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जौनपुर केराकत थाना क्षेत्र के बेहाड़ा गांव में पुलिस और बदमाशो के बीच मुठभेड़ हुई । पुलिस को सूचना मिली कि कुछ बदमाश लूट की योजना की योजना बना रहे , केराकत पुलिस औऱ चन्दवक पुलिस ने घेराबंदी की तो बदमाश पुलिस टीम पर फायरिंग करने लगे, वारदात में दोनो तरफ से हुई फायरिंग में एक पुलिस कर्मी सहित दो बदमाश अनिल राय और सुभाष यादव और प्रदीप राजभर को पुलिस ने तीन बाइक एक पिस्टल, एक तमंचा सहित गिरफ्तार कर लिया और चार बदमाश अंधेरे का फायदा उठाकर भागने में सफल रहे 24upnews.com

कर्ज में डूबे व्यक्ति ने फांसी लगाकर दी अपनी जान

जौनपुर । जनपद के चंदवक थाना क्षेत्र के उमरवार गांव में कर्ज में डूबे व्यक्ति ने सोमवार को फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया जिसकी जानकारी होने पर परिवार में कोहराम मच गया।
  खबरों के अनुसार उक्त गांव निवासी 40 वर्षीय अरविन्द राम काफी लोगों से कर्ज ले रखा था। कर्जदारों द्वारा पैसा मांगने पर आये दिन वह दबाव में रहता था। इसी को लेकर घर से कुछ दूरी पर स्थित एक खेत के बगल में आम के पेड़ में रस्सी का फंदा बनाकर झूल गया जिससे उसकी मौत हो गयी।सूचना पर पुलिस भी पहुंच गयी। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर अन्त्य परीक्षण हेतु भेज दिया।  घटना से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ हैए

सरकार से है एक सवाल-मातृभाषा हिन्दी कब बनेगी राष्ट्रभाषा

कपिल देव मौर्य
हिन्दी दिवस के अवसर पर पूर्व के वर्षो की तरह इस वर्ष भी पूरे देश में हिन्दी दिवस का आयोजन कर स्थिति एवं उपेक्षा पर लम्बी चैड़ी चर्चा परिचर्चा की गयी लेकिन एक सवाल आज भी बरकरार है कि देश की इस मातृ भाषा को राष्ट्रभाषा का दर्जा क्यों नही मिल सका है। इसका जबाब न तो राजनेता देते है न ही वे जिम्मेदार लोग जो हिन्दी के विकास एवं उत्थान का दम भरते नही थकते है। सवाल यह भी है कि ऐसी क्या बात है कि हमारी मातृ भाषा हिन्दी केवल राजभाषा तक सीमित हो कर रह गयी है। इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा देने में आखिरकार क्या कठिनायी देश की सरकार को हो रही है। आज देश का एक बड़ा जिम्मेदार तपका हिन्दी बोलने में क्यों शर्म महसूस कर रहा है। इस तरह के तमाम सवालो का जबाब देश की आवाम जानना चाहती है।
    देव भाषा संस्कृत से बनी हिन्दी भाषा को देश को एक सूत्र मे बांधने के लिए मातृ भाषा के रूप मे स्वीकारते हुए इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा देने की मांग उठने पर सन् 1949 में 14 सितम्बर को राजभाषा का दर्जा दे दिया गया। लेकिन जन मांग के अनुरूप आज भी इसको राष्ट्रभाषा का दर्जा नही मिल सका है। जब भी देश में इसे राष्ट्रभाषा का दर्जा देने की आवाज उठती है अपने ही देश के राज्यो से बिरोध की आवाज उठने लगती है। ऐसा क्यो किया जाता है जब हम अपनी मातृभाषा को सम्मान नही दे पा रहे है। तो हम कैसे उम्मीद करते है कि हममे एकता रहेगी हम एक सूत्र मे कैसे बधेगे।
    हिन्दी को राष्ट्रभाषा का दर्जा आज तक नही दिलापाने वाले लम्बरदार लोग प्रति वर्ष 14 सितम्बर को हिन्दी दिवस काआयोजन कर लम्बा चैड़ा भाषण देते हुए इसकी उपेक्षा की चर्चा केसाथ विकास की बात करके जिम्मेदारी से मुक्त होते नजर आते है।बाद में हिन्दी को भुलाकर फिर अंग्रेजियत की धारा मे बह जाते है।इन परिस्थतियो मे क्या हिन्दी का कुछ विकास संभव है। हिन्दी मातृभाषा है लेकिन एक बड़ी बिडम्बना यह है कि पूरे देश का सर्वे किया जाये तो कुछ प्रान्तो को छोड़ कर लोग हिन्दी को जानते हुए भी हिन्दी बोलना उचित नही समझते है। इससे सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि हिन्दी की स्थिति क्या है इसे कितना सम्मान मिलता है। 
     बतादे कि हिन्दी किसी जाति या मजहब की भाषा नही है देश की उन्नति एवं ज्ञान के बृद्धि की भाष जरूर है। हिन्दी की लिपि मे लाखों शब्दो का भन्डारण है इसका उच्चारण भी सरल है फिर भी लोग इससे परहेज करते है। जबकि दूसरी भाषा अंग्रजी जिसके सहारे देश विकास की राह तय करने मे जुटा है उसकी लिपि मे शब्दो की संख्या महज कुछ हजार मे है फिर भी इसे प्राथमिकता मिल रही है। यह स्थिति जहां हिन्दी के दुर्भाग्य का संकेत देता है वही पर देश को सवालो के कटघरे में भी खड़ा करता है। हां इतना जरूर है कि देश की केन्द्र सरकार द्वारा नारा दिया जाता है कि सरकारी काम काज हिन्दी मे किये जायें। लकिन सच्चाई यह है कि केन्द्र सरकार के सभी कार्य अंग्रेजी में ही होते है। यह दोहरी ब्यवस्था क्यों है क्या इसका जबाब सरकार के नुमायीन्दो के पास है।
     आज हिन्दी के विकास के लिए चुनौती तो सरकार की नीतियां है यह सबसे बड़ा दुखद  पहलू है कि आज भी हिन्दी सरकारी कामकाज की भाषा नही बन सकी है। लेकिन हिन्दी दिवस के दिन जिम्मेदार लोग शोर खूब मचाते है। बाद में भूल जाते है कि हिन्दी दिवस पर क्या संकल्प लिया है। हिन्दी का विकास तब माना जायेगा जब सरकार इसे भारतीय भाषा घोषित कर पूरे देश में सरकारी कामकाज हिन्दी में सुनिश्चित कराये और उसकी लगातार समीक्षा भी करे  कि कौन इसका अनुपालन कर रहा है कैान नही सरकार इसके प्रति कड़ा निर्णय ले तब सायद लोग इस मातृभाषा को दिल से स्वीकार कर सकेगे, अन्यथा केवल गाल बजाने से हिन्दी का विकास होना संदिग्ध प्रतीत होता है।

