानाध्यक्ष ने जफराबाद बाजार में टेंपो स्टैंड के पास पुलिस बल को तैनात कर दिया है। उक्त घटना के संबंध में जफराबाद पुलिस ने 20 लोगों के खिलाफ बलवा का मुकदमा तो पंजीकृत कर लिया था, लेकिन चक्का जाम करने वाले लोगों पर किसी भी प्रकार की कार्रवाई न होने की स्थिति में यह घटना बढ़ता चला जा रहा है। मामले में  जफराबाद पुलिस की भूमिका सुस्त नजर आ रही है। यदि समय रहते पुलिस कठोर कदम नहीं उठाती है तो कोई भी बड़ी घटना हो सकती है,इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता।

गोमती नदी पर पुल को लेकर मौन प्रदर्शन 19 को

जौनपुर। केराकत व जफराबाद विधानसभा क्षेत्रान्तर्गत गोमती नदी पर वीरमपुर-भड़ेहरी घाट, मई-पसेवां घाट व धर्मापुर-अखड़ो देवी घाट पर प्रस्तावित स्वीकृत पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2010-11 में सेतु निर्माण इकाई प्रथम वाराणसी द्वारा प्रारम्भ किया गया। निर्माण कार्य प्रारम्भ होने के 9 वर्ष गुजर जाने के बाद भी पुल अर्धनिर्मित स्थिति में कुछ पिलरों के सहारे हवा में लटका हुआ है तथा निर्माण कार्य पूर्ण रूप से बन्द है। उपरोक्त अर्धनिर्मित पुल का निर्माण कार्य अतिशीघ्र पूरा कराने की मांग को लेकर 19 अगस्त दिन सोमवार को सुबह 10 बजे कलेक्ट्रेट परिसर में सांकेतिक मौन प्रदर्शन किया जायेगा। साथ ही मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश शासन को सम्बोधित मांगों का ज्ञापन जिलाधिकारी को दिया जायेगा। इस आशय की जानकारी आयोजक विकास तिवारी एडवोकेट ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दी है।

आंगनबाड़ी केंद्र का उद्धघाटन कर रहे विधायक जफराबाद हरेंद्र प्रसाद सिंह की गाड़ी हुई दुर्घटना ग्रस्त,सभी सुरक्षित

जौनपुर- जफराबाद-371 विधानसभा के भाजपा विधायक हरेंद्र प्रसाद सिंह आज सुबह आंगनबाड़ी केंद्र का उद्घाटन कर लौट रहे थे  की सामने तेज रफ्तार की बोलेरो और विधायक की फार्च्यूनर की आमने सामने भिंड़त में दोनों गाड़ियां हुई क्षतिग्रस्त, विधायक और उनके सहयोगी को आई हल्की चोटें,जफराबाद थाना क्षेत्र के मोहम्मदपुर कांध के समीप हुई दुर्घटना।

