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जौनपुर केराकत थाना क्षेत्र के बेहाड़ा गांव में पुलिस और बदमाशो के बीच मुठभेड़ हुई । पुलिस को सूचना मिली कि कुछ बदमाश लूट की योजना की योजना बना रहे , केराकत पुलिस औऱ चन्दवक पुलिस ने घेराबंदी की तो बदमाश पुलिस टीम पर फायरिंग करने लगे, वारदात में दोनो तरफ से हुई फायरिंग में एक पुलिस कर्मी सहित दो बदमाश अनिल राय और सुभाष यादव और प्रदीप राजभर को पुलिस ने तीन बाइक एक पिस्टल, एक तमंचा सहित गिरफ्तार कर लिया और चार बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे 24upnews.com

सरकार से है एक सवाल-मातृभाषा हिन्दी कब बनेगी राष्ट्रभाषा

कपिल देव मौर्य
हिन्दी दिवस के अवसर पर पूर्व के वर्षो की तरह इस वर्ष भी पूरे देश में हिन्दी दिवस का आयोजन कर स्थिति एवं उपेक्षा पर लम्बी चैड़ी चर्चा परिचर्चा की गयी लेकिन एक सवाल आज भी बरकरार है कि देश की इस मातृ भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा क्यों नही मिल सका है। इसका जबाब न तो राजनेता देते है न ही वे जिम्मेदार लोग जो हिन्दी के विकास एवं उत्थान का दम भरते नही थकते है। सवाल यह भी है कि ऐसी क्या बात है कि हमारी मातृ भाषा हिन्दी केवल राजभाषा तक सीमित हो कर रह गयी है। इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा देने में आखिरकार क्या कठिनायी देश की सरकार को हो रही है। आज देश का एक बड़ा जिम्मेदार तपका हिन्दी बोलने में क्यों शर्म महसूस कर रहा है। इस तरह के तमाम सवालो का जबाब देश की आवाम जानना चाहती है।
    देव भाषा संस्कृत से बनी हिन्दी भाषा को देश को एक सूत्र मे बांधने के लिए मातृ भाषा के रूप मे स्वीकारते हुए इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा देने की मांग उठने पर सन् 1949 में 14 सितम्बर को राजभाषा का दर्जा दे दिया गया। लेकिन जन मांग के अनुरूप आज भी इसको राष्ट्रभाषा का दर्जा नही मिल सका है। जब भी देश में इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा देने की आवाज उठती है अपने ही देश के राज्यो से बिरोध की आवाज उठने लगती है। ऐसा क्यो किया जाता है जब हम अपनी मातृभाषा को सम्मान नही दे पा रहे है। तो हम कैसे उम्मीद करते है कि हममे एकता रहेगी हम एक सूत्र मे कैसे बधेगे।
    हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा आज तक नही दिलापाने वाले लम्बरदार लोग प्रति वर्ष 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस काआयोजन कर लम्बा चैड़ा भाषण देते हुए इसकी उपेक्षा की चर्चा केसाथ विकास की बात करके जिम्मेदारी से मुक्त होते नजर आते है।बाद में हिन्दी को भुलाकर फिर अंग्रेजियत की धारा मे बह जाते है।इन परिस्थतियो मे क्या हिन्दी का कुछ विकास संभव है। हिन्दी मातृभाषा है लेकिन एक बड़ी बिडम्बना यह है कि पूरे देश का सर्वे किया जाये तो कुछ प्रान्तो को छोड़ कर लोग हिन्दी को जानते हुए भी हिन्दी बोलना उचित नही समझते है। इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि हिन्दी की स्थिति क्या है इसे कितना सम्मान मिलता है। 
     बतादे कि हिन्दी किसी जाति या मजहब की भाषा नही है देश की उन्नति एवं ज्ञान के बृद्धि की भाष जरूर है। हिन्दी की लिपि मे लाखों शब्दो का भन्डारण है इसका उच्चारण भी सरल है फिर भी लोग इससे परहेज करते है। जबकि दूसरी भाषा अंग्रजी जिसके सहारे देश विकास की राह तय करने मे जुटा है उसकी लिपि मे शब्दो की संख्या महज कुछ हजार मे है फिर भी इसे प्राथमिकता मिल रही है। यह स्थिति जहां हिन्दी के दुर्भाग्य का संकेत देता है वही पर देश को सवालो के कटघरे में भी खड़ा करता है। हां इतना जरूर है कि देश की केन्द्र सरकार द्वारा नारा दिया जाता है कि सरकारी काम काज हिन्दी मे किये जायें। लकिन सच्चाई यह है कि केन्द्र सरकार के सभी कार्य अंग्रेजी में ही होते है। यह दोहरी ब्यवस्था क्यों है क्या इसका जबाब सरकार के नुमायीन्दो के पास है।
     आज हिन्दी के विकास के लिए चुनौती तो सरकार की नीतियां है यह सबसे बड़ा दुखद  पहलू है कि आज भी हिन्दी सरकारी कामकाज की भाषा नही बन सकी है। लेकिन हिन्दी दिवस के दिन जिम्मेदार लोग शोर खूब मचाते है। बाद में भूल जाते है कि हिन्दी दिवस पर क्या संकल्प लिया है। हिन्दी का विकास तब माना जायेगा जब सरकार इसे भारतीय भाषा घोषित कर पूरे देश में सरकारी कामकाज हिन्दी में सुनिश्चित कराये और उसकी लगातार समीक्षा भी करे  कि कौन इसका अनुपालन कर रहा है कैान नही सरकार इसके प्रति कड़ा निर्णय ले तब सायद लोग इस मातृभाषा को दिल से स्वीकार कर सकेगे, अन्यथा केवल गाल बजाने से हिन्दी का विकास होना संदिग्ध प्रतीत होता है।