चक्रानुक्रम का फॉर्मूला पंचायत चुनाव में होगा लागू


मायावती सरकार की तर्ज पर ही होगी व्यवस्‍था, शासनादेश जारी
लखनऊ। प्रदेश सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए मंगलवार को आरक्षण नीति जारी कर दी। बसपा शासनकाल में वर्ष 2010 में हुए पंचायत चुनाव में लागू की गई चक्रानुक्रम की व्यवस्था इस चुनाव में भी पूरी तरह से लागू रहेगी। इससे ज्यादातर ग्राम पंचायतों का मौजूदा आरक्षण बदल जाएगा।
उच्चस्तर पर सहमति बनने के बाद प्रमुख सचिव पंचायतीराज चंचल कुमार तिवारी ने मंगलवार रात में आरक्षण नीति का आदेश जारी कर दिया। इसकी प्रति सभी डीएम को भेज दी गई है। आरक्षण क्रिया 12 अगस्त से 12 सितंबर के बीच 32 दिनों में पूरी की जाएगी। 8000 से ज्यादा नई ग्राम पंचायतें आबादी के आधार पर जहां आएंगी, वहीं शामिल हो जाएंगी। प्रमुख सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे त्रिस्तरीय पंचायतों में पदों व स्थानों के आरक्षण व आवंटन के संबंध में 9 जुलाई 2010 को जारी शासनादेश में लागू व्यवस्था के आधार पर कार्यवाही करें। आरक्षण के लिए कुल जनसंख्या, व एससी-एसटी की जनसंख्या के आंकड़े 2011 की जनगणना से लिए जाएंगे जबकि ओबीसी के लिए रैपिड सर्वे 2015 के आंकड़े लिए जाएंगे।
13 के बाद कभी भी चुनाव कार्यक्रम का ऐलान
पंचायतीराज विभाग ने आरक्षण की कार्यवाही को 13 सितंबर के पहले पूरा करने के लिए प्रस्तावित 35 दिनों की कार्यवाही में तीन दिनों की और कटौती की। विभाग की योजना है कि वह हर हाल में 13 सितंबर तक राज्य निर्वाचन आयोग को आरक्षण की कार्यवाही पूरी होने की सूचना उपलब्ध करा दे। समझा जाता है कि यदि विभाग तय कार्यक्रम के हिसाब से यह काम पूरा कर सका तो 13 सितंबर या इसके बाद आयोग कभी भी चुनाव कार्यक्रम घोषित कर सकता है।
ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों व जिला पंचायतों में स्थानों और प्रधानों के पदों के आरक्षण का प्रस्ताव डीएम तैयार कराएंगे। इसके लिए वे शासनादेश में दी गई प्रक्रिया का पालन करेंगे। प्रस्ताव तैयार कर ग्राम पंचायत कार्यालय, क्षेत्र पंचायत कार्यालय और जिला पंचायत कार्यालय के साथ डीपीआरओ कार्यालय पर चस्पा कराएंगे। इसे लगातार तीन दिन तक प्रदर्शित किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर यदि किसी को आपत्ति है तो वह प्रकाशन की तिथि से सात दिन के भीतर खंड विकास कार्यालय, जिला पंचायत राज अधिकारी कार्यालय अथवा डीएम कार्यालय में आपत्ति दर्ज करा सकेगा। इसके बाद डीएम की अध्यक्षता वाली समिति आपत्तियों का निस्तारण करेगी। इस समिति में सीडीओ, अपर मुख्य अधिकारी जिला पंचायत व जिला पंचायत राज अधिकारी शामिल हैं।
•प्रदेश में ग्राम पंचायतों की कुल संख्या-59163, क्षेत्र पंचायतों की-821 व जिला पंचायतों की 75 है।
•वर्ष 2011 की जनसंख्या के अनुसार प्रदेश की कुल जनसंख्या में एसटी तथा एससी की जनसंख्या का कुल प्रतिशत क्रमश : 0.57 व 20.6982 है।
•रैपिड सर्वे में ग्रामीण जनसंख्या में ओबीसी की जनसंख्या 53.33 प्रतिशत है।
•सामान्य निर्वाचन-2010 के बाद पहली बार गठित ग्राम पंचायतों में आरक्षित पदों के आवंटन में पूर्ववर्ती निर्वाचनों के स्टेटस को नहीं देखा जाएगा। इसकी जगह पदों के आवंटन के लिए बनाए गए आनुपातिक जनसंख्या के अवरोही क्रम में उनकी (प्रथम बार गठित ग्राम पंचायतों की) स्टेटस के आधार पर नए सिरे से आरक्षण व आवंटन किया जाएगा।
•निदेशालय से विकास खंडवार प्रधान के पदों का आरक्षण चार्ट तैयार कर जिलों को उपलब्ध कराना - 12 अगस्त से 19 अगस्त
•निदेशालय स्तर पर डीपीआरओ व अपर मुख्य अधिकारियों का प्रशिक्षण - 20 व 21 अगस्त
•जिला स्तर पर विकास खंड अधिकारियों का प्रशिक्षण- 22 व 23 अगस्त
•जिला स्तर पर आरक्षित ग्राम पंचायत के प्रधानों, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत के आरक्षित प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्रों के आवंटन का डीएम प्रस्ताव तैयार करेंगे - 24 से 30 अगस्त
•शासनादेश में तय स्थानों पर ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत के आरक्षित वार्डों के अवांटन की प्रस्तावित सूची का डीएम द्वारा प्रकाशन - 31 अगस्त से दो सितंबर
•प्रस्तावों पर आपत्तियां प्राप्त करने का समय - 31 अगस्त से 6 सितंबर
•आपत्तियों का परीक्षण व निस्तारण - 8 व 9 सितंबर
•डीएम द्वारा आरक्षित ग्राम पंचायतों, क्षेत्र पंचायतों व जिला पंचायतों के वार्डों की अंतिम सूची का प्रकाशन- 10 व 11 सितंबर
•डीएम द्वारा शासनादेश में बताए गए फ ॉर्मेट पर आरक्षित ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत व जिला पंचायत के वार्डों की सूचना निदेशक पंचायतीराज को उपलब्ध कराना -12 सितंबर

