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राज्य कर्मचारियों का तीसरे दिन में धरना प्रदर्शन रहा जारी,सभी कार्यालयों में तालाबंदी से आम जनता रही परेशान,कर्मचारी नेता राकेश श्रीवास्तव सहित हजारों कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर में सरकार को सद्बुद्धि हेतु किया यज् 24upnews.com

बेखौफ बदमाशों ने फिल्मी अंदाज में किया थाने पर हमला

प्रतापगढ़। बीती रात मानिकपुर थाने में आधा दर्जन से अधिक अपराधियों ने चढकर बोला हमला धुआंधार फायरिंग कर मचाई दहशत, बमों के धमाके और गोलियों की तड़तडाहट से थर्राया इलाका, साथी को छुड़ाने के लिए किया हमला, आलम यह रहा कि आपा धापी में पुलिस के हौसले इस कदर पस्त रहा कि बचाव के लिए इधर-उधर छुप कर बचाई जान, सूत्रों ने बताया कि हमले के पहले अपराधियों ने थाना प्रभारी को फोन कर के दायरे में रहने व नतीजा भुगतने के लिए दी थी धमकी के बावजूद भी थानाध्यक्ष ने एहतियात नही बरता जिसके कारण एक होमगार्ड को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा, अब देखना यह है कि हमेशा की तरह घटना के बाद मामले को सलटा दिया जाएगा  या पुलिस अपनी हनक बनाने के लिए कुछ प्रभावी कार्रवाई करती है।

अनमोल विचार


जीभ जन्म से होती है ,और मृत्यु तक रहती है..... क्योकि वो कोमल होती है.
दाँत जन्म के बाद में आते है ,और मृत्यु से पहले चले जाते हैं.. क्योकि वो कठोर होते है।
छोटा बनके रहोगे तो मिलेगी हर बड़ी रहमत... बड़ा होने पर तो माँ भी गोद से उतार देती है.
पानी के बिना नदी बेकार है,
अतिथि के बिना आँगन बेकार है,
प्रेम न हो तो सगे-सम्बन्धी बेकार है,
पैसा न हो तो पाकेट बेकार है,
और जीवन में गुरु न हो तो जीवन बेकार है,
इसलिए जीवन में "गुरु"जरुरी है.. "गुरुर" नही.

यदि कबीर जिन्दा होते तो आजकल के दोहे यह होते :- 

  • नयी सदी से मिल रही, दर्द भरी सौगात! बेटा कहता बाप से, तेरी क्या औकात!!
  • पानी आँखों का मरा, मरी शर्म औ लाज! कहे बहू अब सास से, घर में मेरा राज!! 
  • भाई भी करता नहीं, भाई पर विश्वास! बहन पराई हो गयी, साली खासमखास!!
  • मंदिर में पूजा करें, घर में करें कलेश! बापू तो बोझा लगे, पत्थर लगे गणेश!! 
  • बचे कहाँ अब शेष हैं, दया, धरम, ईमान! पत्थर के भगवान हैं, पत्थर दिल इंसान!! 
  • पत्थर के भगवान को, लगते छप्पन भोग! मर जाते फुटपाथ पर, भूखे, प्यासे लोग!! 
  • फैला है पाखंड का, अन्धकार सब ओर! पापी करते जागरण, मचा-मचा कर शोर!!
  • पहन मुखौटा धरम का, करते दिन. भर पाप! भंडारे करते फिरें, घर में भूखा बाप!!

ऐ सुख तू कहाँ मिलता है..........

ऐ सुख तू कहाँ मिलता है ,
क्या तेरा कोई स्थायी पता है ?
क्यों बन बैठा है अन्जाना ,
आखिर क्या है तेरा ठिकाना ?
कहाँ कहाँ ढूंढा तुझको ,
पर तू न कहीं मिला मुझको ।
ढूंढा ऊँचे मकानों में
बड़ी बड़ी दुकानों में
स्वादिस्ट पकवानों में
चोटी के धनवानों में
वो भी तुझको ढूंढ रहे थे
बल्कि मुझको ही पूछ रहे थे
क्या आपको कुछ पता है
ये सुख आखिर कहाँ रहता है ?
मेरे पास तो दुःख का पता था
जो सुबह शाम अक्सर मिलता था
परेशान होके रपट लिखवाई
पर ये कोशिश भी काम न आई
उम्र अब ढलान पे है
हौसले थकान पे है
हाँ उसकी तस्वीर है मेरे पास
अब भी बची हुई है आस
मैं भी हार नही मानूंगा
सुख के रहस्य को जानूंगा
बचपन में मिला करता था
मेरे साथ रहा करता था
पर जबसे मैं बड़ा हो गया
मेरा सुख मुझसे जुदा हो गया।
मैं फिर भी नही हुआ हताश
जारी रखी उसकी तलाश
एक दिन जब आवाज ये आई
क्या मुझको ढूंढ रहा है भाई
मैं तेरे अन्दर छुपा हुआ हूँ
तेरे ही घर में बसा हुआ हूँ
मेरा नही है कुछ भी मोल
सिक्कों में मुझको न तोल
मैं बच्चों की मुस्कानों में हूँ
हारमोनियम की तानों में हूँ
पत्नी के साथ चाय पीने में
परिवार के संग जीने में
माँ बाप के आशीर्वाद में
रसोई घर के महाप्रसाद में
बच्चों की सफलता में हूँ
माँ की निश्छल ममता में हूँ
हर पल तेरे संग रहता हूँ
और अक्सर तुझसे कहता हूँ
मैं तो हूँ बस एक अहसास
बंद कर दे मेरी तलाश
जो मिला उसी में कर संतोष
आज को जी ले कल की न सोच
कल के लिए आज को न खोना
मेरे लिए कभी दुखी न होना ।
मेरे लिए कभी दुखी न होना ।
हमेशा यह याद रखना ।
संन्दीप यादव बी0ए0 तृतीय वर्ष