पीएम नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से किए देश की जनता से 10 बड़े वादे


यशनाथ सिह  
नई दिल्ली -  आज सुबह लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने एक बार फिर समृद्ध भारत और स्वच्छ भारत का सपना दिखाते हुए अपनी सरकार की योजनाओं के बारे में बताया। दूसरी बार स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने देशवासियों से 2022 का रोडमैप तय करने की अपील की। पीएम के भाषण की 10 मुख्य बातें निम्नाकित है । 
1. देश के 18,500 गांवों में बिजली पहुंचाने का वादा ।18, 500 गांवों में अभी तक बिजली का खंभा नहीं पहुंचा है। अगर पुराने तरीके से चलते रहे तो इन गांवों में बिजली का तार पहुंचाते-पहुंचाते 10 साल लग जाएंगे। मैंने जब मीटिंग बुलाई तो अधिकारियों ने कहा कि ये गांव सुदूर जंगल और पर्वतीय इलाकों में हैं, 2019 से पहले बिजली नहीं पहुंचाया जा सकता है। सवा सौ टीम इंडिया का संकल्प है कि 1000 दिन में इन गांवों में बिजली में पहुंचाया जाए। 
2. स्टार्ट अप इंडिया और स्टैंड अप इंडिया यह साल बाबा साहब आंबेडकर की 125वीं जयंती का साल है। बैंकों के सवा लाख ब्रांच यह संकल्प करे कि हर ब्रांच एक आदिवासी या दलित को स्टार्ट अप के लिए लोन दे। बैंक महिलाओं उद्ममियों को आगे बढ़ाने के लिए नीति बनाए। 
3. कंपनियों को प्रोत्साहन उन कंपनियों को अलग तरह का सरकारी आर्थिक पैकेज मिलेगा, जो ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देगी। 
4. छोटी नौकरियों में इंटरव्यू खत्म छोटी नौकरियों में इंटरव्यू की व्यवस्था खत्म करने की पहल का भरोसा दिया। 
5. वन रैंक, वन पेंशन का फिर भरोसा दिलाया पीएम मोदी ने पूर्व सैनिकों को एक बार फिर भरोसा दिलाते हुए कहा कि वन रैंक वन पेंशन को सैद्धांतिक तौर पर मंजूरी मिल चुकी, संगठनों से बातचीत चल रही है। जल्द ही इसे लागू किया जाएगा। 
6. 75वें स्वतंत्रता दिवस का संकल्प 2022 तक सक्षम, स्वस्थ, श्रेष्ठ, स्वाभिमानी, संपन्न और स्वालंबी भारत के संपने को पूरा करना है. 
7.ज्यादा कानून गुड गवर्नेंस के लिए ठीक नहीं हर बात पर कानून बनाना फैशन बन गया है, यह गुड गवर्नेंस के लिए ठीक नहीं है। हमें कानूनों को सरल और उपयोगी बनाना होगा। अधिक कानूनों से न्यायपालिका पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। 
8. सांप्रदायिकता को पनपने नहीं देंगे पीएम मोदी ने अपने भाषण में जातिवाद और संप्रदायवाद पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि हमें इन समस्याओं को पनपने नहीं देना है। जहर के विकास को अमृत से मिटाना है। 
9.किसानों को मिलेगा यूरिया पीएम मोदी ने किसानों की समस्याओं को लेकर कहा कि उन्हें जितना यूरिया चाहिए उतना दिया जाएगा। देश के अन्नदाता को किसी भी तरह की समस्या का सामना नहीं करना पड़ेगा। 
10.कृषि मंत्रालय का बदलेगा नाम कृषि मंत्रालय का नाम बदलने का भी पीएम मोदी ने लालकिले की प्राचीर से ऐलान किया। मोदी ने कहा कि इसे अब किसान कल्याण मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा।