थानाध्यक्ष को ठेकेदार की महिला मित्र से आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करना पड़ा भारी

एस एस पी ने आरोपी थानाध्यक्ष को लाइन हाजिर कर, मामले की जांच एस पी प्रोटोकॉल को सौपी 
(सुबास पाण्डेय )
लखनऊ।राजधानी के मानकनगर थाना प्रभारी को एक युवती से आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करने पर उन्हें अपनी थानेदारी गवानी पड़ी 
सूत्रों की माने तो लखनऊ के  मानकनगर थानाध्यक्ष  राजेश यादव अपने पुलिस फ़ोर्स के साथ श्रृंगारनगर इलाके में एक ठेकेदार के घर पहुँच कर  तथा वहा उन्होंने ठेकेदार व उसकी महिला मित्र को हिरासत में लेकर थाने ले आये और  ठेकेदार से पूछताछ के दौरान उसकी दैहिक समीक्षा भी की  तथा युवती के प्रेमी को फ़र्ज़ी मुकदमे में फ़साने की धमकी भी दी।  एस ओ  ने ठेकेदार के महिला मित्र से यह भी कहा  की मेरी मित्र बन जाओ वरना तुम्हारे प्रेमी को जेल में सड़ा दूंगा 
फिलहाल एस एस पी ने आरोपी दरोगा राजेश यादव को लाइन हाज़िर कर दिया है और उन्होंने पुरे मामले की जांच एस पी प्रोटोकॉल समूचे मामले की जांच सौप दी है 