बिकता इंसाफ/जमी के परिन्दें
गगन के परिन्दे गगन तक उडेगें।
जमीं के परिन्दे जमीं तक उडेगें।।
गगन के परिन्दों की सीमा है निश्चित।
जमीं के परिन्दों की सीमा है अनिश्चित।।
गगन के परिन्दों के वादे है पक्के।
जमीं के परिन्दों के वादें है कच्चे ।।
गगन के परिन्दे है भोजन के भूखे।
जमीं के परिन्दे है हवस के है भूखे।।
गगन के परिन्दे को भोजन ही चाहिए।
जमीं  के परिन्दों को क्या -क्या है चाहिए।।
कहा तक करू  जमीं के परिन्दों का वर्णन।
इन्होने तो मर्यादा की सारी हदें पार कर दी।।
जमीं के परिन्दे कहा तक उडेगें.....
जमीं के परिन्दे कहा पर गिरगें।।
किस तरह गिरेंगे जीम के परिन्दें।
ये जमीं के परिन्दे गगन बेच देगें।
वतन बेच दंेगे।
गर मिले मुह मागी रकम तो खुलेआम
मा बहन बेच देगें।।
आज प्रतिस्पर्धा के लिए क्या नही हो रहा ।
कोई वेश्यालय ही अपना व्यवसाय बना लिया ।।
कोई बहन -बेटी को अपना शिकार बना लिया
गगन के परिन्दे गगन तक उडेगें।
जमीं के परिन्दें कहाॅ तक उडेगें।।

हैदराबाद के आंध्र में पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट, 10 मरे

हैदराबाद। आंध्र प्रदेश के तटवर्ती पूर्वी गोदावरी जिले में सोमवार को एक पटाखा फैक्ट्री में धमाके ने दस लोगों की जान ले ली। विस्फोट में कुछ लोग घायल भी हुए हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। बताया जाता है कि विस्फोट के बाद आग लग गई। अधिकारियों ने मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जाहिर की है।पुलिस का कहना है कि पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट की यह घटना वकाटिप्पा गांव की है, जहां एक मकान में अवैध तरीके से पटाखे बनाए जा रहे थे। विस्फोट की वजह का पता नहीं चल सका है। पुलिस के मुताबिक, घटना के वक्त पटाखा फैक्ट्री में करीब 20 लोग काम कर रहे थे। विस्फोट के बाद मकान में आग लग गई और वहां से तेज लपटें उठने लगीं। मौके पर पहुंचे बचाव कर्मियों ने घायलों को पास के अस्पतालों में भर्ती कराया है। कड़ी मेहनत के बाद आग पर काबू पर पाया जा सका।

मेरा हिँदुत्व केवल धर्म नहीँ है !!

मेरा हिँदुत्व केवल धर्म नहीँ है,
पंथ नहीँ है, वर्ग नहीँ है,
ये मन की विचारधारा है,
मुझको प्राणोँ से प्यारा है,
ये जीवन जीने की कला महान,
ये सत्यपथ का महाविज्ञान,
ये कोई जात नही है,
ये विचार की बात नही है,
ये मन से मन का जोड है,
भ्रम उलझन का तोड है,
जीवन मूल्योँ का निचोड है,
जिसपर मुझको अतिशय गर्व है,
ये मानवता का महापर्व है,
बिखराता नहीँ जोडता है,
बैर मनोँ के तोडता है,
मानव से मानव का जोडना नाता,
मुझको मेरा हिँदुत्व सिखलाता।
दुश्मन के लिए शमशीर है,
दुष्टोँ के सीने देता चीर है,
पापी नहीँ पाप को मारे,
हर मानुष को श्राप से तारे,
संदेश प्रेम है सदा हमारा,
सत्यमेव का देते नारा,
पर रणभूमि मेँ रणबीर महान ये,
शत्रु मर्दन मेँ नर्म नहीँ है,
मेरा हिँदुत्व केवल धर्म नहीँ है,