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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को याद करते हुए सरकार पर दागे 3 सवाल

नई दिल्ली- 14 फरवरी 2019 का वो काला दिन जब अपने जवानों की शहादत पर पूरे देश की आंखों में आंसू थे। दोपहर के 3:30 बजे रहे थे, जब आतंकियों ने वीर जवानों के काफिले पर हमला कर दिया था। इसमें देश के 40 जवानों ने अपनी शहादत दी थी। एक साल हो गया है इस दुखद घटना को, लेकिन आज भी दिलों में पुलवामा हमला का दर्द मौजूद है। वहीं, आज इन जवानों को श्रद्धांजलि भी दी जा रही है।कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को याद करते हुए सरकार पर सवाल भी दागे हैं। उन्होंने पुलवामा हमले वाले दिन सरकार पर हमला बोलते हुए पहले सवाल पूछा- हमले से सबसे ज्यादा किसे फायदा हुआ?, दूसरा- हमले की जांच में क्या निकला?, तीसरा- हमले से जुड़ी सुरक्षा खामी के लिए भाजपा सरकार में अब तक किसको जवाबदेह ठहराया गया है?पीएम नरेंद्र मोदी ने पिछले साल हुए पुलवामा हमले में जान गंवाने वाले बहादुर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। कहा कि वे सबसे अलग थे जिन्होंने हमारे राष्ट्र की सेवा और रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। भारत उनकी शहादत को कभी नहीं भूलेगा।

सभी समस्याओं का समाधान 2020 में हो जाएगा -सहाराश्री

दो बड़े विदेशी निवेशक रियल एस्टेट और सिटी डेवलपमेंट व्यवसायों में हमारे साथ -(सहारा श्री)
हालात पहले ही ठीक हो जाते, यदि मिलती आवास विकास में व्यापार की छूट-  (सहाराश्री)
सेबी में जमा 22000 करोड़ रु. भी इस साल वापस आने की उम्मीद- (सहाराश्री)
एक दिन की भी देरी पर हर निवेशक को दिया जाएगा अतिरिक्त ब्याज- (सहाराश्री)
कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं, जो इस साल सारी समस्याओं को दूर कर देंगे- (सहाराश्री)