भगवान राम की अयोध्या उत्तर प्रदेश में नहीं बल्कि पाकिस्तान में भी है


मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य का
अपनी किताब ‘फैक्ट्स ऑफ अयोध्या एपीसोड’ में दावा
राम मंदिर और भगवान राम के जन्म को लेकर एक विवादास्पद बयान सामने आया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआइएमपीएलबी) के एक सदस्य ने दावा किया है कि भगवान राम की अयोध्या उत्तर प्रदेश में नहीं बल्कि पाकिस्तान में है। एआइएमपीएलबी के सहायक महासचिव अब्दुल रहीम कुरैशी ने अपनी किताब ‘फैक्ट्स ऑफ अयोध्या एपीसोड’ में लिखा है कि उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले में स्थित अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि नहीं है।

इस शहर को 700 ईसा पूर्व बसाया गया था, जबकि राम का जन्म 1.8 करोड़ साल पहले माना जाता है। कुरैशी ने अपनी किताब में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पुरातत्वविद जस्सू राम और अन्य के शोधपत्रों को शामिल किया है। इस किताब में राम के परदादा राज रघु द्वारा स्थापित और स्वयं भगवान राम द्वारा स्थापित दो अयोध्या का जिक्र है। कुरैशी ने कहा कि जस्सू ने अपने शोधपत्र ‘रामायण का प्राचीन भूगोल’ में लिखा है कि दोनों अयोध्या पाकिस्तान के उत्तर पश्चिम सीमा प्रांत (वर्तमान में खैबर पख्तूनख्वा) के डेरा इस्माइल जिले में हैं। एआइएमपीएलबी की ओर से अदालत में अयोध्या मामले को लड़ रही कमेटी के अहम सदस्य कुरैशी ने कहा कि फैजाबाद जिले में स्थित अयोध्या को 7वीं सदी ईसा पूर्व में साकेत कहा जाता था।
संभव है कि 11वीं सदी में हिन्दुओं ने इसका नाम अयोध्या रखा हो। कुरैशी ने कहा कि अगर फैजाबाद स्थित अयोध्या ही राम की जन्मस्थली होती तो मुगल बादशाह अकबर के काल में रामायण लिखने वाले तुलसीदास मंदिर को तोड़कर मस्जिद बनाए जाने का जिक्र अवश्य करते। उन्होंने कहा कि इन तथ्यों को अदालत के समक्ष रखा जाएगा। कुरैशी ने विवादित स्थल में राम की मूर्तियां और अन्य प्रतीक रखे जाने को एक षड्यंत्र बताया है।