....क्या बुराईयों में लिप्त होती जा रही है "खाकी" ?आखिर कौन है जिम्मेदार।

क्या कठोर आचरण और सुविधा शुल्क के चलते समाज से बन रही दूरियां ?
रिपोर्ट-अखिलेश सिंह।
जौनपुर- पुलिस का कारनामा चिन्ता का विषय बनता चला जा रहा है। देखा जाये तो हमारी सुरक्षा के लिए तैनात पुलिस व्यवस्था अपने विश्वास की नींव कमजोर करती चली जा रही है। लोग पुलिस के पास जाने में एक बार सोचते हैं। विषय चिंतनीय है,इसे चंद्र लाइनों में कैसे समेटे। पुलिस समाज के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदार व्यवस्था है। हम इन्हें बुराइयों में लिप्त होते व् अपने आप से अलग करके नहीं देख सकते। अगर इनमे बुराइयां आ रही है तो उसपर ध्यान आकृष्ट कराना जरूरी हैै। जिम्मेदार लोग पहल करे तो समाज और पुलिस के बीच बढ़ती दूरियों को कम किया जा सकता है। सबसे पहले तो पुलिस को अपनी भाषा व आचरण में सुधार लाने की जरूरत है। उदाहरण के तौर पर बताते चलें, ठंडी का समय था, एक रिटायर शिक्षक अपने पोती के गायब हो जाने की सूचना के लिए प्रार्थना पत्र लेकर दरोगा जी के समक्ष प्रस्तुत हुए। दरोगा जी ने पूछा क्या बात है, पोती के गायब होने की बात मौखिक तौर पर दरोगा जी को बताएं। दरोगा जी ने एक सज्जन और इज्जत दार आदमी को डांटते हुए कहा कि "कहीं रजाई गरम कर रही होगी"। यह शब्द सुनते ही रिटायर अध्यापक की बेज्जती से आंखें नम हो गई। वह अपना एप्लीकेशन लेकर वापस हो गये। इस तरीके से अक्सर पुलिस अपने भाषा तथा आचरण का प्रदर्शन करती रहती है। अभी हाल में ही 14 जुलाई को जफराबाद थाने के दरोगा विनोद सचान ने एक पत्रकार के साथ अपने भाषा तथा आचरण का प्रदर्शन किया। पत्रकार को ही अपराध में फंसा देने की धमकी दे दी। फरियादियों के साथ पुलिस को अच्छे व्यहार व् सरल आचरण के साथ पेश आना चाहिए। क्या एक आम आदमी के साथ कटु भाषा का प्रयोग जरूरी है। क्या सरलता के साथ सुनवाई या कार्र्वाई नही की जा सकती। पुलिस के पास अपनी फरियाद लेकर जाने से पहले भुक्त भोगी जुगाड़ व् सोर्स के चक्कर में लग जाते है। ऐसा इसलिए की उनको लगता है की पुलिस में हमारी सुनवाई सरलता से नहीं हो सकती। इस बात को पुलिस अच्छी तरह से महसूस करती होगी। क्योंकि भुक्तभोगी को पुलिस के पास पहुंचने से पहले उसके लिये किसी प्रभावशाली व्यक्ति का फोन पहुंच जाता है। हांलाकि तालियां दोनों हाथ से बजती है। कुछ प्रभावशाली लोगों की भी पुलिस से गलत कार्य करा लेने की चर्चा खूब रहती है। कुछ फरियादी तो गलत करने के बावजूद भी जुगाड़ के चक्कर में पड़ जाते हैं। जिनके पास जुगाड़ नहीं रहता वह सुविधा शुल्क रूपी हथियार का प्रयोग कर लेते हैं।
पुलिस के बारे में सुविधा शुल्क की भी चर्चा खूब होती रहती हैं। अभी हाल में ही जफराबाद में एक चोरी के मामले में एक युवक को बख्श देने के नाम पर दो लाख की मांग हुई, 50 हजार पर निपटारा हुआ, इस बात की चर्चा खूब रही। कुछ लोगों ने तो इस मामले की सूचना पुलिस अधीक्षक के व्हाट्सएप पर भी दिया था, लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। जफराबाद थाने में पिछले माह यूपी हंड्रेड के सिपाही तथा दरोगा एक कब्जा कराने में सम्मिलित रहे उसकी भी चर्चा खूब रही। इस तरीके से हमेशा पुलिस के कारनामों की चर्चा सुनने को मिलता रहता है।
इस महत्वपूर्ण व्यवस्था के कमियों पर, शब्दों से प्रहार करने की कोशिश कर रहा हूं। पता नहीं चोट असर करेगा कि नहीं। "शर्म वालों के लिए एक लाइन काफी है, बेशर्म को क्या कहें"