2020 में  हो जाएगा सभी समस्याओं का समाधान: सहारा श्री
सहारा समूह के प्रमुख “सहारा श्री”  सुब्रत रॉय जी ने इस साल सभी समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद जताई है। उन्होंने कहा कि दो बड़े विदेशी निवेशकों से सहारा के रियल एस्टेट और सिटी डेवलपमेंट जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए निवेश पर सार्थक बात हुई है। इसके साथ ही उन्होंने सेबी में जमा किए गए लगभग 22,000 करोड़ रूपए भी इस साल वापस आने की उम्मीद जताई है।
रॉय ने सभी सहारा निवेशकों को यह भी आश्वासन दिया है कि उन्हें उनकी निवेशित राशि पूरे ब्याज के साथ मिलेगी और एक दिन की देरी के लिए भी अतिरिक्त ब्याज दिया जाएगा। 1 फरवरी 2020 को मनाए गए सहारा समूह के 42 वें स्थापना दिवस के अवसर पर निवेशकों को लिखे पत्र में, सहारा श्री ने कहा कि “समूह हमेशा समय पर भुगतान और सेवाओं में उत्कृष्टता की अपनी परंपरा को बरकरार रखता है, लेकिन पिछले सात वर्षों के दौरान भुगतान में देरी हुई है, जिसके लिए ‘कुछ अवांछनीय परिस्थितियां’ जिम्मेदार हैं।”
पूंजी बाजार नियामक सेबी के साथ विवाद पर रॉय ने कहा कि संपत्तियों की बिक्री या गिरवी रखने से या ज्वांइट वेंचर से मिली पूरी राशि को सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के कारण सेबी-सहारा रिफंड खाते में जमा कर दिया गया है।
सहारा श्री ने कहा कि "इसमें से, हम संगठनात्मक कार्यों के लिए एक रुपये का भी उपयोग नहीं कर सकते हैं, यहां तक ​​कि सम्मानित निवेशकों का पैसा चुकाने के लिए भी इसका इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि सहारा के पास जमीनें हैं, लेकिन वहां इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए धन की कमी है जिस कारण उन पर टाउनशिप या कॉलोनियां विकसित करना मुश्किल हो गया है। सेबी-सहारा खाते में बड़ी रकम जमा होने की वजह से आवासीय इकाई के खरीदारों द्वारा किए गए अग्रिम भुगतान का धन भी इसी खाते में है।
हालांकि, उन्होंने कहा कि इन समस्याओं को जल्द ही हल कर दिया जाएगा क्योंकि "दो बड़े विदेशी निवेशक हमारी रियल एस्टेट और सिटी डेवलपमेंट व्यवसायों में हमारे साथ आ रहे हैं"। "सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए, कुछ समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं, जो इस वर्ष, यानी 2020 के भीतर सहारा की समस्याओं को हल कर देंगे"।
सेबी ने 2011 में सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SIRECL) और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (SHICL) को वैकल्पिक रूप से OFCD (Optionally Fully Convertible Bonds) के माध्यम से लगभग तीन करोड़ निवेशकों से जुटाए गए धन को वापस करने का आदेश दिया था।
अपील और क्रॉस-अपील की लंबी प्रक्रिया के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त, 2012 को सेबी के निर्देशों को बरकरार रखा, जिसमें दोनों फर्मों से निवेशकों से वसूले गए धन को 15 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करने को कहा गया था।
सहारा को अंततः निवेशकों की धन वापसी के लिए सेबी के साथ अनुमानित 24,000 करोड़ जमा करने के लिए कहा गया था, हालांकि समूह ने हमेशा इसे "दोहरे भुगतान" के रूप में बनाए रखा है क्योंकि यह पहले से ही सीधे 95 प्रतिशत से अधिक निवेशकों को वापस कर दिया गया था।
कल वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने सदन में पूछे गए एक सवाल के जवाब में सहारा-सेबी विवाद के बारे में जानकारी दी थी और ये भी बताया था कि भुगतान के लिए एक कट ऑफ डेट तय कर दी गई थी जिसके बाद कोई दावा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इस मसले पर सहारा श्री कहते हैं, कि "चौथे विज्ञापन में, सेबी ने स्पष्ट रूप से लिखा था कि इसके बाद, किसी भी दावे को स्वीकार नहीं किया जाएगा। यह अंतिम विज्ञापन लगभग एक साल पहले सामने आया था, जिसका अर्थ है कि आगे कोई भुगतान लंबित नहीं है। उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के अनुसार 22,000 करोड़ अंततः सत्यापन के बाद सहारा में वापस आ जाएगा।
ताजा आंकड़ों के अनुसार, सेबी के पास लंबित धन वापसी आवेदनों में ब्याज के हिस्से को छोड़कर अधिकतम 20 से 25 करोड़ रूपये की देनदारी ही शामिल हैं।
सेबी ने अपनी अंतिम वार्षिक रिपोर्ट में कहा था कि 'सेबी-सहारा रिफंड' खाते में पड़े 20,173 करोड़ रुपये (निवेशकों को किए गए रिफंड के लिए प्रदान करने के बाद उस पर अर्जित ब्याज राशि के साथ वसूली गई राशि) को राष्ट्रीयकृत बैंकों में 31 मार्च, 2019 को उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार जमा करवाया गया था।
सहाराश्री ने कहा क

ि “सहारा समूह पर लगाई गई बंदिशें व्यवसाय करना मुश्किल बना रही हैं। हालात बहुत पहले ही ठीक हो जाते, यदि हमें सिर्फ आवास विकास में व्यापार करने के लिए थोड़ी सी छूट दे दी जाती"।
उन्होंने कहा कि समूह के पास पूरे भारत में हजारों एकड़ भूमि है, लेकिन वे 100 से 300 एकड़ के बड़े पार्सल में फैली हुई हैं। रियल एस्टेट बाजार में व्यापक मंदी के कारण ऐसे बड़े भूखंडों के लिए कोई तैयार खरीदार नहीं हैं।
जबकि कुछ इच्छुक खरीदार हैं, जो वास्तविक मूल्य का एक-चौथाई या उससे भी कम की पेशकश कर रहे हैं, लेकिन इतनी कम दरों पर सौदा संभव नहीं है, क्योंकि सहारा को सरकारी सर्कल रेट के 90 प्रतिशत से नीचे कोई भी बिक्री करने की अनुमति नहीं है।