रेल पटरियों की हरकत ने विज्ञान को अचंभे में डाल दिया

हजारीबाग. झारखंड के एक गांव में रेल पटरियों की हरकत ने विज्ञान को अचंभे में डाल दिया है। रोज सुबह 8 बजते ही पटरियां आपस में सटने लगती हैं, जो तीन घंटे के भीतर पूरी तरह चिपक जाती हैं। फिर दोपहर 3 बजे बाद स्वत: ही अलग भी होने लगती हैं। ग्रामीण इसे चमत्कार मान पूज रहे हैं तो विज्ञानी सिर खुजा रहे हैं। अजीब तरह का ये मामला है हजारीबाग-बरकाका ना रूट पर बसे लोहरियाटांड का। अभी इस रूट पर ट्रेनों की आवाजाही शुरू नहीं हुई है। ग्रामीणों और रेल पटरियों की हिफाजत करने वालों ने बताया कि हमने कई बार ऐसी हरकत होते देखी है। खूब छानबीन की, लेकिन कारण समझ नहीं आया। पटरियों के चिपकने की प्रक्रिया को हमने मोटी  लकड़ी अड़ाकर रोकने की कोशिश भी की, लेकिन नाकाम रहे। खिंचाव इतना शक्तिशाली था कि सीमेंट के प्लेटफॉर्म में मोटे लोहे के क्लिप से कसी  पटरियां क्लिप तोड़कर चिपक जाती हैं। ऐसा 15-20 फीट की लंबाई में ही हो रहा है। इस बारे में  साइंटिस्ट डाॅ. बीके मिश्रा ने कहा कि वाकई, ये हैरान करने वाली बात है। वैसे, ये मैग्नेटिक फील्ड इफेक्ट भी हो सकता है। ड्रिलींग से ही पता चल पाएगा कि जमीन के अंदर क्या हो रहा है। जूलॉजी विभाग के प्रमुख डाॅ. डीएन साधु ने बताया कि देखना होगा कि जिस चट्टान के ऊपर से पटरी गुजरी है, वह कौन सा स्टोन है।

अम्बेडकरनगर में धड़ल्ले से हो रही है नकली व मिलावटी खाद्य तेलों की बिक्री


भूपेंद्र सिंह गर्गवंशी
अम्बेडकरनगर। जिला मुख्यालयी शहर अकबरपुरध्शहजादपुर से लेकर जिले के सभी तहसील क्षेत्रों में स्थित विभिन्न छोटी.बड़ी बाजारों में बड़े पैमाने पर नकली सरसो का तेलए रिफाइण्ड ऑयलए वनस्पति ऑयल बनाने व बिक्री किए जाने का धन्धा जोरों पर चल रहा है। इस धन्धे से जुड़े लोग जहाँ खुद मालामाल हो रहे हैं वहीं उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैंए परिणामतः लोग तरह.तरह की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा समय.समय पर छापेमारी की जाती हैए जाँच के लिए नमूने भी एकत्र किए जाते हैंए लेकिन कार्रवाई के नाम पर सिफर। विभाग द्वारा खानापूर्ति करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली जाती हैए जिससे मिलावटी व डुप्लीकेट तेल बनाने व बिक्री का धन्धा बदस्तूर जारी है। जिले की लगभग सभीं पाँचों तहसीलों में स्थित विभिन्न बाजारों में यह धन्धा निर्बाध चल रहा है। नकली तथा मिलावटी सरसोए रिफाइण्ड व वनस्पति तेलों के निर्माण तथा बिक्री का धन्धा यहाँ काफी दिनों से फल.फूल रहा है। खाद्य सुरक्षा विभाग की लचर कार्यप्रणाली एवं खाऊध्कमाऊ नीति के चलते इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
डुप्लीकेट व मिलावटी तेल बनाने व बेचने के बारे में पता चला है कि इसके कारोबारी कानपुर,गोरखपुर, वाराणसी आदि शहरों से व्हाइट ऑयल , भूसी का तेल, लाकर उनको टैंकरों में एकत्र करके रख लेते हैं,और इसी में केमिकल व सेंट मिलाकर नकली सरसो का तेल व रिफाइण्ड ऑयल तैयार करते है फिर उसे ब्राण्डेड कम्पनियों जैसे फार्चूनए बैल कोल्हूए लालमीनाए बुलेटए सुन्दरीए कच्ची घानीए फार्चून आदि के डिब्बे व टीन में भरकर उस पर सीलए मुहर लगाकर पैक कर जनपद के अलावा निकटवर्ती जिलों में सप्लाई करते हैं।
नकली सरसो व रिफाइण्ड तेल में सब्जी आदि बनाते समय कड़ाही में झाग भर जाता और सब्जी खाने में कड़वी व बेस्वाद लगती है। इन नकली व मिलावटी तेलों का इस्तेमाल जाने.अनजाने सभी लोग कर रहे हैं। यह तेल लोगों के शरीर में धीमा जहर का काम कर रहा है। लोग तरह.तरह के रोगों का शिकार हो रहे हैं। इस तरह के तेलों का उपयोग करने वाले लोग आंतए त्वचा हृदय सम्बन्धी अनेकानेक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
www.upnews.com ब्यूरो