........और आम जनता क्यों करने लगी है विरोध।

पुलिस के कारनामे से अजीज आकर आम जनता ने पुलिस के प्रति नकारात्मक चश्मा पहन लिया है, क्या आप इस बात को मानते हैं। सड़क पर दुर्घटना से मौत हो या नदी में डूबने से, पब्लिक का गुस्सा पुलिस पर टूटता है। जिस घटनाओँ से पुलिस का कोई सरोकार ना हो ऐसे में भी पुलिस को विरोध झेलना पड़ता है। आखिर पुलिस के प्रति जनता सकारात्मक सोच क्यों नही रखती। क्या पुलिस के रवैये व् आचरण के प्रति पब्लिक की नकारात्मक प्रतिक्रिया है ? पुलिस के गुड वर्क के प्रति जनता का नकारात्मक विचार अक्सर सुनने को मिलता है। क्रिमिनल तो क्रिमिनल ही होता है। एक अपराधी किसी के लिए अच्छा नहीं होता। लेकिन पुलिस और अपराधियों के बीच के मामले में अक्सर अपराधियों के प्रति सहानुभूति की चर्चा सुनकर बड़ा दुख होता है। कैसी विडंबना के साथ चल रही है व्यवस्थाएं। अनुभव करते होंगे कि यदि एक अच्छे व्यवहार व आचरण करने वाला व्यक्ति एक बार गलत कार्य भी कर जाए तो उसके प्रति लोगों की सहानुभूति रहती है। लेकिन एक कटु वचन तथा गंदे आचरण वाले व्यक्ति का अच्छा कार्य लोगों को खराब लगता है। क्या कुछ ऐसा ही मामला है ?


.... तो क्या अटैची वाले सरकार ने लगाया था पौधा।

आपको याद होगा कि उत्तर प्रदेश में एक सरकार ऐसी आई थी जिसने अधिकारियों से अटैची लेने का कार्य शुरू किया था। उस सरकार ने सिस्टम में भ्रष्टाचार तथा बुराइयों को जन्म दिया था। बुराइयों का एक पौधा लगा दिया था। सरकार तो चली गई लेकिन वह पौधा वृक्ष हो गया है। अब अच्छे पौधों और वृक्ष की जरूरत है, समय से करप्शन को मिटाने वाला पौधा लगा दिया जाए तो आने वाले समय में सिस्टम में शुद्धता होगी यह बात पूरी गारंटी के साथ कहा जा सकता है। पौधा लगाते हैं तो उसका लाभ वर्षों बाद मिलता है। ठीक उसी प्रकार यदि पुलिस विभाग अपने कारनामे पर चिंतन कर सुधार करने की कोशिश करें तो थोड़ा समय लगेगा,लेकिन तय है कि पौधे का लाभ मिलेगा जरूर।
हालांकि अच्छाइयों पर बुराइयों का प्रभाव जल्दी होता है,लेकिन बुराइयों पर अच्छाइयों का प्रभाव पड़ने में थोड़ा मेहनत करना पड़ेगा।

फिलहाल बड़ा सा उपन्यास लिखने का क्या फायदा। शर्म वालों को एक लाइन काफी है, बेशर्म को क्या कहें?

....यहां सभी विभागों में देर से होते हैं कार्य, आखिर ऐसा क्यों।
रिपोर्ट-अखिलेश सिंह,जफराबाद
जौनपुर (जफराबाद)-व्यवस्थाओं मे जिम्मेदारों कि लचर व्यवस्था कहें, या जिम्मेदारियों पर भार अधिक होना कहें। मैन पावर की कमी होना कहें या फिर कुछ और ही। जितनी भी व्यवस्थाएं हैं, सभी बहुत ही ढीली चल रही हैं, क्या यह कहना गलत है? राजस्व विभाग, पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग, विद्युत विभाग, सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी विभाग, आरटीओ विभाग, अग्निशमन  विभाग, मास्टर प्लांट आदि तमाम विभाग जनपद में है। उक्त सभी विभागों में से किसी भी विभाग से यदि  पाला पड़ा तो मान के चलिए एक दिन का कार्य, उसको होने में तमाम दिन चक्कर लगवा देंगे। कम लोग हैं, जिनको एक दिन में कार्य करा लेने की कला मालूम होता है। अपने निजी कला तथा कुछ "सुविधा" के माध्यम से जिम्मेदारों को खुश करके अपना कार्य समय से करा लेते हैं। आम आदमी जिसको विभाग के बारे में ए बी सी डी नहीं पता है, या फिर जिम्मेदारों को खुश करने का उपाय नहीं आता, तो फिर चक्कर लगाते रहते हैं।
एक छोटा सा उदाहरण,
जफराबाद थाना, एक रिक्शा चलाने वाला मजदूर अपने बच्चे की गुमशुदगी दर्ज कराने के लिए चार जुलाई से 11 जुलाई तक एक सप्ताह थाने का चक्कर लगाया। जब मामला अखबार में प्रकाशित हुआ तब जाकर उसकी गुमशुदगी दर्ज की गई।