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सहारा ने जमा किए 15448 करोड़ , सेबी ने निवेशकों को लौटाए 110 करोड़ - अनुराग ठाकुर
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सहारा सेबी रिफंड अकाउंट में ब्याज समेत कुल 22,000 करोड़ रु जमा – सहारा
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 रिफंड के लिए आवेदन की समय सीमा खत्म
 2 जुलाई 2018  थी आवेदन की आखिरी तारीख
 रिफंड के दावे के लिए सेबी ने जारी किए कई   विज्ञापन
 सेबी को मिले कुल 19,560 रिफंड के दावे
 कुल दावे की ब्याज रहित राशि 81.3 करोड़ रु
 अब तक 14,146 दावों का निपटारा
 सेबी ने निवेशकों को लौटाए सिर्फ 109.86 करोड़ रु

लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में वित्त मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि सहारा-सेबी फंड में जमा 15,448 करोड़ रु की रकम में से निवेशकों को अब तक करीब 110 करोड़ लौटाए गए हैं। 
लोकसभा में एक सवाल के जवाब में वित्त मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि सेबी ने सहारा समूह की दो कंपनियों SIRECL और SHICL के निवेशकों को रिफंड के लिए अखबारों में कई बार विज्ञापन जारी किया गया , लेकिन अब तक सिर्फ 81.30 करोड़ के मूलधन रिफंड के लिए ही दावे आए । वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर की ओर से लोकसभा के पटल पर रखे गए लिखित जवाब में कहा गया है कि सेबी ने 25 मई 2013 के अलावा 2014 के अगस्त, सितंबर और दिसंबर महीने में सहारा समूह की दो कंपनियों में निवेश करने वाले निवेशकों को रिफंड देने के लिए विभिन्न अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित करवाए थे।
सेबी ने अपनी ऑफिशियल वेबसाइट पर रिफंड वापसी के लिए आवेदन का एक मसौदा भी अपलोड किया था ताकि निवेशक अपना रिफंड हासिल करने के लिए आसानी से आवेदन कर सकें। इसके बाद सेबी ने 26 मार्च 2018 और 19 जून 2018 को फिर से विज्ञापन प्रकाशित कर निवेशकों से रिफंड लेने के लिए आवदेन करने को कहा। इस विज्ञापन के जरिए सेबी ने निवेशकों को रिफंड लेने के लिए आवेदन करने की अंतिम तारीख 2 जुलाई 2018 तय की थी । सेबी के विज्ञापन के मुताबिक ये ‘कट ऑफ’ तारीख थी और निवेशकों के लिए आवेदन का आखिरी मौका था । सेबी ने ये भी कहा था कि 2 जुलाई 2018 के बाद किसी भी रिफंड के दावे पर विचार नहीं किया जाएगा ।
लोकसभा में वित्त मंत्रालय की ओर से रखे गए दस्तावेजों के मुताबिक अखबारों में कई बार प्रकाशित विज्ञापन के बाद सेबी को निवेशकों के कुल 19,560 आवेदन प्राप्त हुए, जिसमें कुल 81.30 करोड़ लाख मूलधन की डिमांड की गई थी. सेबी ने अब तक 14,146 आवेदनों का निपटारा करते हुए कुल 109.86 करोड़ की रकम निवेशकों को वापस किए हैं जिसमें 58.52 करोड़ मूलधन और 51.34 करोड़ ब्याज की रकम शामिल है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक निवेशकों के आवेदन के सत्यापन और पूर्व जस्टिस बी एन अग्रवाल के अनुमोदन के बाद निवेशकों को रिफंड दिए गए हैं। वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर की ओर से लोकसभा में पेश दस्तावेज में ये भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार अब तक सेबी-सहारा रिफंड अकाउंट में 15,448.67 करोड़ की रकम जमा हो चुकी है साथ ही ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट के माध्यम से सेबी को वेल्लोर स्थित एक प्रॉपर्टी से जुड़े 41.59 करोड़ रुपये का चेक भी सौंपा है।
सरकार की ओर से लोकसभा में दिए गए जबाव से ये स्पष्ट है कि सहारा-सेबी रिफंड अकाउंट में जमा 15 हजार 448.67 करोड़ का मूलधन जो अब ब्याज समेत करीब 22 हजार करोड़ हो चुका है, उसमें से निवशेकों को करीब 110 करोड़ की रकम ही लौटाई जा सकी है। सहारा समूह ने कई मौके पर ये कहा कि उसने अधिकांश निवेशकों की रकम लौटा दी है, इसलिए जो निवेशक सेबी से रिफंड का दावा कर रहे हैं, उनकी संख्या और धनराशि काफी कम है।