पक्षी बिहार के बजाए अवैध शराब उत्पादन का केन्द्र बनी अम्बेडकरनगर की दरबन झील

भूपेंद्र सिंह गर्गवंशी
अम्बेडकर - उत्तर प्रदेश के मानचित्र में स्थित दरबन झील को पक्षी बिहार बनाने का सपना आज भी सपना ही बना हुआ है। अम्बेडकरनगर जिले के कटेहरी विकास खण्ड क्षेत्र में स्थित यह झील भारत की प्रमुख झीलों में शुमार है। दरबन झील को पक्षी बिहार बनाने के सम्बन्ध में कई बार आवाजें उठींए यहाँ तक पिछली बसपा सरकार ने तैयारी भी की थी लेकिन तब तक प्रदेश की सत्ता परिवर्तित हो गई परिणामतः यह योजना ठण्डे बस्ते में चली गई। अम्बेडकरनगर जनपद में तीन.तीन प्रभावशाली मंत्री और सभीं पाँचो विधान सभाओं पर सपा का कब्जा है बावजूद इसकेे दरबन झील की तरफ किसी का ध्यान नहीं जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि प्रति वर्ष जाडे़ के मौसम में साइबेरियाए दक्षिण अफ्रीकाए रूसए चेचेन्या आदि दूर देशों से चल कर हजारों की संख्या में पक्षी मेहमान इस झील को अपना आशियाना बनाकर यहाँ जाडे़ भर प्रवास करते हैं और मौसम बदलने पर अपने वतन को वापस लौट जाते हैं। इन मेहमान पक्षियों की हिफाजत की कोई व्यवस्था न होने के कारण ये मेहमान पक्षी जहाँ चहचहाते हुए आकर इस झील को शोभायमान करते हैंए वहीं इनमें से कुछ तो अराजक शिकारियों के हाथों मौत के घाट भी उतार दिये जाते हैं। दरबन झील मछलीए कमल का फूल, भषीण आदि तमाम प्राकृतिक सम्पदा से परिपूर्ण होने के कारण इसके कब्जे व दबदबे को लेकर कई गुटों में संघर्ष भी होता रहता है। यही नहीं अम्बेडकरनगर जिले में अवैध शराब कारोबारियों के लिए सबसे उपयुक्त जगह दरबन झील का कछार है। यहाँ हमेशा शराब की भट्ठियाँ दहकती रहती हैं। झील से सम्बद्ध नाले की सफाई न होने के कारण बरसात के दिनों मे ये झील रौद्र रूप धारण कर कई गावों व घरों को अपने आगोश में ले लेती हैए जिससे जानमाल सहित बड़ी तादात में फसलों को भी नुकसान पहुंचता है और किसानों को अपूर्णनीय क्षति होती है।
बसपा सरकार में दरबन झील को पक्षी बिहार बनाने के लिए कुछ महत्वपूर्ण प्रयास किया गया थाए लेकिन सपा सरकार आने के बाद माननीयों द्वारा सिर्फ आश्वासन ही दिया गयाए किया कुछ भी नहीं गया। पहले भी दरबन झील को पक्षी बिहार बनाने की मांग कई बार उठी लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के कान पर जूँ तक नहीं रेंगी। आलम यह है कि दरबन झील के अगल.बगल किनारे वाले स्थानों ;कछारद्ध पर देशी शराब की भट्ठियाँ दहकती रहती हैं। अवैध रूप से मछली एवं पक्षियों का शिकार किया जाता है, इसके अलावा अन्य प्रकार के जरायम से जुड़े लोगों के लिए भी यह झील काफी मुफीद जगह साबित हो रही है। भूमाफियाओं, अवैध कब्जेदारों द्वारा दबंगई के बल बूते पर इस झील का अतिक्रमण भी किया जा रहा है।