अभी हाल में ही की घटना जो खूब चर्चाओं में रही। एक पति जुआ में  पत्नी को हार गया। पति के दोस्तों ने  पत्नी के साथ दुष्कर्म किया। मामले में  पीड़िता को आठ महीने पुलिस विभाग का चक्कर लगाना पड़ा। अंत में  उसकी पीड़ा की सुनवाई कोर्ट में हुई। तब जाकर पुलिस ने मुकदमा पंजीकृत किया। हालांकि पुलिस के मुताबिक इस मामले में झोल बताया गया। लेकिन क्या यही कार्य पुलिस आठ महीना पहले नहीं कर सकती थी? अन्य विभागों की भी यही दशा है। यदि एक आम आदमी नियम से काम कराना चाहा तो उसको लाइन तथा कतार में होना तय है। यदि आप एजेंट के माध्यम से अपना कार्य करा रहे हैं तो अति शीघ्र हो जाता है।
जनपद में एक विभाग ऐसा है, जिसमें हो रहे भ्रष्टाचार की बारे में आम आदमी से लेकर जनपद के सभी जनप्रतिनिधि तथा आला अधिकारी जानते हैं "आरटीओ विभाग"  यहां की दशा है जगजाहिर है। यहां नियम से चलने वाले महीनों चक्कर लगाते हैं। बगैर नियम वाले एजेंट के माध्यम से बैक डोर से अपना काम करा कर निकल लेते हैं। इतना ही नहीं इस विभाग का एक अधिकारी नियम से चलने वाले युवकों  के साथ गजब की हेकड़ी दिखाता है। फिलहाल अच्छे-अच्छे को उस अधिकारी का मख्खन लगाते हुए देखा जाता है। इस विभाग की दशा पूरा जनपद जानता है, लेकिन कोई कुछ कर नहीं सकता। विद्युत विभाग, मीटर बिलिंग गलत हो गई तो उसको सही कराने के लिए चक्कर लगाते रहिए। यह कार्य उपभोक्ताओं के लिए इतना कठिन बना दिया जाता है कि इस मामले में उपभोक्ता की घबराहट बढ़ जाती है। सभी विभागों की व्यवस्था इतनी लचर हो गई है की फाइल पर फाइल लदता चला जा रहा है। कार्य पेंडिंग में बढ़ता चला जा रहा है। एक ही कार्य के लिए प्रार्थीओं को एक बार के बजाय दस बार प्रार्थना पत्र देना पड़ता है। अब आप ही सोचें कि जिस देश के सरकारी तंत्र व जिम्मेदार इतने सुस्त हों, जिम्मेदारियों के प्रति उदासीन हो, उस देश में सरकार चाहे जिसकी हो, जमीनी स्तर पर स्थिति वैसी की वैसी ही बनी रहेगी। क्या इस बात से इनकार किया जा सकता है।