शिक्षा में आज भी अग्रणी है जौनपुर-महज एक गांव से दो दर्जन अधिकारी बने

कपिलदेव मौर्य    
    जौनपुर। शिराज ए हिन्द के नाम से बिख्यात सुफी-संतो की सरजमी जनपद जौनपुर शिक्षा के क्षेत्र में कल भी प्रथम पंक्ति में दृष्टिगोचर था और आज भी पहली ही कतार में है। इसके एक नही कई उदाहरण है जो इस जनपद के शिक्षा की एतिहासिकता को बड़े ही करीने से बयां कर रहे है। इस जिले मे शिक्षा ग्रहण करने वालो में शासक से लेकर देश के राजदूत एवं आईएएस आईपीएस पीसीएस पीपीएस तक का नाम शामिल है। तभी तो जिले एक ऐसा ग्राम जहां अब तक डेढ दर्जन से अधिक आईएएस आईपीएस व पीसीएस पीपीएस बन चुके है। जिसे माधोपट्टी ग्राम के नाम से जाना जाता है। हां इतना जरूर हें कि इतने अधिकारियों वाले इस गांव का विकास आज तक अपेक्षा के अनुरूप नही हो सका है। जो यहां के अधिकारियों के प्रति सवालिया निशाऩ  लगा रहा है।
    इस जनपद के बाबत इतिहास पर नजर डाले तो स्पष्ट रूप से पता चलता है कि मुगल शासक काल के समय में शेरशाह शूरी यहां पर सुफी संतो से शिक्षा ग्रहण करने आये थे और अटाला मस्जिद में वर्षो शिक्षा प्राप्त किये जिसके चलते जौनपुर का नाम पूरी दुनियां में चर्चए खास हो गया। बाद में जब वे इस देश के शासक भी बने तब उन्होने यहां के शिक्षा का विस्तारी करण कराया था। शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी स्थान रखने वाले इस जनपद को शिराजएहिन्द की उपाधि से मुगल शासक ने नवाजा था। तब आज तक यह जनपद शिक्षा के क्षेत्र में अपना एक महत्व पूर्ण स्थान बनाये हुए है।
    जहां तक माधोपट्टी गांव का प्रश्न है। जिला मुख्यालय से लगभग 05 किमी दूर स्थित इस गांव सभा की कुल आवादी 3000के आस-पास होगी इसमें कुल 400 परिवार है।गांव मौर्य,क्षत्रिय, ब्राम्हण यादव प्रजापति, आदि जतियो के लोग बड़ी संख्या में है। इस ग्राम में ब्रिटिश शासन आईएएस पीसीएस बनने का जो शिलशिला शुरू हुआ वह अज भी मुसल्सल जारी है।इस गांव के राम मूर्ति सिह सबसे पहले पीसीएस अधिकारी  ब्रिटिश शासन काल में बने और वही प्रेरणा श्रोत बन गये। इनको देखकर इस ग्राम के बच्चो में शिक्षा ग्रहण करने की एक ऐसी लगन जागी की लोग तरक्की की नित नयी इबारत लिखने लगे और जिले का नाम बुलन्दी पर पहुंचा दिये है। इस ग्राम के आईपी सिंह सन् 1956 आईएएस बने  फिर आईएफएस हुए और बिदेश में राजदूत बन कर जिला एवं देश दोनो का नाम रोशन किया।
        इसके बाद वीके सिंह 1962 में आईएएस बनकर देश के गृह सचिव तक बने, छत्रसाल सिह 1967 में आईएएस बनकर मद्रास कैडर की सेवा किये।इसी क्रम में अजयकुमार सिंह, मानस्वी सिंह,चन्द्रमौलीसिंह, जनमेय सिह,अमिताभ सिह शैलेस सिह मनीष कुमार सिह कु0 उषा सिह पीसी सिह  श्री प्रकाश सिह डा0दीनानाथ सिह  आईएएस बने  तो शशी कुमार सिह जूडिशियरी मे डीजे तक रहे है। पीसीएस सर्विस में वैशाली सिह प्रवीन सिह अलका सिह जय सिह नीरज सिह शशिकेश सिह पुष्पा सिह विशाल सिह एवं अशोक प्रजापति व अशोक यादव 2011 में पीसीएस बने 2015 में माधोपट्टी गांव की शिवानी सिह ने महिला कैडर में प्रथम स्थान प्राप्त कर जिला एवं गांव दोनो को एक बार फिर चर्चा मे ला दिया है।
     जहां तक गांव के विकास सवाल है।जिस गांव में इतने अधिकारी हो उस गांव का विकास अपेक्षा के अनुरूप न हो सके एक बड़ा एवं गम्भीर सवाल है। इसके पीछे की जो कहानी सामने आयी है। वह है कि इस गांव जो भी ब्यक्ति अधिकारी बना वह गांव को छोड़ दिया फिर मुड़कर इस गांव की ओर देखना भूल गया जिस माटी में खेला खयाउससे अलग होकर जहां पर नौकरी किया वही पर अपना आशियाना बना लिया। जिसका परिणाम है कि इस गांव में आज तक कोई कल कारखाना नही लग सका है। आज भी यहां के लोगो के जीविका एक मात्र साधन कृषि ही है। हां इस गांव में कोई मुकदमा नहीं है। नही आपस में किसी तरह का बिवाद ही है। शिक्षापर जोर ज्यादा है  यहां बतान जरूरी है कि इस ग्राम से पहली बार अधिकारी बने राममूर्ति सिह की प्रेरणा से एक इन्टर कालेज की स्थापना की गया जो शिक्षा के विस्तार में खासा सहायक है।
   गांव में स्टेशन तो है लेकिन नाली खड़नजा पानी अदि का गम्भीर संकट विधमान है। गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालो की एक बड़ी फेहरिस्त है। आज भी इस गांव मे लोग मड़ई अदि में जीवन जीने को मजबूर है। मात्र ग्राम प्रधान के भरोसे इस गांव का विकास होता है गांव के जा लोग अधिकारी बने उनके द्वारा इसे विकसित करने कोई प्रयास आज तक तो नही किया गया है।
      

हमारा पेशा : सत्ता पाने का मानक

डॉ0 भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी
 हमारा पेशा है लाशें ढोने का। उन लाशों को जिन्हें हमीं ने कत्ल किया है। पेशा.पेशा होता हैए चाहे लाश ढोएँ या कत्ल करें। किसी की हत्या करना भी एक पेशा है। इसी धन्धे के तहत हम कत्ल करते हैं रोज और इन्हीं लाशों को ढोकर ले जाते हैं।
     हमारा पेशा है लोगों के भाग्य बदलने का इसीलिए हम भाग्य बदलते हैं उनके जो हमें अपना भाग्य विधाता मानते हैं। हमारा पेशा है लोगों का विकास करनाए हम विकास करते हैं एक नेता के रूप में। नेता बनकर हम वायदे करते हैंए सब्जबाग दिखाते हैंए लोगों को दिग्भ्रमित करते हैं।
    लाशें ढोने से लेकर कत्ल करने तक और भाग्य विधाता से नेता बनने तक हम हमारे तरकस के हर तीर आजमाते हैं। परम्परा के तहत हम सब कुछ करते हैं। सबकी अपेक्षाओं के अनुरूप अपने को ढालने का प्रयास करते हैं। संविधान की आड़ लेकर हम सभी कार्य करते हैं।