सेबी ने SIRECL और SHICL के अलावा सहारा ग्रुप की अन्य कंपनियों जैसे मेसर्स सहारा क्यू शॉप यूनिक प्रोडक्ट रेंज लिमिटेड, मेसर्स सहारा इंडिया कमर्शियल कॉरपोरेशन लिमिटेड, मेसर्स सहारा क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड, मेसर्स सहारा प्राइम सिटी लिमिटेड, सहारियन यूनिर्वसल मल्टी परपज सोसाइटी लिमिटेड, मेसर्स सहारियन ई मल्टी परपज सोसाइटी लिमिटेड, और मेसर्स स्टार्स मल्टी परपज को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के मामले की भी जांच की और पाया कि उपरोक्त कंपनियों की गतिविधियां सामूहिक निवेश योजना

 की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आती हैं, इसीलिए ये सेबी के दायरे से बाहर हैं।

श्री शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, लखनऊ में 15 फरवरी को वृहद रोजगार मेले का आयोजन

लखनऊ। श्री शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस, गोसाईगंज लखनऊ एवं सेवायोजन विभाग उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर वृहद रोजगार मेले का आयोजन 15 फरवरी को सुबह 9 से शाम 5 बजे तक किया गया है। वृहद रोजगार मेले का अयोजन श्री शारदा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस गोसाईगंज लखनऊ के कैंपस में होगा। इस वृहद रोजगार मेले में 50 से अधिक कंपनियां चार हजार से अधिक लोगों को रोजगार देगी।
              जिसमें Amazon, HCL, HDFC Bank, Ranstad, Sri Ram Group, Marriot, Sonata Finance, ICICI Prudential, Genpact, Kotak Life Insurance, Aegon Life, Tech Dindra, Unicode, Zomato, Swiggy, Eureka Forbes,  Bajaj Capital जैसी प्रमुख कंपिनिया भाग लेंगी।
इन्हें मिलेगा जॉब
रोजगार मेले में 10 + 2, ITI, डिप्लोमा, UG, PG के कॉमर्स, साइंस, आर्ट्स, मैनेजमेंट, होटल मैनेजमेंट, इंजीनियरिंग, आईटी, फार्मेसी, आयुर्वेदिक के छात्र भाग ले सकेंगे। रोजगार मेले में 18 से 35 वर्ष की आयु में युवा भाग ले सकेंगे।
यहां करें पंजीकरण
इसका पंजीकरण शुल्क शून्य है इसलिए जल्दी करें और www.ssimt.edu.in/jobfair2020 पर पंजीकरण करें। सीमित सीटों होने के कारण जल्द से जल्द पंजीकरण करें।

ऑपरेशन में डॉक्टर की लापरवाही से परेशान पीड़ित के परिजन स्ट्रेचर पर मरीज को लेकर पहुँचे डीएम कार्यालय, डीएम ने दिये जांच के आदेश