अराजकता फैलाने वालों पर रहेगी पुलिस की पैनी नजर :सी ओ सिटी

जौनपुर- जिले के जफराबाद थाना परिसर में आज शांति समिति की बैठक को संबोधित करते हुए सी0ओ0 सिटी सुशील कुमार सिंह ने कहा कि अराजकता फैलाने वाले लोगों पर पुलिस की पैनी नजर बनाए हुए है।
बता दें आज स्थानीय थाना क्षेत्र के परिसर में सीओ सिटी के नेतृत्व में शांति समिति की बैठक आहूत की गई ,जिसमे श्री सिंह ने कहा कि पुलिस की उन लोगों पर कार्यवाही होना तय है जो कानून को अपने हाथ मे लेंगे,उन्होंने समिति के लोगो व अन्य संभ्रांत लोगो को आश्वस्त किया कि अगर कोई भी व्यक्ति समाज मे किसी प्रकार के गलत कार्यो में है तो उसकी सूचना निर्भीक होकर पुलिस को दें।ऐसे लोगो पर कार्यवाही होगी।थाना प्रभारी मधुप कुमार सिंह ने लोगो से पुलिस के साथ मिल जुल कर काम करने की अपील किया।उन्होंने जफराबाद कस्बे में लगने वाले हाजी हरमैन बाबा के उर्स तथा बकरीद पर लोगों सेजरूरी बातें किया।
बैठक में समाजवादी पार्टी अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष डॉ सरफराज खान,डॉ कयूम अंसारी,डॉ जनार्दन,विजय कुमार,नंदलाल सहित अनेक लोग मौजूद रहे।

ट्रेन के सामने कुदकर युवक ने दी अपनी जान

जौनपुर-जिले के जफराबाद थाना क्षेत्र स्थित जफराबाद स्टेशन के पास आज शाम रेलवे फाटक के दो नंबर ट्रैक पर गाजीपुर-वाराणसी डीएमओ ट्रेन की चपेट में आने से अज्ञात युवक की मौत हो गई। सूचना पर जीआरपी मौके पर पहुंचकर युवक के शव को कब्जे में लेकर उसकी शिनाख्त में लगी हुई है। 
बता दें कि प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार गाजीपुर-वाराणसी डीएमओ ट्रेन बनारस से जौनपुर की दिशा में आ रही थी। उक्त युवक रेलवे क्रॉसिंग के पास में एक चाय की दुकान पर खड़ा हुआ था। जैसे ही ट्रेन क्रॉसिंग के नजदीक पहुंची युवक दौड़ता हुआ जाकर रेल पटरी पर लेट गया। ट्रेन की चपेट में आने से ही मौके पर ही उसकी मौत हो गई। बुरी तरह से कट जाने की वजह से युवक की पहचान स्थानीय लोग नही कर पाये। उक्त युवक की उम्र लगभग 23 साल बताई जा रही है। मैरून कलर का शर्ट पहना हुआ है। देर शाम तक युवक की शिनाख्त जीआरपी नहीं कर पायी है।

पुत्र ने, पिता पर, मां को गायब करने का लगाया आरोप।

जौनपुर- जनपद के जफराबाद थाना क्षेत्र के एक गांव में पुत्र ने पिता पर मां को गायब करने का आरोप लगाया। आरोप पर पुलिस ने पिता को पूछताछ के लिए 48 घंटे तक थाने पर बैठाए रखा। कुछ सामाजिक लोगों की मध्यस्थता में निर्दोष होने की स्थिति में पिता को गायब पत्नी की खोजबीन कर तलाश करने के लिए छोड़ा गया। 
बता दें कि जफराबाद थाना क्षेत्र के समोपुर कला गांव निवासी लल्लन यादव की पत्नी लालदेइ देवी 50 वर्ष विगत 16 जुलाई को घर से लापता हो गई। लल्लन यादव ने बहुत खोजबीन  किया लेकिन उनकी पत्नी नहीं मिली। गायब होने के दो दिन बाद बाहर कमाई कर रहे पुत्रों को उन्होंने फोन से सूचित किया। मां के गायब होने की सूचना पर छोटा पुत्र चुन्नू घर पर आया। उसने भी मां को बहुत तलाशने की कोशिश किया। लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। 26 जुलाई को पुत्र, जफराबाद थाने पर पहुंचकर अपने पिता पर ही मां को गायब कर देने का आरोप लगा दिया। सूचना पर जफराबाद पुलिस ने लल्लन यादव को हिरासत में लेकर पूछताछ के लिए थाने पर बैठा लिया। 48 घंटे तक लल्लन पुलिस के हिरासत में रहे। पूछताछ के बाद पुलिस को इस मामले में कोई सच्चाई नजर नहीं आई। निर्दोष होने की गारंटी लेने वाले कुछ सामाजिक लोगो की जिम्मेदारी पर थानाध्यक्ष ने लल्लन यादव को पत्नी की खोजबीन तथा तलाश करने के लिए छोड़ दिया। पूछे जाने पर थाना अध्यक्ष मधु कुमार सिंह ने बताया कि लालदेइ के गायब होने के मामले में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। पिता-पुत्र लालदेइ को गायब होने के संबंध में एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। मामले की छानबीन की जा रही है, उसके बाद अगली कार्रवाई की जाएगी।