"रन फार यूनिटी’ में एक साथ हजारों लोगों ने लगायी दौड़"

 जौनपुर। लौहपुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल का जन्मदिन शुक्रवार को जनपद के विभिन्न क्षेत्रों में मनाया गया जिसके परिप्रेक्ष्य में जगह-जगह विचार गोष्ठी का आयोजन करके उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर लोगों ने चर्चा करते हुये श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
    भारतीय जनता पार्टी की शहर  इकाई द्वारा शुक्रवार को देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लौहपुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल की 139वीं जयंती पर राष्ट्रीय एकता दौड़ (रन फार यूनिटी) का आयोजन हुआ जिसके मद्देनजर प्रातः साढ़े 7 बजे विकास भवन स्थित पटेल जी की प्रतिमा पर मुख्य अतिथि चन्द्रशेखर क्षेत्रीय संगठन मंत्री भाजपा काशी प्रांत एवं हरिश्चन्द्र सिंह जिलाध्यक्ष ने संयुक्त रूप से माल्यार्पण किया। तत्पश्चात् मुख्य अतिथि ने हरी झण्डी दिखाकर दौड़ का शुभारम्भ किया जिसमें विभिन्न दलों व संगठनों के शामिल हजारों लोग दौड़ पड़े। इस दौरान राजवीर सिंह दुर्गवंशी तिरंगा एवं रामकृष्ण बिन्द सरदार पटेल की प्रतिमा लेकर दौड़े जो आकर्षण के केन्द्र बने रहे। दौड़ में शामिल लोगों का नगर भर में जगह-जगह पुष्पवर्षा करके लोगांे ने स्वागत किया। कलेक्टेªट से निकली दौड़ ओलन्दगंज स्थित भाजपा कार्यालय के पास सभा के रूप मंे परिवर्तित हो गयी। सभा को मुख्य अतिथि चन्द्रशेखर, जिलाध्यक्ष हरिश्चन्द्र सिंह, पूर्व अध्यक्ष ईश्वरदेव सिंह, अशोक सिंह, पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर, अशोक श्रीवास्तव, पूर्व विधायक बांके लाल सोनकर, राधेश्याम जी, पूर्व विधायक सुरेन्द्र सिंह, शशि मौर्या सहित अन्य लोगों ने अपना विचार व्यक्त किया। दौड़ व सभा की अध्यक्षता नगर अध्यक्ष राजेश श्रीवास्तव एवं संचालन धर्मपाल कन्नौजिया ने किया। इस अवसर पर दिनेश सिंह बब्बू, नीरज सिंह, डा. रमाशंकर पाण्डेय, मेनका सिंह, सूर्य प्रकाश सिंह, श्याम मोहन अग्रवाल, कृष्ण कुमार जायसवाल, राजवीर दुर्गवंशी, मानिक चन्द्र सेठ, संतोष आर्या, महेश जायसवाल, विनीत अग्रवाल, आशीष गुप्ता, भीम सिंह, सुधांशू सिंह, विष्णु गुप्ता, गौतम गुप्ता, प्रदीप जायसवाल उपस्थित रहे।
    इसी क्रम में सिटी स्टेशन के पास स्थित संत गुरूपद संभव राम एकेडमी में प्रबंधक डा. रीना सिंह ने पौधरोपण किया जहां उपस्थित लोगों ने पटेल जी के जीवन पर प्रकाश डाला। इस अवसर पर शिल्पी सिंह, रामजीत यादव, देवेश मिश्र, निशाकांत, आशुतोष, अमित श्रीवास्तव, मनीषा सिंह, प्रीति सहाय, संध्या सिंह, आभा, तृप्ति, अर्चना, शालिनी सिन्हा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। अन्त में प्रधानाचार्या अर्चना सिंह ने सभी लोगों के प्रति आभार जताया।
    शाहगंज संवाददाता के अनुसार जेसीआई शाहगंज शक्ति की अध्यक्ष जेसी गीता जायसवाल के आवास पर गुरूवार को बैठक हुई जहां लौहपुरूष सरदार बल्लभ भाई पटेल की जयंती पर उन्हें याद किया गया। इस मौके पर सरदार पटेल के चित्र पर माल्यार्पण करते हुये उपस्थित सभी लोगों ने उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुये अपना विचार व्यक्त किया। संस्थाध्यक्ष गीता जायसवाल ने कहा कि हमें पटेल जी के जीवन के आदर्शों से सीख लेते हुये अपने जीवन में उतारना चाहिये। इसी क्रम में जेसी रीता जायसवाल, गीता जायसवाल, पूनम, आशा, मंजू अग्रहरि सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपना विचार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन पूनम जी ने किया। अन्त में जेसी आशा गुप्ता ने आभार व्यक्त किया।