जौनपुर- जिले के लाइनबाजार थाना क्षेत्र स्थित नईगंज के पास एक प्राइवेट अस्पताल में  पथरी का ऑपरेशन कराने गई महिला का ऑपरेशन के बाद हालत बिगड़ी आनन फानन में डॉक्टर ने बीएचयू के लिए किया था रेफर,जहां बीएचयू अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की हालत को गम्भीर देखते हुए किया था रेफर,इस इलाज में परिजनों ने खेत बेच कर कराया था ऑपरेशन, परिवार की आर्थिक स्थित कमजोर होने के कारण परिजन मरीज को लेकर पहुँचे जिला अधिकारी जौनपुर कार्यालय, डाक्टर के खिलाफ कार्यवाही व आर्थिक मदद की लगाई गुहार,वही जिला अधिकारी के निर्देश पर जिला अस्पताल के सीएमएस जिला अस्पताल में कराया भर्ती,जिला प्रशासन नर्सिंग होम के खिलाफ जांच कर कार्यवाही की प्रक्रिया में जुटी । 
    बता दें कि जिले के लाइन थाना क्षेत्र के जिले के प्राइवेट नर्सिंग होम (संगम हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर) के डॉक्टर द्वारा सिकरारा थाना क्षेत्र के एक माह गांव पूर्व पेशेंट रीता जो जिले के बक्शा थाना क्षेत्र के मीरगंज गांव के रीता पत्नी शैलेन्द्र का आरोपी डाक्टर चन्द्रसेन यादव ने पीड़ित मरीज का ऑपरेशन किया था, ऑपरेशन सफल न होने की दशा में डॉक्टर ने आनन-फानन में बीएचयू के लिए किया था रेप बीएचयू के डॉक्टरों ने मरीज की हालत को गंभीर देखते हुए पीजीआई के लिए किया रेफर गरीब  परिवार के परिजन आज एंबुलेंस द्वारा जिलाधिकारी जौनपुर दिनेश कुमार सिंह के कार्यालय के गेट पर करीब 2 घंटे तक न्याय की गुहार में बैठे रहे जहां डीएम के आदेश पर सीएमएस ने महिला को देखकर तुरंत इलाज के लिए जिला अस्पताल के लिए आदेशित किया और मरीज को भर्ती कराया गया फिलहाल आरोपी अस्पताल के डॉक्टर के खिलाफ जिला प्रशासन कार्यवाही की कह रही बात फिलहाल इस मामले को लेकर जिलाधिकारी व डीएम का अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार पिछले 3 माह में33592 नए लाभार्थियों के आवेदनों को ऑनलाइन कराकर उनकी स्वीकृति प्रदान की गई

जौनपुर में माननीय मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार पिछले 3 माह में33592 नए लाभार्थियों के आवेदनों को ऑनलाइन कराकर उनकी स्वीकृति प्रदान की गई।सरकार की योजनाओं को गरीबों तक पहुंचाने के उद्देश्य से विधवा वृद्धावस्था और  दिव्यांग पेंशन पाने के पात्र लोगों के फार्म ऑनलाइन करा कर उनकी जांच कराकर के स्वीकृति प्रदान की गई है। इसी प्रकार  सामान्य जाति , अनुसूचित जाति व पिछड़ी वर्ग के गरीबों की लड़कियों की शादी के लिए शादी अनुदान के आवेदनों की ऑनलाइन करा कर उनकी जांच कर स्वीकृति प्रदान की गई है।राष्ट्रीय परिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत भी  मामलों जांच कराकर उनकी भी स्वीकृति प्रदान की गई। प्रत्येक गांव पंचायत में गांव पंचायत वार तिथि नियत कर इस कार्य के लिए शिविर लगाए गए ।लोगों को इन योजनाओं के बारे में बताया गया तथा उनके फार्म भरा कर ऑनलाइन किया गया और जांच करके उसकी रिपोर्ट संबंधित अधिकारी द्वारा अंकित करने के उपरांत उनकी स्वीकृति प्रदान की गई। इन शिविरों में पंचायत सचिव ,लेखपाल ,आशा, आंगनबाड़ी, रोजगार सेवक आदि उपस्थित रहे ।दूसरे चरण के शिविर में जन सेवा केंद्र के लोगों से कहा गया कि वह लैपटॉप लेकर के प्रत्येक गांव में बैठे और वहां पर जितने गरीब हैं पात्र हैं उनके आवेदनों को ऑनलाइन कराये। प्राप्त आवेदनों की जांच उपरांत उनकी स्वीकृति करने के बाद ब्लॉक बार शिविर लगाकर माननीय विधायकगण, माननीय मंत्री जी व सांसद जी के कर कमलों से ब्लॉक स्त्री शिविर में लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र प्रदान की गये। जो लोग शिविर में  नहीं आ पाये थे उनको स्वीकृत पत्र उनके घरों पर पहुंचाएं गये।इस अभियान के दौरान वृद्धावस्था पेंशन की 21350  विधवा पेंशन के  4859 दिव्यांग पेंशन के 3 620 शादी अनुदान के 1624 राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के 491 कुल 33592 लाभार्थियों के आवेदन स्वीकृत कर उनको योजनाओं का लाभ प्रदान किया गया। उनके खातों में धनराशि भी  भेजी जा रही है। जो अभी भी बचे लोग हैं उनसे भी अपील है अगर वह अपना आवेदन तत्काल ऑनलाइन करा दे जिससे  उनकी जांच करके   लाभ दिया जा सके ।माननीय मुख्यमंत्री जी की महत्वाकांक्षा है कि किसी भी गरीब को सरकार की गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं से वंचित न रहना पड़े ।अगर पात्र हैं उनको लाभ इसका दिलाया जाए। उसी क्रम में इस कार्य को कराया गया है। यह प्रक्रिया चलती रहेगी अगले एक माह में  बचे 20000 का लक्ष्य बनाकर कार्य किया जा रहा है।