संदिग्ध परिस्थितियों में कांवरिया गायब होने से परिवार में मायूसी

जौनपुर- जनपद के जफराबाद थाना क्षेत्र के लाडनपुर गांव निवासी जंग बहादुर यादव उम्र  45 वर्ष गांव के कुछ लोगों के साथ कांवर लेकर जल चढ़ाने के लिए वाराणसी के काशी विश्वनाथ गए थे। संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए। मामले की सूचना सोमवार को जंग बहादुर की पत्नी ने जफराबाद पुलिस को दिया। सूचना के आधार पर पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
खबरों के अनुसार 19 जुलाई को जंग बहादुर गांव के कुछ 15 लोगों के साथ कांवर लेकर काशी विश्वनाथ बनारस पहुंचे। उनके साथ गए हुए गांव वालों ने बताया कि जंग बहादुर बनारस काशी विश्वनाथ के मंदिर तक हम लोगों के साथ में थे। मंदिर से बाहर निकलने के बाद वह हम लोग के साथ से गायब हो गए। हम लोगों ने आसपास उनको तलाशने की कोशिश किया लेकिन नहीं मिले। ऐसी स्थिति में हम सभी घर वापस आ गए। 10 दिन बीत गया, जंग बहादुर घर नहीं लौटे। उनकी पत्नी ने बताया कि अचानक गायब होना मामला संदिग्ध है। जंग बहादुर थोड़ा बहुत नशा भी करते थे। दिमागी तौर पर प्रभावित बताए जा रहे हैं।

पत्रकार को धमकी देने वाले दरोगा को दुराचरण की नोटिस

जौनपुर-कुछ दिन पूर्व जफराबाद थाने पर तैनात दरोगा विनोद सचान ने पत्रकार को मोबाइल फोन पर धमकाने जैसी हरकत तथा दुर्व्यवहार किया था। पत्रकार को धमकाने की वॉइस रिकॉर्डिंग पर पुलिस अधीक्षक ने जांच के बाद दरोगा को दुराचरण की नोटिस देकर जवाब मांगा है।
बता दें कि जिले के जफराबाद थाना क्षेत्र में पिछले 14 जुलाई को जफराबाद के गद्दीपुर गांव के एक मामले में मुकदमा पंजीकृत किया गया था। उक्त मुकदमे के संबंध में एफ आई आर पर दर्ज पीड़ित पक्ष के मोबाइल फोन पर पत्रकार ने जानकारी लेना चाहा।  मामले में लीपापोती कर रहे थाने पर तैनात दरोगा विनोद सचान को पत्रकार द्वारा पीड़ित पक्ष से जानकारी लेना नागवार लग गया। उक्त मुकदमे के इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर विनोद सचान ने अपनी अयोग्यता का परिचय देते हुए पत्रकार को फोन लगा कर बिना परिचय पूछे ही फोन पर धमकाने लगे। उन्होंने पत्रकार को धमकी भरे अंदाज में पूछा कि तुमने पीड़ित पक्ष को फोन क्यों लगाया। पत्रकार ने कहा कि फोन लगा कर जानकारी लेना कोई अपराध तो नहीं ? दरोगा ने धमकी दिया, अपराध तो नहीं है, लेकिन अपराध बना दिया जाएगा। जिसकी जानकारी पत्रकार ने पुलिस अधीक्षक को उसी दिन फोन से वार्ता कर दे दिया था। दरोगा के द्वारा किए गए दुर्व्यवहार की वॉइस रिकॉर्डिंग भी कप्तान को उपलब्ध करा दी गई थी। कप्तान ने मामले की जांच के लिए क्षेत्राधिकारी नगर नृपेंद्र सिंह को मामला सुपुर्द कर दिया था। जांच के बाद क्षेत्राधिकारी ने पुलिस अधीक्षक को रिपोर्ट में दरोगा को दोषी होने का रिपोर्ट प्रस्तुत किया। गुरुवार को एक पत्रकार वार्ता के दौरान पूछे जाने पर पुलिस अधीक्षक विपिन कुमार मिश्रा ने बताया कि जांच के बाद दरोगा द्वारा धमकाने तथा दुरा चरण की पुष्टि हुई है। दरोगा को इस संबंध में नोटिस देेेकर जवाब मांगा गया है। इस दौरान अन्य विभागीय पनिशमेंट दिए जाने की बात पुलिस अधीक्षक ने कही। इस प्रकार दरोगा जी को पत्रकार को धमकी देना थोड़ा सा महंगा पड़ गया है। जवाब के बाद उन पर अभी शेष कार्यवाही बाकी है।