     विशुद्ध नेता गिरी के अन्दाज में समाज के विकास व सुधार का दावा करते हैं। धर्म के नाम पर भी हम अपने पेशे को नया रूप देते हैंए फिर इसके बलबूते पर अपने पेशे का विस्तार करने की योजना बनाते हैं। धर्म को हाई लाइट करके हमें आशातीत सफलता मिलती है।
हमें आजमाने की गरज से लोग अवसर देते हैं और फिर हम इस मौके का भरपूर लाभ लेकर विस्तार करते हैं अपने पारम्परिक पेशे का।
     क्या वास्तव में लोग अज्ञानी हैंघ् लोगों को सत्य की जानकारी नहींघ् वह लोग हमें अपना नेता मान बैठते हैंए हमें मानते हैं अपना भाग्य.विधाता। यद्यपि सत्य यह है कि न कोई किसी का नेता है और न ही भाग्य विधाता। धर्म के नाम पर हम पाखण्ड करते हैं।
     धर्म पाखण्ड का अन्तकर्ता भी है ;यही सच्चाई भी हैद्ध। धर्म ही सृजन करता है लेकिन हम धर्म के नाम पर सृजन की जगह विनाश करते हैं। हमारी परिभाषा में धर्म जड़ सत्ता है। मानवता की समग्रशक्ति है जड़सत्ता जिसमें आनन्द की अनुभूति होती है। हमने मुर्दघट्टों को प्रतीक बनाया है धर्म का। पुराने खण्डहरों को धर्म का अभीष्ट कहकर लोगों में उन्माद भी भरा है।
     हमने लोगों में वर्गए जाति का बीजारोपण भी किया हैए जहर के बीज अंकुरित किए हैं। सर्वोच्च सत्ता के शासक को हमने अपने अन्दर स्थान नहीं दिया है। हमारे अन्दर है तो मात्र स्वार्थ के लिए जगह। धर्म के नाम परए जाति के नाम परए सम्प्रदाय के नाम परए वर्ग के नाम पर हम करते हैं व्यवसाय। यही हमारा पेशा है। स्वार्थ के सांचे में सजाकर हमने धर्मए जातिए सम्प्रदायए वर्ग को धन कमाने का साधन बनाया हैए सत्ता पाने का मानक माना है इन सबको।