बच्‍चा वार्ड में भर्ती बच्‍चे के गायब होने से जिला अस्‍पताल में मची हड़कंप

आगरा- बच्‍चा वार्ड में भर्ती बच्‍चे के गायब होने से जिला अस्‍पताल में हड़कंप मच गया। पुलिस को खबर की गई। खोजबीन के बाद जब बच्‍चा मिल गया, तब जाकर अस्‍पताल प्रबंधन और पुलिस की चैन में सांस आई।मामला मथुरा कोतवाली क्षेत्र के जिला महिला चिकित्सालय का है। यहां बच्‍चों की नर्सरी से बालक के चोरी होने की सूचना से पुलिस प्रशासन में अफरा तफरी मच गई थी। बुधवार सुबह कोसी खुर्द निवासी महिला खुशी के बच्चे की तबीयत खराब हो गई थी। बताते हैं कि वह अपने बच्चे को जिला महिला चिकित्सालय दिखाने लायी थी। बच्चे की हालत गंभीर होने ओर से बेबी नर्सरी में उपचार के लिए भर्ती कर दिया। हॉस्पिटल सूत्रों की मानें तो देर रात बच्चे की हालत में सुधार होने पर उसे मां को दूध पिलाने के लिए दे दिया था। तभी उसकी मां अपने एक माह के बच्चे को बिना हॉस्पिटल कर्मियों को बताये अपने साथ घर ले गयी। जब डॉक्टर संजय गुप्ता राउंड पर आए तो नर्सरी में एक बच्चा कम दिखा। नर्सरी से बच्चा गायब देख हॉस्पिटल प्रशासन में अफरा-तफरी मच गई। डॉक्टर गुप्ता ने घटना की सूचना पुलिस को दी। हॉस्पिटल से बच्चा चोरी की सूचना से पुलिस में अफरा तफरी मच गई। प्रभारी निरीक्षक कोतवाली अवधेश प्रताप सिंह, चौकी प्रभारी होली गेट उमेश शर्मा चिकित्सालय पहुंचकर मामले की जांच की। बाद पुलिस ने बच्चे के परिजनों को फोन कर जानकारी की तो पता चला कि बच्चे को उसकी मां अपने साथ अपने मायके ले गई। तब जाकर पुलिस हॉस्पिटल कर्मियों ने राहत की सांस ली। कोतवाली प्रभारी अवधेश प्रताप सिंह ने बताया कि बच्चा गायब होने सूचना मिली थी लेकिन बाद में पुलिस ने जानकारी की तो पता चला कि बच्चे की मां बच्चे को बिना बताए हॉस्पिटल से अपने मायके लेकर चली गयी। चिकित्सक संजय गुप्ता ने भी बताया कि मां बच्चा दोनों अपने घर पहुंच गए हैं। 

राजनीति के अपराधीकरण को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया

नई दिल्‍ली- राजनीति के अपराधीकरण को लेकर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने मामले पर चिंता जताते हुए तमाम राजनीतिक पार्टियों को निर्देश दिया कि आपराधिक बैकग्राउंड वाले उम्‍मीदवारों का चयन करने के 48 घंटों के भीतर उनकी पूरी प्रोफाइल पार्टी की वेबसाइट पर अपलोड करें। कोर्ट ने कहा,'पिछले चार लोकसभा चुनावों में इसमें काफी बढ़ोत्तरी हुई है। इस क्रम में तमाम राजनीतिक पार्टियां आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवार का नामांकन स्‍पष्‍ट होने के 48 घंटे के भीतर उम्मीदवार का आपराधिक रिकॉर्ड अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करें।‘ राजनीतिक क्षेत्र में बढ़ते अपराधीकरण को रोकने का प्रयास काफी पहले से किया जा रहा है।सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को कांग्रेस नेता कपिल सिब्‍बल ने सही ठहराया और कहा, 'यह सही फैसला है। राजनीति में अपराधी आ गए हैं और जनता को यह जानना चाहिए ताकि वे राजनीतिक पार्टियोंं से सवाल कर सकें।