सड़क चौड़ीकरण से आक्रोशित महिलाओं ने किया तांडव,महिलाओं को पीछे खदेड़ने पुलिस के हांथ पांव फूले

जौनपुर- जिले के जफराबाद थाना क्षेत्र के किरतापुर गांव में आज सुबह सड़क चौड़ीकरण के विवाद में महिलाओं ने एक व्यक्ति के निर्माण कार्य को तथा मड़हा को गिरा कर ध्वस्त कर दिया। मामले की सूचना पर जफराबाद पुलिस मय फोर्स महिला पुलिस के साथ मौके पर पहुंचकर लोगों को हिरासत में ले लिया। घटना से संबंधित 28 लोगों का चालान कर दिया गया,लेकिन इन घटना में आक्रोशित महिलाओं को पीछे खदेड़ने के लिए पुलिस को छूटे पसीने,फिलहाल स्थित को पुलिस ने अन्तोगत्वा संभालने में सफल रही।
बता दें कि जिले के जफराबाद थाना क्षेत्र के किरतापुर गांव के ठाकुरद्वारा हरिजन बस्ती में पूर्व में बने दो मीटर चौड़े खड़ंजा सड़क का चौड़ीकरण का कार्य होना था। 200 मीटर तक उक्त खड़ंजा सड़क को एक मीटर और अधिक चौड़ा करना था। रास्ते में संतोष उर्फ तूफानी गिरी का मकान पड़ता है। उन्होंने सोमवार को सड़क चौड़ीकरण होने से पूर्व दो मीटर चौड़ी सड़क के बाद बाउंड्री निर्माण का कार्य शुरू करवा दिया था। हरिजन बस्ती के लोगों की सूचना पर हंड्रेड डायल पुलिस मौके पर पहुंचकर उक्त निर्माण कार्य को रुकवा दिया था। मामले के निपटारा के लिए दोनों पक्ष को थाने पर बुलाया गया था। मंगलवार को सुबह संतोष तथा हरिजन बस्ती के लोगों से सड़क चौड़ीकरण के मामले में एक बार फिर विवाद शुरू हो गया। किरतापुर हरिजन बस्ती की दर्जनों महिलाएं मौके पर पहुंच गई।  निर्माण किये गए कार्य को ध्वस्त कर दिया। तथा रास्ते पर पूर्व में बने हुए मड़हे को भी उजाड़ कर फेंक दिया। तथा सड़क किनारे लगाए गए पौधों को भी काटकर तथा उखाड़कर फेंक दिया। मामले की सूचना पर जफराबाद पुलिस मौके पर पहुंची। थानाध्यक्ष ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराने की कोशिश किया। महिलाओं की दबंगई को देखते हुए थानाध्यक्ष के भी हाथ-पांव फूलने लगे। उन्होंने जफराबाद थाने से सूचना कर महिला पुलिसकर्मियों को मौके पर बुलाया। मौके पर उपद्रव करने वाली महिलाओं को हिरासत में लेकर थाने ले आए। पूछे जाने पर थानाध्यक्ष मधु कुमार सिंह ने बताया कि मामले में सम्मिलित एक पक्ष से दो लोगों को तथा दूसरे पक्ष से कुल 26 महिलाओं का चालान किया गया है।