जनपद में राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में बड़ा घोटाला।

कपिलदेव मौर्या
विभाग के अधिकारी, बाबू,दलाल एवं अपात्र हुए मालामाल,पात्र आज भी है बेहाल। 
    जौनपुर। सरकारी योजनाओ का लाभ सामान्य पात्र जनेा तक कैसे पहुंच सकेगा जब सरकारिया तंत्र ही भ्रष्टाचार के आकंठ में डूबा हो  ? जब अधिकारी अपने कर्मचारियों के साथ दलालों के चंगुल में हो जाये तो फिर सरकारी योजनाओं के विषय में बात करना ही गलत होगा। जी हां हम बात कर रहे है इस जनपद के समाज कल्याण विभाग की जो भ्रष्टाचार के आकंठ में गोते लगाने के लिए जाना जाता है और आये दिन भ्रष्टाचार के हैरतअंगेज कारनामे करना उसका आदत बन चुका है।अबकी बार राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना में करोणो रू0 के लूट पाट का मामला प्रकाश में आया है। अधिकारी कर्मचारी एवं दलाल तीनो मिलकर वित्तीय वर्ष 2014-15 में फर्जीवाड़े का बड़ा खेल किया है लाभार्थियों की सूची में अपात्रों का नाम डालकर लगभग एक करोण के आसपास का चूना लगा दिये है। अब कागजी बाजीगरी का खेल करके स्वयं को सुरक्षित करने की फिराक में है। जांच के नाम पर किसी दूसरे विभाग के लोगो को जिम्मेदार ठहराने का षड़यन्त्र कर रहे है तभी इनके कुकृत्य की पोल मीडिया के हाथ लग गयी।
      राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना एक ऐसी योजना है जिसके तहत सरकार ने घर के मुखिया के निधन पर सम्बन्धित बिधवा को 20 हजार रू0देने की ब्यवस्था दी है।सरकार के निर्णयानुसार शुरू  की गयी इस योजना के संचालन का दायित्व समाजकल्याण बिभाग को दिया जो इस समय भ्रष्टाचार के आकंठ में डूब हुआ है अपात्रों को योजना का लाभ पहुंचाने के लिए शासनादेश  की अनदेखी कर दी गयी हैा है। शासनादेश के मुताबिक मुखिया की मौत उसी वर्ष हुई हो जिस वित्तीय वर्ष  की धनराशि का बितरण किया जा रहा हो सम्बन्धित वित्तीय वर्ष  से पूर्व मरने वालों को इस योजना का लाभ नही दिया जा सकता है।जैसा कि शासनादेष  में स्पष्ट  उल्लेख यह भी है कि मृतको का प्रमाण पत्र तहसील अथवा नगरपरिषद  आदि जिम्मेंदार बिभागो से जारी हो और इन्टरनेट पर उसका नम्बर भी मौजूद हो तभी सही माना जयेगा।
    दलालों के माध्यम से फर्जी प्रमाण के आधार पर अपात्रों का नाम सूची में डालकर सभी ने सरकारी धन की बंदरबाट कर लिया है इसके बाद अपने को सुरक्षित रखने के लिए जांच कराने का एक खेल शुरू कर दिया तभी सच सामने आ गया । जांच हेतु समाजकल्याण अधिकारी द्वारा उपजिलाधिकारी सदर को जारी किये गये अपने पत्र पत्रांक संख्या 3038/स0क0रा0प0ला0यो0/2014-15 से दिनांक 21.11.14 में स्पष्ट रूप् से लिखित कहा है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र लगाकर लाभ लिए जाने की जांच कराकर अपात्र लाभार्थियो को लाभान्वित कराकर शासकीय धनराशि  का दुरुपयोग कराने में संलिप्त कर्मचारियों के बिरुद्ध बिभागीय कार्यवाही की जाये। समाज कल्याण अधिकारी के द्वारा जारी पत्र के साथ जो सूची दी गयी है उसमें 27 अपात्रों का नाम है इसके पूर्व में भी एक पत्र सदर तहसील मे भेजा गया है जिसमें 14 अपात्रों का नाम है इस प्रकार सदर तहसील के मात्र एक सर्किल में 41 अपात्रों को योजना का लाभ पहुँचाने की बात स्वयं समाजकल्याण बिभाग के अधिकारी कर रहे है मात्र एक सर्किल के अपात्रों को दिये गये धनराषि को जोड़ा जाये तो 5लाख 40 हजार रु0 हो जाता है। इसी तरह पुरे जनपद की छानबीन करायी जाये तो करोणो रू0 के लूटपाट का खुलासा संभव है। हालाकि बिभागीय सूत्र दबी जुबान से स्वीकार करते है कि इस योजना में लगभग एक करोण के आस पास की धनराशि की हेराफेरी का खेल हुआ है।
  समाज कल्याण बिभाग द्वारा पत्र जारी करने के पीछे जो मंशा  है यह कि अपने सहित बिभाग के लोगो व दलालों को सुरक्षित कर लिया जाये। सम्पूर्ण आरोप राजस्व और नगर परिषद के उपर थोप दिया जाये। समाज कल्याण अधिकारी के द्वारा जारी पत्र उपरोक्त यह भी संकेत दे रहा है कि फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के ही आधार पर प्रति लाभार्थी 20 हजार रू0 की धनराशि  दे दी गयी है। इसमे जो खेल हुआ है उसके अनुसार लाभार्थी को एक हजार रू0 के आसपास की धनराशि  देकर शेष  बचे पैसे में अधिकारी कर्मचारी व दलाल का हिस्सा लगा है। योजना की धनराशि के लूटपाट में बड़ी चतुराई के साथ पूरा खेल किया गया है। जिन अपात्रों के नाम से धनोपर्जन किया गया है उनके नाम है गीतादेबी मु0 भण्डारी इन्द्रावती देबी रसूलाबाद राधादेबी भण्डारी किसुनादेबी धन्नेपुर मुन्नी खासनपुर कौषिल्या खालिसपुऱ, कलपा जोगियापुर बंषराजी जोगियापुर, सुमन सेखूपुर, प्रभावती हुसेनाबाद, धनपत्ती उर्दूबाजार, प्यारी सहाबुद्दीनपुर, लालतीदेबी बलुआघाट, समरत्थी देबी कन्हईपुर जहाना बेगम भन्डारी आदि तमाम नाम है।  जिन अपात्रो के नाम से सरकारी धन की लूट की गयी है उनके पतियों की मौत पांच से बीस वर्षो  पूर्व हुयी है और बिभाग उन सभी की मौत वित्तीय वर्ष  2014-15 मान कर प्रार्थना पत्र लिया और सरकारी खजाने से धन निकाल कर आपस में बाँट भी लिया कहीं शोर न मचे इस लिए लाभार्थी को कुछ धन देकर  प्राप्त  रसीद भी ले लिया ताकि बिभाग के लोग सेफ रहें फंसे तो लाभार्थी योंकि शोर मचाने की दशा  में एफ आई आर तो लाभार्थी के ही उपर ही होगी। बिभाग के  बाबू  भ्रष्टाचार में किस हद तक घिर गए है इसका खुलासा तो बीत दिनो जनपद के तहसील मडि़याहूं का एक मामला प्रकाश में आया था जिसमें एक मृतक की विधवा को इस योजना के तहत  8 बार पैसा दिया गया जिसकी पोल सम्बन्धित बैंक के प्रबन्धक ने किया था इसके बाद उस मामले की जांच शुरू कर दी गयी। जांच का दायित्व जिलाविकास अधिकारी को दिया गया जो अभी लम्बित है और दूसरा मामला चर्चा में आ गया है।बिभाग में तैनात सन्तोश नामक एक लिपिक जो जनपद आजमगढ़ में तैनाती के दैारान किये एक मामले मे निलम्बित है इस जनपद में सदर तहसील का काम देख रहा था।
      शासनादेश  है कि कोई भी प्रमाण पत्र जिस पटल से जारी हो सत्यापन उसी पटल से कराया जाये परन्तु यहां तो नगर परिषद द्वारा जारी प्रमाण पत्र का सत्यापन राजस्व बिभाग से कराया जा रहा है। लाभार्थी को योजना का लाभ दिये जाने के बाद जांच का क्या औचित्य है इस बारे में बिभाग के अधिकारी कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे है।    एक सवाल जरूर उठता है कि बगैर जांच कराये पैसा क्यों और कैसे दे दिया गया। समाज कल्याण बिभाग में तो हर कदम पर भ्रष्टाचार है जहां से भी पर्दा हटाया जाये लाखों करोणो का घोटाले का मामला खुल ही जायेगा यहां पर पनपे भ्रष्टाचार  के पीछे दलालो की एक लम्बी फौज है जो प्रतिदिन सुबह10 बजे आफिस हाजिर हो जाते है और सायं 5 बजे ही आफिस छोड़ते है। स्वहित के लिए सरकार की योजनाओं को धड़ल्ले से पलीता लगा रहे है। उच्चस्तरीय जांच कराये जाने की दशा  में इस बिभाग में हर स्तर पर घोटाला मिलेगा। अब देखना है कि इस बड़े लूटपाट कांण्ड की उच्चस्तरीय जांच  होती है या जिम्मेदार लोग इसे ठन्डे  बस्ते में डालकर स्वयं भी इसमें हिस्सेदार बन जायेगे।                           