मैनपुरी की धरा में पुरातत्व का खजाना

मैनपुरी जिले की धरा में पुरातत्व का खजाना है। मैनपुरी विकास खंड के गांव अस्योली में रविवार देर शाम खेत में चल रही खुदाई के दौरान प्राचीन मूर्तियां निकलीं। इनमें पांच फीट ऊंचा लाल पत्थर का शिवलिंग और गणपति व दुर्गा की मूर्तियां शामिल हैं। महिलाओं ने पूजा-अर्चना शुरू कर दी। अभी यह पता नहीं है कि यह कितनी पुरानी हैं। रात होने के कारण खोदाई बंद कर दी गई है, जो सोमवार सुबह शुरू होगी। अनुमान है कि खेत के नीचे प्राचीन मंदिर है।
अस्योली गांव निवासी अंकित मिश्र रविवार शाम करीब पांच बजे खेत में पानी लगाने के लिए नाली की खोदाई करा रहे थे। करीब साढ़े चार फीट गहराई पर मजदूरों का फावड़ा किसी पत्थर से टकराया। आसपास खोदाई की तो दो फीट नीचे शिवलिंग दिखाई दिया। पांच फीट ऊंचा भारी-भरकम शिवलिंग बाहर निकाला। लाल पत्थर का बना शिवलिंग पत्थर के ही चौकोर स्टैंड पर रखा था। बाद में स्टैंड निकाला गया। करीब आठ फीट खोदाई के बाद पत्थर की नक्काशीदार गणपति और मां दुर्गा की प्रतिमा निकली। ये मूर्तियां मिंट्टी में सीधी गड़ी थीं।
जिस स्थान पर मूर्तियां निकली हैं, वहां से करीब तीन सौ मीटर दूर महाराजा तेज सिंह की गढ़ी है। अब ये भी जीर्णशीर्ण हो गई है। ग्रामीणों का मानना है कि पहले यहां मंदिर रहा होगा, जो मिंट्टी में दब गया।