पत्रकार को फोन पर दरोगा ने झूठे अपराध में फंसा देने की दी धमकी

दरोगा के इस बर्ताव से पत्रकारों में आक्रोश , एसपी ने मामले की जांच के लिए सीओ सिटी को सुपुर्त किया*
जौनपुर-अपराधी की तरह  एक मामले के आईओ दरोगा ने पत्रकार को फंसाने की धमकी दिया। जफराबाद थाना क्षेत्र के गद्दीपुर गांव में एक युवती भगाने के एफ आई आर के मामले में पीड़ित के परिजनो से पूछताछ करना दरोगा को नागवार लग गया। दरोगा ने पूछताछ करने वाले पत्रकार को फोन पर अपराध में फंसा देने की धमकी दे दी। मामले की जानकारी पत्रकारों ने पुलिस अधीक्षक को दिया। पुलिस अधीक्षक ने मामले की जांच क्षेत्राधिकारी को सुपुर्द किया है।

मामला रविवार का है, थाना क्षेत्र के गद्दीपुर की एक युवती को पड़ोसी गांव के युवक द्वारा भगा ले जाने का मामला रविवार को जफराबाद थाने पर आया। युवती के परिजनों की तहरीर के आधार पर जफराबाद पुलिस ने युवक के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया। तहरीर पर पीड़ित पक्ष वादी के लिखे गए मोबाइल नंबर तथा एफ आई आर पर दर्ज मोबाइल नंबर पर पत्रकार ने मामले की जानकारी के लिए फोन किया। उक्त बात की सूचना मामले के जांच अधिकारी विनोद सचान को हुई। रविवार को शाम इस मामले के आई ओ विनोद सचान ने पत्रकार के मोबाइल पर फोन लगाया। पत्रकार से उन्होंने पूछा कि तुमने वादी को फोन क्यों लगाया। पत्रकार ने कहा क्यों पीड़ित से उसकी पीड़ा के बारे में पूछने के लिए फोन नहीं लगा सकता क्या ? दरोगा जी ने कहा कि मुकदमा नहीं हुआ तो फोन क्यों लगाया। पत्रकार ने मुकदमा पंजीकृत होने का दावा किया। दरोगा साहब ने पूछा कि किसके खिलाफ मुकदमा हुआ है। पत्रकार ने जवाब दिया कि आप थाने के सब इंस्पेक्टर हैं तो आपको पता ही होगा। दरोगा ने कहा कि मैं ही इस केस का आई ओ हूं। पत्रकार ने कहा बताइए आपको दिक्कत क्या है। फोन किस लिए किये हैं। दरोगा ने धमकी भरे लहजे में कहा कि दिक्कत हमको नहीं दिक्कत तुमको कर दूंगा। पत्रकार ने पूछा किस बात की दिक्कत करेंगे। पीड़ित की पीड़ा जानने के लिए फोन करना कौन सा अपराध है। जवाब में दरोगा ने पत्रकार को धमकी दिया कि अपराध नहीं है, लेकिन अपराध बना दिया जाएगा। धमकी देकर फोन काट दिया। इस तरीके की हरकत  पत्रकारों के साथ पुलिस के मन बढ़ दरोगा, बेलगाम, बेअन्दाज,अपराधियों की तरह पेश आ रहे हैं। उक्त बात की जानकारी मोबाइल फोन से तत्काल मौखिक तौर पर पत्रकार ने पुलिस अधीक्षक को दिया, तथा दरोगा द्वारा मोबाइल फोन पर पत्रकार को दी जाने वाले धमकी की वॉइस रिकॉर्डिंग भी पुलिस अधीक्षक को दे दिया। पुलिस अधीक्षक ने दरोगा  द्वारा दी जाने वाली धमकी की वॉइस रिकॉर्डिंग सुनने के बाद मामले की जांच के लिए सीओ सिटी को सुपुर्द कर दिया है।