राजनैतिक प्रतिषोध के चलते मेरे पुत्र को फंसाया गया-पारस नाथ यादव

 कुंवर दीपक सिंह सोलंकी
    जौनपुर।प्रदेश  सरकार के उद्यान एवं खाद्य प्रसंसकाण मंत्री पारस नाथ यादव  ने कहा कि मेरे बढ़ते राजनैतिक कद से परेषान कुछ लोग मुझे बदनाम करने में लगे है। इसी लिए मेरे पुत्र को फर्जी मुकदमें में फंसाने का खेल किया गया लेकिन सच का खुलासा हो जाने के बाद अब बिरोधियो का मुहं काला हो गया है। मुझे बदनाम कर बिरोधी गण सरकार को घेरने का फर्जी मंसूबा पाले हुए थे। जांच के बाद जब सच सामने आ गया कि मेरा पुत्र निर्दोष है तो बिरोध करने वालों को चुल्लू भर पानी में डूब मरना चाहिए।
  मोहम्मद हसन डिग्री कालेज में मीडिया के लोगो से वार्ता करते हुए मंत्री श्री यादव कहा कि मेरे बिधान सभा क्षेत्र के ग्राम अहिरापुर में गत 6 दिसम्बर को बारात आयी थी मुझे वर कन्या दोनो पक्षो से निमंत्रण था जिसमें मेरा पुत्र लकी यादव गया था वहां पर किसी बात को लेकर घराती एवं बराती के बीच बिवाद हो गया मेरे लड़के ने बीच बचाव किया गांव के प्रदीप नामक एक लड़के को चोट आगयी जिसे कुछ बिपक्षी मेरे लेड़के से जोड़ दिया और मीडिया का सहारा लेकर मुझे बदनाम किया । लेकिन सच सामने आ गया चाटिल एवं उसके भाई जिसने एफआइ आर लिखाया था ने पलिस को बयान देदिया कि भीड़ में उसे कैसे चोट आईयह पता तो नही चला लेकिन कुछ लोगो के कहने पर लकी के खिलाफ मुकदमा लिखा देने की बात स्वीकार किया इसके बाद पुलिस ने मुकदमें को खत्म कर दिया  मैने भी कहा कि निश्पक्ष जंाच किया जाये यदि मेरा बेटा वास्तव में दोशी हेा तो उसके बिरूद्ध कार्यवाही की जानी चहिए।जंाच के दैारान यह भी पता चला कि मेरे राजनैतिक बिराधी सारा खेल किये ।
   उन्होने  कहा कि हम सरकार में रह कर केवल बिकास की बाते करते है। और बिकास हेतु लगे रहते है।लम्बे  राजनैतिक जीवन में तमाम कार्य हमने कराया है इस बार तो मडिकल कालेज से लेकर पुल पलिया सड़क आदि के कई बिकास के कर्यो को कराया है प्रदेष सरकार के युवा मुख्यमंत्री जी बिकास के प्रति खासे गम्भीर है उनके दिषानिर्देष में प्रदेष की बर्तमान सरकार अपने घोशण पत्र के सभी वादो को पूरा कर रही है। साथ ही साथ भाजपा पर निषाना साधते हुए कहा कि 2014 में बीते दिवस सम्पन्न हुए लोक सभा के चुनाव में बिकास का नारा देकर 73 सांसद जीतने वाले केन्द्र सरकार के लोग अब प्रदेष के बिकास की ओर ध्यान नही दे रहे है। प्रदेष के मुख्यमंत्री सभी चुनावी कटुता को भूल कर प्रदेष के बिकास हेतु केन्द्र में झोली फैलाये लकिन केन्द्रसरकार के लोग कोई ध्यान नही दे रहे है।लकिन सरकार अपने संसाधन से पानी बिजली सड़क सहित आदि तमाम बिकास के कार्यो लगी है।2017 के पहले यह प्रदेष उत्तम प्रदेष बन जायेगा।

कार्य- संस्कृति की सुरीली तान ...