टेंशन में ‘ड्रैगन‘ भारत की दो हजार किलोमीटर लंबी सड़क को लेकर चीन परेशान



नई दिल्ली. गृह मंत्रालय पूर्वोत्तर में  दो हजार किलोमीटर लम्बी सडक बनाने की योजना पर अभी काम चल ही रहा है कि  भारत और चीन के बीच फिर से तनातनी के आसार बन गए हैं। गृह मंत्रालय के बॉर्डर मैनेजमेंट का काम देख रहे एक अफसर ने बताया, ‘चीन पहले ही सीमा पर रेल और सड़कों का जाल फैला चुका है। हम अपने इलाके में कुछ भी बनाएं इसका चीन से कोई लेना देना नहीं है।‘ इस अधिकारी ने बताया कि मंत्रालय अरुणाचल में सड़क बनाने की योजना पर कैबिनेट से मंजूरी ले रहा है। इस योजना को प्रधानमंत्री कार्यालय का समर्थन भी हासिल हो चुका है।  चीन ने भारत की उस योजना पर चिंता जाहिर की है, जिसके तहत अरुणाचल प्रदेश के सीमांत इलाकों में सड़क बनाई जानी है। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता होंग लेई ने कहा कि उम्मीद है सीमा विवाद हल होने से पहले भारत इस तरह की कोई हरकत नहीं करेगा।


पार्क के बाहर से हटाए गये कूडे के ढेर

जौनपुर शहर के भगत सिंह पार्क के आस-पास फैली गंदगी से आम जनों की मुश्किलें बढ़ गई थी, जन समस्यों को दृष्टिगत कर अध्यक्ष दिनेश टण्डन ने नगर पालिका के कर्मचारियों को भेंज कर जेसीबी के जरिये पार्क के बाहर जमंे कूडे का ढेर हटवा दिया। जिससे आम जनों ने राहत की सांस ली । बता दे कि शहर के मध्य सब्जीमंडी में शहीद-ए-आजम भगत सिंह के नाम पर पार्क का निर्माण कराया गया था। इसके पीछे नगर पालिका प्रशासन का मत था कि कि शहर के लोग वहां जाकर कुछ देर स्वच्छ वातावरण प्राप्त कर सकेगें।

आयोग में 55 हजार मामले विचाराधीन

जौनपुर: राज्य सूचना आयुक्त राजकेश्वर सिंह ने कहा कि इस समय लगभग 55 हजार मामले आयोग में विचाराधीन हैं। समय से सूचना न देने वाले अधिकारियों को 25 हजार रुपये का जुर्माना लगता है, इसे उनके वेतन से वसूला जाता है।
श्री सिंह सोमवार को वाराणसी से लखनऊ जाते समय नगर के गूलरघाट मोहल्ले में मिथिलेश प्रताप सिंह 'गुड्डू' के आवास पर पत्रकारों से मुखातिब थे। उन्होंने कहा कि आयोग के समक्ष संबंधित जिलों व विभागों के जन सूचना अधिकारियों को ही उपस्थित होने का प्रावधान है। ऐसा न करने वालों से लिखित स्पष्टीकरण लिया जाता है कि किन परिस्थितियों में वे स्वयं नहीं आए।
उन्होंने कहा कि जन सूचना अधिकारी द्वारा समय से सूचना न देने पर प्रथम अपील की जाती है और वहां से भी समय से सूचना न मिलने पर राज्य सूचना आयोग में अपील होती है। राज्य सूचना आयोग पहली ही तारीख में संबंधित जन सूचना अधिकारी को जुर्माना नहीं लगाता है। पर्याप्त मौका देने पर अगर सूचना नहीं दी जाती है तो आयोग संबंधित जन सूचना अधिकारी पर जुर्माना लगाता है, वह भी उसके वेतन से काटा जाता है।
उन्होंने कहा कि जन सूचना कानून देश के नागरिकों को बहुत ताकत देता है। इसके माध्यम से देश में चल रही तमाम योजनाओं, गतिविधियों और विकास कार्यो की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।