अपने देश में एक चीज कामन है। नई सरकार हो या नया अधिकारी , चार्ज लेते ही वह कार्य संस्कृति की सुरीली तान छेड़ते हुए मातहतों को खूब हड़काता है। ... मेरे समय में यह सब नहीं चलेगा... मुझे सब काम समय से चाहिए... बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करूंगा... वगैरह - वगैहर। एेसी घुड़कियों पर मातहत जरूर मन ही मन हंसते होंगे। क्योंकि सच्चाई उन्हें पता होती है। समय के साथ जब कुछ नहीं बदलता तो साहब लोग खुद ही बदल जाते हैं, और बिल्कुल यू टर्न लेते हुए ... अब क्या बच्चे की जान लेगा ... की तर्ज पर उन्हीं का पक्ष लेने लगते हैं, जिन्हें पहले हड़काया था। पश्चिम बंगाल में रिकार्ड 34 साल तक राज करने वाली कम्युनिस्ट सरकार  सरकारी कर्मचारियों की प्रबल पक्षधर मानी जाती थी। उस काल खंड में ममता बनर्जी जब विपक्ष में थी, तब वे प्रदेश की कार्य संस्कृति बदलने की खूब बातें किया करती थी। परिवर्तन के बाद सत्ता मिलने पर भी  कुछ दिनों तक वे अपने रुख पर कायम रही। लेकिन बाबुओं की छुट्टी और एरियर - बोनस के मामले में अब वे कम्युनिस्टों से ज्यादा दरियादिल साबित हो रही है। अब राज्य में उन मौकों पर भी छुट्टी रहती है, जो कम्युनिस्ट राज में नहीं हुआ करती थी।  क्या संयोग है कि इस साल अपने देश में बड़े त्योहारों जैसे दुर्गापूजा व दशहरा की शुरूआत अक्टूबर महीने की पहली तारीख से  हुई। हर तरफ कायम त्योहारी खुमारी को देखते हुए लगता है कि यह पूरा महीना ही हम त्योहारों को समर्पित करने जा रहे हैं। दुर्गापूजा की सर्वाधिक धूम पश्चिम बंगाल में रहती है। यहां राज्य सरकार ने 30 सितंबर से ही छुट्टी घोषित कर दी है, जो लगातार 8 अक्टूबर तक चलेगी। इस दौरान राज्य सरकार के तमाम दफ्तर पूरी तरह से बंद रहेंगे। अदालतों व कुछ अन्य अर्द्धसरकारी दफ्तरों में घोषित छुट्टियों की अवधि और लंबी है। गिने - चुने उन विभागों में जो इस अवधि में खुले भी तो उनमें उपस्थिति नाममात्र की देखी जा रही है। ज्यादातर बाबुओं ने कैजुअल लीव व अन्य तरीकों से अपनी छुट्टियों को और लंबा करने का इंतजाम पहले ही कर लिया है।  कहने को तो राज्य सरकार के तमाम दफ्तर 9 अक्टूबर से खुल जाएंगे, लेकिन त्योहार की खुमारी को  देखते हुए नहीं लगता कि इसके बाद भी सामान्य परिस्थितयों में काम - काज हो पाएगा। क्योंकि इस दौरान भी कार्यालयों में उपस्थिति कम रहेगी, और जो बाबू मौजूद भी रहेंगे, उनकी बतकही का केंद्र त्योहार के दौरान मिली छुट्टियों के उपभोग व सैर - सपाटा रहेगा न कि लंबित फाइलों की बोझिल जिम्मेदारी। यह सब करके कोई भी अपना मूड खराब करना नहीं चाहेगा। हर तरफ त्योहारी माहौल को और खुशनुमा करने की ही आपाधापी नजर आएगी। वैसे भी  दफ्तर खुलने के बाद दीपावली और छठपूजा को दिन ही कितने बचेंगे। पर्व - त्योहार की खुमारी सिर्फ सरकारी महकमों में पसरी है, एेसी बात नहीं। निजी क्षेत्र भी इसकी चपेट में है। कुछ दिन पहले मेरे एक मित्र ने कुछ पुस्तकें मेरे पते पर कूरियर से भेजी। डाक विभाग की चिर - परिचित कार्य शैली को देखते हुए उन्होंने यह जिम्मा एक नामी कंपनी को सौंपा। जो चंद घंटों में कुछ भी कहीं भी पहुंचा देने का दावा करते नहीं थकती। लेकिन घंटों की कौन कहे, एक  हफ्ते बाद तक वह पुस्तक मुझ तक नहीं पहुंच पाई। महकमे के अधिकारियों से संपर्क करने पर कि भैया , तुम लोग तो पहली उड़ान , बस चंद घंटों की बात जैसे दावे करते नहीं थकते।  लेकिन एक  पार्सल बुक किए सप्ताह बीत गया, लेकिन उसका अब तक कोई पता नहीं , आखिर माजरा क्या है। जवाब मिला ... जानते तो हैं ना सर, त्योहार का मौसम है। मैने कहा ... अरे भाई , यह तो सरकारी दफ्तरों का जुमला है, तुम कारपोरेट वाले भी अब यह फंडा आजमाने लगे। वैसे तो तुम लोग स्मार्टनेस की बड़ी - बड़ी हांकते हो। इस पर उसने अधिकांश  स्टाफ  के छुट्टी पर जाने की दलील देते हुए कहा कि क्या करें  साहब , जिन्हें काम करना है वे छुट्टी पर है तो  किया भी क्या जा सकता है। साथ ही उसने यह भी स्पष्ट कर दिया कि दीपावली तक हर तरफ यही स्थिति रहनी है। इस हालात से पुलिसवाले बड़े खार खाए हुए हैं। एक जवान ने शिकायती लहजे में कहा कि त्योहारी मौसम में एक हमीं है, जो रात - दिन खट रहे हैं। इसके बावजूद हमें लोगोॆं की गालियां सुननी पड़ती है। नकारेपन और घूसखोरी का इल्जाम तो हम पर हमेशा चस्पा रहता है। जबकि हम भी आखिर है सरकारी कर्मचारी ही...। एेसे में हम अगर कहीं से दस - बीस ले लेते हैं, तो लोगों की छाती पर सांप क्यों लोटने लगता है।  उस जवान की इस दलील पर मैं सोच में पड़ गया।